बीबीएमकेयू में 282 एमटीएस की आउटसोर्सिंग नियुक्ति पर आजसू ने जतायी आपत्ति
बीबीएमकेयू
अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) ने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (बीबीएमकेयू) में 282 मल्टी-टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) की आउटसोर्सिंग नियुक्ति प्रक्रिया पर कड़ा विरोध जताया है. संगठन ने स्थानीय युवाओं के लिए 75% आरक्षण सुनिश्चित करने और निविदा की शर्तों में बदलाव की मांग की है.
धनबाद. अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश महासचिव विशाल कुमार महतो के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (बीबीएमकेयू) के कुलपति से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय में 282 मल्टी-टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) की आउटसोर्सिंग नियुक्ति प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए ज्ञापन सौंपा. आजसू ने स्थानीय युवाओं के हित में निविदा की शर्तों में संशोधन करने और प्रक्रिया में स्थानीय नियोजन से जुड़े प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की.
75 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को अवसर देने की मांग
आजसू ने आरोप लगाया कि एमटीएस की आउटसोर्सिंग नियुक्ति के लिए जारी निविदा प्रक्रिया में झारखंड के 75 प्रतिशत स्थानीय नियोजन से जुड़े प्रावधानों की अनदेखी की जा रही है. संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि 282 पदों पर होने वाली नियुक्ति में 75 प्रतिशत अवसर स्थानीय युवाओं के लिए सुनिश्चित किया जाये. संगठन का कहना है कि इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और नियुक्ति प्रक्रिया में स्थानीय हितों का ध्यान रखा जा सकेगा.
प्रतिनिधिमंडल ने तीन सितंबर को जारी शुद्धिपत्र में एमटीएस पदों के लिए पीएसएआरए लाइसेंस को अनिवार्य किये जाने पर भी सवाल उठाया. आजसू ने इसे अनुचित बताते हुए शर्त को हटाने की मांग की. संगठन का तर्क है कि एमटीएस जैसे पदों की नियुक्ति के लिए इस शर्त से स्थानीय स्तर की कई एजेंसियों के लिए निविदा प्रक्रिया में भाग लेना मुश्किल हो सकता है.
स्थानीय एमएसएमइ और श्रम सहकारी समितियों को राहत की मांग
आजसू ने निविदा में निर्धारित 20 करोड़ रुपये के टर्नओवर की शर्त में भी बदलाव की मांग की. संगठन के अनुसार स्थानीय एमएसएमइ और श्रम सहकारी समितियों को इस बाध्यता से छूट दी जानी चाहिए, ताकि स्थानीय संस्थाएं भी निविदा प्रक्रिया में भाग ले सकें. प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि निविदा की शर्तों में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और भागीदारी को बढ़ावा मिले.
12 सितंबर की अंतिम तिथि स्थगित करने की मांग
आजसू ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि निविदा की विसंगतियों को दूर कर संशोधित शुद्धिपत्र जारी किया जाये. इसके बाद ही बिड प्रक्रिया आगे बढ़ायी जाये. संगठन ने 12 सितंबर निर्धारित बिड की अंतिम तिथि को भी स्थगित करने की मांग की है, ताकि संशोधित शर्तों के बाद इच्छुक एजेंसियों को प्रक्रिया में भाग लेने का पर्याप्त अवसर मिल सके.
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