आयुष्मान आरोग्य मंदिर में शुरू होगा 'अबुआ दवाखाना', जानें ग्रामीणों को कैसे मिलेगा 5 चिकित्सा पद्धतियों की मुफ्त दवाओं का लाभ

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आयुष्मान आरोग्य मंदिर

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झारखंड सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 'अबुआ दवाखाना' योजना लाई है. इसके तहत अब आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और सिद्धा की आवश्यक दवाएं एक ही जगह मुफ्त मिलेंगी. यह पहल ग्रामीणों को दवा के लिए भटकने से बचाएगी.

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धनबाद. ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों की दवाओं के लिए अब भटकना नहीं पड़ेगा. झारखंड सरकार ने राज्य के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में ‘अबुआ दवाखाना’ स्थापित करने का निर्णय लिया है. योजना के पहले चरण में राज्य के 745 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) में एकीकृत दवा केंद्र खोले जाएंगे. इनमें धनबाद के चयनित आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी शामिल होंगे. इन केंद्रों पर एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और सिद्धा चिकित्सा पद्धति की आवश्यक दवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध करायी जाएंगी.

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आवश्यक दवाएं मुफ्त मिलेंगी

स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से जारी संकल्प के अनुसार, अबुआ दवाखाना में झारखंड आवश्यक औषधि सूची के तहत एलोपैथिक दवाएं तथा राष्ट्रीय आयुष आवश्यक दवा सूची के तहत विभिन्न आयुष पद्धतियों की दवाएं रखी जाएंगी. इन दवाओं का वितरण लाभार्थियों को मुफ्त किया जाएगा.

इस व्यवस्था का उद्देश्य अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों से जुड़ी आवश्यक दवाओं को एक ही केंद्र पर उपलब्ध कराना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को दवा लेने के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाने की जरूरत कम हो.

डिजिटल सिस्टम से होगी स्टॉक की निगरानी

अबुआ दवाखाना के लिए सभी जिलों में एक समान मॉडल तैयार किया जाएगा. केंद्र में ग्राहक सेवा काउंटर के अलावा अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों की दवाओं के लिए रैक और आलमारी की व्यवस्था होगी. तापमान नियंत्रित रखने वाली दवाओं के लिए रेफ्रिजरेटर भी लगाया जाएगा.

केंद्र में कंप्यूटर, प्रिंटर और इंटरनेट की सुविधा भी उपलब्ध होगी. दवाओं की उपलब्धता और स्टॉक की जानकारी डिजिटल सिस्टम में रियल टाइम दर्ज की जाएगी. इससे दवाओं की उपलब्धता और स्टॉक प्रबंधन की निगरानी की जा सकेगी.

जिला और प्रखंड स्तर पर होगी निगरानी

योजना के संचालन के लिए जिला और प्रखंड स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी. जिला समिति दवाओं की सूची, केंद्र की स्थापना और नियमित समीक्षा का काम करेगी. वहीं प्रखंड समिति संबंधित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में अबुआ दवाखाना के लिए कमरे का चयन और निरीक्षण करेगी.

केंद्र का संचालन वहां कार्यरत योग प्रशिक्षक करेंगे, जबकि इसकी निगरानी आयुष चिकित्सक या सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) करेंगे.

एक केंद्र पर पांच लाख रुपये होंगे खर्च

सरकार प्रत्येक अबुआ दवाखाना की आधारभूत संरचना के लिए पांच लाख रुपये उपलब्ध कराएगी. इसमें पेंटिंग, फ्लोरिंग और फिक्सिंग पर दो लाख रुपये, ब्रांडिंग और साइनबोर्ड पर 60 हजार रुपये, कंप्यूटर, प्रिंटर और इंटरनेट पर 80 हजार रुपये, दवा रैक व आलमारी पर 1.05 लाख रुपये, रेफ्रिजरेटर पर 25 हजार रुपये और पावर बैकअप पर 30 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे.

केंद्र का संचालन करने वाले योग प्रशिक्षक को हर माह तीन हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने का भी प्रावधान किया गया है. योजना लागू होने के बाद चयनित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में एकीकृत दवा केंद्र के माध्यम से विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों की आवश्यक दवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होने की उम्मीद है.

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