कैदियों के हाथों सजेगा बाबा का दरबार,पूर्णिमा पर जेल से निकलेंगे दो पुष्प मुकुट
मंडल कारा देवघर.
सावन पूर्णिमा पर देवघर जेल के कैदी बाबा बैद्यनाथ व बासुकिनाथ के लिए अनोखे पुष्प मुकुट तैयार करते हैं. जानें पूरी परंपरा.
देवघर. सावन पूर्णिमा के अवसर पर देवघर मंडल कारा में वर्षों पुरानी अनोखी परंपरा एक बार फिर निभायी जा रही है. जेल के बाबा कक्ष में 27 अगस्त से संकीर्तन शुरू हो चुका है, जिसका समापन शुक्रवार की सुबह होगा. वहीं, सावन पूर्णिमा के दिन 28 अगस्त की सुबह 10 बजे जेल के बाबा शृंगार मंदिर में संकीर्तन शुरू होगा, जो 29 अगस्त की सुबह 11 बजे संपन्न होगा.
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इस परंपरा की सबसे खास कड़ी है बंदियों द्वारा तैयार किये जाने वाले दो पुष्प मुकुट. सावन पूर्णिमा की शाम करीब पांच बजे दोनों पुष्प मुकुट को जेल से एक साथ बाहर निकाला जायेगा. इनमें से एक मुकुट बाबा फौजदारीनाथ बासुकिनाथ के दरबार में अर्पित किया जायेगा, जबकि दूसरा बाबा बैद्यनाथ की शृंगार पूजा के लिए भेजा जायेगा.
बंदियों के हाथों तैयार होते हैं बाबा के पुष्प मुकुट
देवघर मंडल कारा के बंदी हर वर्ष सावन पूर्णिमा के अवसर पर दो पुष्प मुकुट तैयार करते हैं. दोनों मुकुट को पहले जेल परिसर से बाहर स्थित मंदिर में रखा जाता है. इसके बाद जेल के पदाधिकारी और कर्मचारी एक मुकुट को वाहन से बासुकिनाथ स्थित फौजदारी बाबा के दरबार में लेकर जाते हैं.
वहीं, दूसरे पुष्प मुकुट को जेलर या जेल अधीक्षक स्वयं बाबा बैद्यनाथ के दरबार में लेकर जाते हैं. जेल कर्मियों की मौजूदगी में दोनों स्थानों पर बाबा का शृंगार किया जाता है. एक पुष्प मुकुट तैयार करने में करीब पांच किलो फूल लगते हैं. इसे बंदी और जेल कर्मी मिलकर तैयार करते हैं.
शिवरात्रि में मोउर चढ़ता है, सावन पूर्णिमा पर होती है भरपाई
जेल से मिली जानकारी के अनुसार, बाबा बैद्यनाथ को साल के प्रत्येक दिन बंदियों द्वारा तैयार पुष्प मुकुट अर्पित करने की परंपरा है. हालांकि, महाशिवरात्रि के दिन बाबा को पुष्प मुकुट के बजाय मोउर चढ़ाया जाता है. इसी की भरपाई सावन पूर्णिमा के दिन दो पुष्प मुकुट तैयार कर की जाती है.
इनमें से एक मुकुट बाबा बासुकिनाथ और दूसरा बाबा बैद्यनाथ को अर्पित किया जाता है. वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में जेल के बंदी भी पूरी श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं. पुष्प मुकुट तैयार करने से लेकर उसे बाबा के दरबार तक पहुंचाने तक जेल प्रशासन और बंदियों की सहभागिता रहती है.
सावन पूर्णिमा पर जेल में होगा विशेष संकीर्तन
सावन पूर्णिमा के अवसर पर जेल में धार्मिक आयोजन का भी विशेष माहौल रहेगा. 28 अगस्त की सुबह 10 बजे बाबा शृंगार मंदिर में संकीर्तन शुरू होगा, जिसका समापन 29 अगस्त की सुबह 11 बजे होगा. वहीं, बाबा कक्ष में 27 अगस्त से चल रहा संकीर्तन शुक्रवार सुबह संपन्न होगा.
सावन पूर्णिमा की शाम पुष्प मुकुट बासुकिनाथ ले जाने के बाद जेल के अंदर बंदियों, पदाधिकारियों, कर्मचारियों और बाहर से आये अतिथियों के बीच प्रसाद का वितरण किया जायेगा.
अंग्रेज जेलर के समय से चली आ रही परंपरा
पुष्प मुकुट अर्पित करने की यह परंपरा अंग्रेज जेलर के समय से चली आ रही बतायी जाती है. हालांकि, इस परंपरा के संबंध में न तो कोई लिखित दस्तावेज उपलब्ध है और न ही इसका प्रमाणित इतिहास.
बताया जाता है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान देवघर में पदस्थापित एक अंग्रेज जेलर के पुत्र की तबीयत काफी खराब हो गयी थी. लोगों के सुझाव पर जेलर ने बाबा बैद्यनाथ को पुष्प मुकुट अर्पित किया था. इसके बाद उनके पुत्र की तबीयत में सुधार होने की बात कही जाती है. इसके बाद से ही बाबा को पुष्प मुकुट अर्पित करने की यह परंपरा लगातार चली आ रही है.
आज भी सावन पूर्णिमा पर जेल के बंदियों के हाथों तैयार पुष्प मुकुट जब बाबा बैद्यनाथ और बाबा बासुकिनाथ के दरबार तक पहुंचता है, तो यह परंपरा आस्था, विश्वास और वर्षों पुरानी विरासत की एक अनूठी मिसाल बन जाती है.
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