मोहनपुर में 10 वर्ष से पांच सौ एकड़ जमीन पर खेती प्रभावित, टूटे नाला के कारण बंद है गेहूं की खेती
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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देवघर: मोहनपुर बाजार के समीप बड़ा तालाब (बुढ़वा बांध) से निकलने वाला सिंचाई नाला 10 वर्ष पूर्व टूट गया था. सिंचाई नाला कच्चा होने की वजह से बाढ़ के पानी से टूट गया था. इस कारण इलाके में लगभग पांच सौ एकड़ भूमि में रबी की फसल व सब्जी की खेती पूरी तरह बंद है. […]
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देवघर: मोहनपुर बाजार के समीप बड़ा तालाब (बुढ़वा बांध) से निकलने वाला सिंचाई नाला 10 वर्ष पूर्व टूट गया था. सिंचाई नाला कच्चा होने की वजह से बाढ़ के पानी से टूट गया था. इस कारण इलाके में लगभग पांच सौ एकड़ भूमि में रबी की फसल व सब्जी की खेती पूरी तरह बंद है. सिंचाई के अभाव में किसानों ने 10 वर्षों से गेहूं की खेती नहीं की है. रबी मौसम के दिनों में करीब छह गांव की जमीन पूरी तरह परती रह जाती है. केवल बारिश के पानी के सहारे धान की खेती होती है. इस नाला से चकरमा, कामत पालक, खासपालक, बुटातरी, खपचवा, पदमनराय कुरैवा गांवों के खेतों तक पानी पहुंचता था.
पंप सेट के बगैर खेतों तक पहुंचता था पानी : किसान रबी के मौसम में गेहूं, सरसों, चना समेत सब्जी में गोभी, बैंगन व टमाटर की खेती व्यापक पैमाने पर करते थे. किसान नाला को कुदाल से काट कर खेतों तक ले जाते थे. बगैर कोई पम्पसेट के एक खेत से दूसरे खेत तक लबालब पानी पहुंच जाता था. बाढ़ के पानी से कच्चा नाला टूटने के साथ-साथ नाले में मिट्टी भी भर गया है, जिससे पानी की निकासी सही ढंग से नहीं होती है. नाला टूटने की वजह से जो भी पानी आता है, वह अलग दिशा में मुड़ जाता है.
चुनाव में बनता है मुद्दा
इस सिंचाई नाला से खेती करने वाले किसानों की संख्या सैकड़ों में है. प्रत्येक वर्ष विधानसभा व लोकसभा चुनाव में यह नाला निर्माण चुनावी मुद्दा बनता है. 10 वर्षों के दौरान किसानों ने कई जनप्रतिनिधियों से इस नाला के निर्माण की मांग रखी. कई जनप्रतिनिधियों ने टूटी नाला का निरीक्षण कर निर्माण कराने का भी आश्वासन दिया था, लेकिन आश्वासन अब तक पूर्ण नहीं हुआ. इस दिशा में किसी ने खास रुचि नहीं दिखायी.
कहते हैं किसान
जनप्रतिनिधियों की पहल से अगर नाला का केवल मिट्टी हटा कर खुदाई सही ढंग से करवा दी जाये, तो सालों भर छह गांवों में सिंचाई की सुविधा मिल जायेगी. कभी इस पानी से सिंचाई कर कई क्विंटल गेहूं उपजाते थे, लेकिन अब यह इतिहास बन गया.
– रतन मिर्धा, चकरमा
छह गांवों के किसानों की सबसे प्रमुख मांगों में एक बुढ़वाबांध का सिंचाई नाला निर्माण है. जनप्रतिनिधियों से 10 वर्षों से केवल कोरा आश्वासन मिलता रहा. अगर इस नाला से सिंचाई सुविधा मिल जाये, तो सैकड़ों किसान आत्मनिर्भर हो सकते हैं.
– लालदेव दास, खासपालक
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