संताल में बालू के अभाव में निर्माण कार्य पर ग्रहण, उधर देवघर का बालू रेल रैक से भेजा जा रहा बिहार-यूपी

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जसीडीह: इन दिनों बालू के लिए आम लोग तरस रहे हैं. सरकारी व निजी तौर पर महत्वपूर्ण निर्माण कार्य रुके हुए हैं. उधर, बालू तीन से चार हजार रुपये प्रति ट्रैक्टर बेचा जा रहा है. देवघर की नदियों से बालू ट्रेनों के जरिये बिहार, यूपी, महाराष्ट्र, हरियाणा समेत कई राज्यों में भेजा जा रहा है. […]

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जसीडीह: इन दिनों बालू के लिए आम लोग तरस रहे हैं. सरकारी व निजी तौर पर महत्वपूर्ण निर्माण कार्य रुके हुए हैं. उधर, बालू तीन से चार हजार रुपये प्रति ट्रैक्टर बेचा जा रहा है. देवघर की नदियों से बालू ट्रेनों के जरिये बिहार, यूपी, महाराष्ट्र, हरियाणा समेत कई राज्यों में भेजा जा रहा है. मथुरापुर स्टेशन के समीप अजय नदी से बालू खनन कर बड़े पैमाने पर डंप किया गया है. निर्बाध रूप से स्टेशन के रैक प्वाइंट से बड़े पैमाने बालू माल गाड़ी में लोड कर बाहर भेजा जा रहा है. एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) द्वारा 12 जून से 30 सितंबर तक नदियों से बालू खनन पर रोक लगी हुई है.

नदियों से बालू उठाव रोकने के लिए खनन विभाग से लेकर संबंधित अधिकारी को सख्त निर्देश दिया गया है. लेकिन डंप की अाड़ में नदियों से बालू उठाव कर मथुरापुर रेलवे स्टेशन से इन दिनों खुलेआम बालू की तस्करी बिहार, मुंबई, यूपी, हरियाणा समेत देश के कई राज्यों में की जा रही है. बालू कारोबारियों ने स्टॉक के नाम पर मामूली लाइसेंस ले रखा है. इसी लाइसेंस की आड़ में करोड़ों का खेल चल रहा है.

मथुरापुर स्टेशन से सटे करमाटांड़ गांव के पश्चिमी और दक्षिण छोर पर हजारों ट्रक बालू को डंप कर रखा गया है. संबंधित पदाधिकारियों की नजर इस पर नहीं पड़ रही है या वे इसे नजरअंदाज कर रहे हैं. बताया जाता है अजय नदी के कसाठी बेलटिकरी समेत कई बालू घाटों से बालू का उठाव कर मथुरापुर स्टेशन के समीप डंप किया जाता है. ट्रैक्टर के जरिये डंपिंग का यह कार्य अधिकांश रात में चलता है. पिछले दिनों अजय नदी के कई घाटों से लगातार पुलिस ने छापेमारी कर अवैध रूप से बालू उठाव करने वाले ट्रैक्टरों को जब्त किया है.

जसीडीह, देवीपुर, कुंडा व सारवां थानों में दर्जनों मामले दर्ज किये गये हैं. लेकिन मथुरापुर में इस डंपिंग पर पुलिस की नजर नहीं है. इधर बालू के अभाव में महत्वपूर्ण कन्स्ट्रक्शन कार्य बाधित है. लेकिन दूसरे राज्यों को बालू भेजा जा रहा है. मंगलवार को मथुरापुर स्टेशन से लगभग 40 रैक वाली मालगाड़ी बालू बिहार भेजा गया.
क्या कहते हैं रेल अधिकारी
बालू का रैक बाहर भेजने के लिए खनन विभाग से आदेश पत्र प्रस्तुत किये जाने के बाद ही रेलवे के रैक के माध्यम से बालू भेजा जाता है. मंगलवार को बालू रैक के माध्यम से सहरसा भेजा गया.
– राहुल गांधी, मालगोदाम प्रभारी मधुपुर
क्या कहते हैं डीसी
बालू कैसे डंप किया गया व किस आधार पर ट्रेन के जरिये बाहर भेजा जा रहा है, इससे संबंधित व्यक्ति के पास स्टॉक लाइसेंस है या नहीं, इसकी जांच करानी होगी. पूरे मामले की रिपोर्ट खनन विभाग से ली जायेगी.
– राहुल कुमार सिन्हा, डीसी, देवघर
एनजीटी की रोक के बाद खनन विभाग कैसे दे रहा एनओसी !
एनजीटी द्वारा मॉनसून में 12 जून से 30 सितंबर तक नदियों से बालू खनन पर रोक लगाया गया है. बावजूद खनन विभाग किस आधार पर रेलवे को एनओसी दे रही है, जिसके आड़ में भारी मात्रा बालू को रैक के जरिये निर्बाध रूप से बाहर भेजा जा रहा है. बुद्धिजीवियों द्वारा मांग की जा रहा है कि अगर नियमों के विरुद्ध बालू डंप के आड़ में खनन विभाग रेलवे को एनओसी दे रही है तो इसकी जांच उच्चस्तरीय होनी चाहिए व इसमें संलिप्त दोषियों पर प्राथमकी दर्ज होनी चाहिए.
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