सितंबर की शुरआत में ही सारंडा में छायी कोहरे की घनी चादर, दिन में चालु करनी पड़ रही है हेडलाइट्स
घने कोहरे के कारण गाड़ियों की हेडलाइट जलाकर वाहन चलाते चालक
सारंडा की पहाड़ियों में घने कोहरे और बारिश से जनजीवन प्रभावित. किरीबुरू-मेघाहातुबुरु बना बादलों का शहर, वाहन चालकों को बरतनी पड़ रही है विशेष सावधानी.
गुवा: सारंडा की हसीन वादियों में मौसम ने इन दिनों बेहद सुहाना और रहस्यमयी रूप धारण कर लिया है. सेल की किरीबुरू और मेघाहातुबुरु की ऊंची पहाड़ियां घने कोहरे के आगोश में पूरी तरह समा चुकी हैं. चारों तरफ सफेद धुंध की एक मोटी चादर बिछी हुई है, जिससे स्थिति यह है कि महज 10 मीटर की दूरी पर खड़े व्यक्ति को भी देख पाना मुश्किल हो रहा है. लगातार बारिश और बादलों के इस संगम ने इन पहाड़ी क्षेत्रों को प्रकृति के एक अनोखे बादलों के शहर में तब्दील कर दिया है.
आपके शहर में
दिन में भी जलानी पड़ रही हैं हेडलाइट्स

घने कोहरे का सबसे बुरा असर सड़क यातायात पर पड़ रहा है. कम दृश्यता के कारण वाहन चालकों को दिन के समय भी गाड़ियों की हेडलाइट जलाकर बेहद धीमी गति से सफर करना पड़ रहा है. सारंडा के पहाड़ी और घुमावदार रास्तों पर दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है, जिसे देखते हुए चालकों को सुरक्षा के मद्देनजर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है. बारिश थमने के बाद भी कोहरा छंटने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे सुबह से लेकर दोपहर तक शहर और पहाड़ियां धुंध में छिपी रहती हैं.
महज पांच किलोमीटर की दूरी पर बदल जाता है मौसम
लगातार बारिश और अत्यधिक नमी के कारण स्थानीय जनजीवन भी काफी प्रभावित हुआ है. कई दिनों से पर्याप्त धूप न निकलने से लोगों को घरों में कपड़े सुखाने जैसी रोजमर्रा की परेशानियों से जूझना पड़ रहा है. हालांकि, सारंडा की भौगोलिक बनावट का एक अनूठा पहलू यह भी है कि किरीबुरू पहाड़ी से महज पांच किलोमीटर नीचे उतरते ही मौसम बिल्कुल बदल जाता है. ऊंचाई वाले इलाकों में जहां घना कोहरा और कनकनी रहती है, वहीं नीचे उतरते ही मौसम सामान्य हो जाता है और धूप-छांव की लुकाछिपी शुरू हो जाती है.
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