खिलाड़ियों के अरमानों पर फिरा पानी, करोड़ों की लागत से बना चंपुआ इंडोर स्टेडियम बदहाल

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चंपुआ इनडोर स्टेडियम

वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से खेलप्रेमियों को समर्पित चंपुआ इंडोर स्टेडियम आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है.

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चंपुआ: वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से खेलप्रेमियों को समर्पित चंपुआ एमपीआईएस इंडोर स्टेडियम आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है.

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उद्घाटन के महज कुछ ही समय बाद से इस आधुनिक स्टेडियम के रखरखाव और संचालन पर गंभीर सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं. स्थिति यह है कि हल्की बारिश में ही स्टेडियम की छत से पानी रिसने लगता है, जिससे खिलाड़ियों को काफी असुविधा होती है. रख-रखाव के अभाव में करोड़ों की इस बहुमूल्य खेल संपत्ति का स्वरूप तेजी से बिगड़ता जा रहा है.

अंधेरे में डूबे बैडमिंटन कोर्ट और जिम की टूटी मशीनें

स्टेडियम के भीतर बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. बैडमिंटन कोर्ट में लगी अधिकांश हैलोजन लाइटें खराब हो चुकी हैं, जिससे शाम के समय खिलाड़ियों को अभ्यास करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

केवल कोर्ट ही नहीं, बल्कि जिम के अंदर रखी कई मशीनों के केबल भी टूटे पड़े हैं. इसके अलावा, स्टेडियम के बाथरूम के दरवाजे हमेशा बंद रहते हैं और साफ-सफाई की स्थिति बेहद दयनीय है. टॉयलेट, दरवाजों और बेसिन के आसपास पान-गुटखा खाकर थूकने से गंदगी का अंबार लगा हुआ है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इसे सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं.

जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते प्रभारी

व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर जब स्टेडियम के प्रभारी से सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने के बजाय सारा मामला जिला खेल पदाधिकारी पर टाल दिया. प्रभारी की इस गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली को लेकर स्थानीय खेलप्रेमियों में जबरदस्त नाराजगी है. लोगों का आरोप है कि प्रभारी स्थानीय होने के कारण अपनी मनमर्जी से काम करते हैं और खेल सुविधाओं के विकास के प्रति पूरी तरह उदासीन बने हुए हैं.

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

इंडोर स्टेडियम की इस दयनीय स्थिति से आहत होकर स्थानीय खेलप्रेमियों और आम नागरिकों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है. लोगों ने मांग की है कि लापरवाह प्रभारी को तुरंत हटाकर किसी अन्य जिम्मेदार और सक्रिय अधिकारी को स्टेडियम की कमान सौंपी जाए, ताकि समय रहते खेल परिसरों की मरम्मत हो सके और युवा खिलाड़ी बिना किसी बाधा के अपने खेल को निखार सकें.


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