सरकारी योजनाओं और मेहनत से अनिल भुइयां ने बदली खेती की तस्वीर
खेत में किसान अनिल.
किसान समृद्धि योजना ने अनिल भुइयां की खेती में 40% तक उत्पादन बढ़ाया। जानिए कैसे सरकारी मदद और मेहनत से उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया।
चक्रधरपुर : पश्चिमी सिंहभूम जिले के दुर्गम एवं दूरस्थ गुदड़ी प्रखंड के ग्राम कोडांगकेल, पंचायत टोमडेल निवासी किसान अनिल भुइंया की सफलता की कहानी यह साबित करती है कि सही जानकारी, सरकारी योजनाओं का सहयोग और किसान की मेहनत मिलकर खेती को आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बना सकते हैं. कभी डीजल से चलने वाले पानी के पंप के कारण बढ़ती सिंचाई लागत से परेशान रहने वाले अनिल भुइंया आज बेहतर सिंचाई सुविधा के सहारे अपनी खेती को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं.
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उपलब्ध संसाधनों में बेहतर करने का प्रयास जारी रखा
इंटरमीडिएट तक शिक्षा प्राप्त अनिल भुइंया के पास लगभग दो एकड़ खेती योग्य भूमि है. अनिल भुइंया बताते हैं कि पहले खेती के लिए बीज, उर्वरक और सिंचाई की व्यवस्था करना आसान नहीं था. विशेषकर सिंचाई के लिए पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता के कारण अतिरिक्त खर्च करना पड़ता था. सिंचाई की लागत बढ़ने से फसल से होने वाला वास्तविक मुनाफा भी सीमित रह जाता था. इसके बावजूद उन्होंने खेती को छोड़ने के बजाय उपलब्ध संसाधनों में बेहतर करने का प्रयास जारी रखा.
किसान समृद्धि योजना बनी बदलाव की शुरुआत
इसी दौरान उन्हें आत्मा कार्यालय, पश्चिमी सिंहभूम के माध्यम से किसान समृद्धि योजना की जानकारी मिली. योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया. प्रखंड तकनीकी प्रबंधक द्वारा योजना के लाभ एवं सिंचाई व्यवस्था के संबंध में आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया. योजना के माध्यम से मिली सिंचाई सुविधा ने अनिल भुइंया के लिए खेती की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. बेहतर सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध होने से उन्हें खेतों में पानी की जरूरत के अनुसार सिंचाई करने में सुविधा मिली. इससे खेती की लागत को नियंत्रित करने का अवसर मिला.
बेहतर सिंचाई से उत्पादन में 35-40 प्रतिशत तक वृद्धि
योजना से मिले सहयोग को श्री भुइंया ने अपनी मेहनत और कृषि के प्रति लगन से प्रभावी बनाया. बेहतर सिंचाई सुविधा का उपयोग करते हुए उन्होंने अपनी खेती को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया. इसका सकारात्मक असर फसलों के उत्पादन पर दिखाई दिया. उनके अनुसार, बेहतर सिंचाई व्यवस्था एवं कृषि गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के परिणामस्वरूप उनके खेतों के उत्पादन में पहले की तुलना में लगभग 35 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई. इसका उपयोग कृषि उपकरण खरीदने, सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने और बच्चों की शिक्षा पर करने लगे. इस तरह योजना से मिली सुविधा ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ भविष्य के लिए नये अवसर भी पैदा किए.
किसानों को आत्मनिर्भर बनाना प्रशासन की प्राथमिकता : डीसी
डीसी मनीष कुमार ने कहा - जिले के किसानों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है. अनिल भुइंया की सफलता केवल एक किसान की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह किसानों में विश्वास जगाने वाली प्रेरक कहानी है. सही तकनीक, सरकारी सहयोग और मेहनत के माध्यम से खेती को आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बनाया जा सकता है.
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