राजधानी में जाम-2: तय है मासिक वसूली का टारगेट!

रांची: राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था नहीं सुधरने की कई वजहें हैं, लेकिन इसमें से सबसे प्रमुख वजह है ट्रैफिक विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार. चौक-चौराहों पर खुलेआम ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को ऑटो और वाहन चालकों से पैसे वसूलते देखा जा सकता है. जानकार बताते हैं कि शहर के लगभग सभी व्यस्त चौक-चौराहों पर मासिक उगाही का टारगेट […]
रांची: राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था नहीं सुधरने की कई वजहें हैं, लेकिन इसमें से सबसे प्रमुख वजह है ट्रैफिक विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार. चौक-चौराहों पर खुलेआम ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को ऑटो और वाहन चालकों से पैसे वसूलते देखा जा सकता है. जानकार बताते हैं कि शहर के लगभग सभी व्यस्त चौक-चौराहों पर मासिक उगाही का टारगेट तक तय हैं.
जानकारों की मानें तो रातू रोड स्थित किशोरी यादव चौक से ट्रैफिक पुलिसवाले प्रतिदिन पांच हजार की वसूली करते हैं. इस प्रकार प्रति माह इस चौक से औसतन डेढ़ लाख रुपये की वसूली होती है. यहां से रोजाना 50 से अधिक सिटी राइड बसें मांडर, इटकी, बेड़ो, लोहरदगा के लिए खुलती हैं. प्रत्येक बस से प्रतिदिन 100 रुपये लिये जाते हैं. इस तरह कुल 5000 रुपये से अधिक की वसूली होती है. उसी प्रकार लगभग एक हजार यात्री व मालवाहक ऑटो गुजरते हैं. 25-30 रुपये प्रत्येक ऑटो से लिये जाते हैं. ऐसे ही किसी चौक से मासिक 30 हजार, तो किसी चौक से 50 हजार रुपये की वसूली किये जाने के आरोप लग रहे हैं.
कांटाटोली चौक पर ऑटो चालकों का राज
कांटाटोली चौक पर ऑटो चालकों का राज है. यहां अधिकतर समय जाम की स्थिति बनी रहती है. ऑटो चालक पुलिस को हर माह एक मुश्त राशि देते हैं. कांटाटोली से बहू बाजार, डंगरा टोली, कोकर व नामकुम की ओर जानेवाले मार्ग पर ऑटो चालकों का कब्जा होता है.नो इंट्री के दौरान मालवाहक इधर नहीं आते हैं, लेकिन ऑटोनुमा मालवाहक वाहनों के चौक पर पहुंचते ही पुलिसकर्मी वसूली के लिए दौड़ पड़ते हैं. यहां पर प्रेशर हॉर्न लगे वाहनों से भी वसूली की जाती है.
पहले जाने देते हैं, फिर होती है वसूली
स्टेशन रोड स्थित पटेल चौक पर ट्रैफिक पुलिस तैनात होते हैं. वहां से ओवरब्रिज जाने वाले वाहनों को पुलिसकर्मी नहीं रोकते हैं. हालांकि उस रोड पर वाहनों की नो इंट्री है. आगे जाकर नो इंट्री की बात कहते हुए वाहनों से जुर्माने की वसूली की जाती है. कई बार तो जुर्माना लेकर रसीद भी दी जाती है.
राजधानी में जाम की समस्या रोजमर्रा की बात हो गयी है. सड़क पर वाहन चलाने का मन तक नहीं करता. मजबूरी है, इसलिए घर से निकलना पड़ता है.
नसीम आलम (निवासी गाड़ीखाना)
सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें करते हैं अधिकारी
01 जून 2013- अपर बाजार में वन वे लागू करने का निर्णय. ट्रैफिक एसपी ने व्यवसायियों के साथ बैठक की.
10 जून 2013- अपर बाजार में वन वे लागू हुआ, लेकिन कुछ दिन के बाद स्थिति यथावत हो गयी.
जुलाई 2013- नगर निगम के अधिकारी, पथ निर्माण विभाग,जिला प्रशासन व ट्रैफिक एसपी में बैठक की. बैठक में बांयी ओर लेन बनाने, मेन रोड में रिक्शा-ठेला के लिए एक लेन बनाने,जेब्रा क्रॉसिंग बनाने सहित कई निर्णय लिये गये, लेकिन एक पर भी अमल नहीं.
सितंबर 2013- शहर में चलने वाले पेट्रोल टैंकर व आवश्यक खाद्य सामग्री वाले ट्रकों व छोटे वाहनों के लिए समय सीमा व रूट तय, लेकिन स्थिति यथावत.
जनवरी 2014- दुर्घटना में जख्मी व्यक्ति के लिए निजी अस्पतालों में जीरो ऑवर सिस्टम की शुरुआत पर अमल नहीं.
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