बगैर टेक्निशयन के संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटर हुआ सील

Updated at : 26 Jun 2016 4:01 AM (IST)
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बगैर टेक्निशयन के संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटर हुआ सील

हाजीपुर/जंदाहा : अल्ट्रासाउंड सेंटर में एक कथित टेक्नीशियन को अल्ट्रासोनोग्राफी करते हुए पकड़ा गया. सेंटर को सील कर दिया गया है. सिविल सर्जन डॉ इंद्रदेव रंजन को विश्वसनीय सूत्रों से सूचना मिली कि जिले के जंदाहा बाजार में स्थित एक अल्ट्रासाउंड सेंटर में बिना डॉक्टर के ही अल्ट्रासोनोग्राफी किया जाता है. सूचना मिलते ही सीएस […]

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हाजीपुर/जंदाहा : अल्ट्रासाउंड सेंटर में एक कथित टेक्नीशियन को अल्ट्रासोनोग्राफी करते हुए पकड़ा गया. सेंटर को सील कर दिया गया है.

सिविल सर्जन डॉ इंद्रदेव रंजन को विश्वसनीय सूत्रों से सूचना मिली कि जिले के जंदाहा बाजार में स्थित एक अल्ट्रासाउंड सेंटर में बिना डॉक्टर के ही अल्ट्रासोनोग्राफी किया जाता है. सूचना मिलते ही सीएस के नेतृत्व में चिकित्सकों का छापामार दल जंदाहा के महुआ रोड स्थित निधि श्री अल्ट्रासाउंड सेंटर पर धावा बोला. जांच टीम ने पाया कि उक्त अल्ट्रासाउंड सेंटर में कोई चिकित्सक नहीं है और एक व्यक्ति द्वारा अल्ट्रासोनोग्राफी का काम किया जा रहा है. पूछने पर उसने खुद को टेक्नीशियन बताया. सिविल सर्जन ने तत्काल इस सेंटर को सील कर दिया. जांच दल में सीएस कार्यालय के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अनिल कुमार शर्मा एवं डॉ मधुसूदन प्रसाद शामिल थे.
सिविल सर्जन ने बताया कि किसी भी अल्ट्रासाउंड सेंटर में ट्रेंड डॉक्टर ही अल्ट्रासोनोग्राफी कर
सकते हैं और उसकी रिपोर्ट लिख सकते है. किसी टेक्नीशियन द्वारा ऐसा करना सर्वथा गलत है.
उन्होंने बताया कि पीसी पीएनडीटी एक्ट का अनुपालन सुनिश्चित
करने के लिए जिले में अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच-पड़ताल की जा
रही है. जिले के जिस किसी यूएस
सेंटर में गड़बड़ी पायी जायेगी, उसे सील कर दिया जायेगा. साथ ही संचालक के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जायेगी.
डीपीआर बनी, पर शुरू नहीं हुआ काम
लापरवाही. राज्य सरकार की थी सदर अस्पताल को अपग्रेड करने की योजना
पांच सौ बेडों वाले अस्पताल की योजना पर कब होगा काम
सदर अस्पताल के कायाकल्प पर अनिश्चितता के बादल छाये
जिला अस्पताल बनाने की योजना अभी तक धूल फांक रही
वैशाली समेत नौ जिलों में थी 500 बेडों के अस्पताल की योजना
सरकार की उदासीनता के कारण वैशाली जिले में 500 शय्या वाले जिला अस्पताल की योजना अभी तक धूल फांक रही है. चिकित्सा सुविधा और आधारभूत संरचना का अभाव दूर करने के लिए राज्य सरकार ने वर्षों पहले ही सदर अस्पताल को अपग्रेड करने की योजना बनायी थी. बीच में कई वर्षों तक यह योजना अधर में पड़ी रही.,लेकिन एक बार फिर इस दिशा में पहल से लोगों में आशा जगी है.
हाजीपुर :कब होगा कायाकल्प सदर अस्पताल का और कब बनेगा यह 500 शय्या का अस्पताल, इस सवाल पर अनिश्चितता के बादल छाये हुए हैं. पिछले कई सालों से जिले के लोग 500 बेडों वाले अस्पताल की उम्मीद लगाये हुए हैं, लेकिन इस साल भी उनकी उम्मीदों पर पानी फिरता दिख रहा है. जी हां, सरकार की उदासीनता के कारण वैशाली जिले में 500 शय्या वाले जिला अस्पताल की योजना अभी तक धूल फांक रही है.
चिकित्सा सुविधा और आधारभूत संरचना का अभाव दूर करने के लिए राज्य सरकार ने वर्षों पहले ही सदर अस्पताल को अपग्रेड करने की योजना बनाई थी. बीच में कई सालों तक यह योजना अधर में पड़ी रही. नयी सरकार ने जब इसे अमलीजामा पहनाने का प्रयास शुरू किया तो जिलावासियों में आशा जगी कि अब शीघ्र ही योजना आकार लेगी, लेकिन यह फिर ठंडे बस्ते में चली गयी है.
100 करोड़ होंगे खर्च, विभाग बता रहा पैसे का अभाव : जिले में 500 बेडों वाले हॉस्पिटल की योजना राज्य सरकार से स्वीकृत होकर स्वास्थ्य विभाग की फाइलों में बंद पड़ी है. योजना की डीपीआर तैयार हो चुकी है.
डीपीआर के मुताबिक, सदर अस्पताल परिसर में खाली पड़े भूखंड में चार मंजिले भवन का निर्माण होना है. बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटिडे द्वारा इसका निर्माण किया जाना है. मालूम हो कि राज्य सरकार द्वारा सूबे के 9 जिलों में 500 शय्या के अस्पताल की मंजूरी दी गयी है. इसमें वैशाली जिला भी शामिल है. जिले में इस योजना पर लगभग सौ करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया है. बीएमएसआइसीएल के माध्यम से सदर अस्पताल की खाली जमीन पर बनने वाली जी प्लस थ्री बिल्डिंग में तमाम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होंगी. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बताते हैं कि योजना का पूरा खाका तैयार है. विभाग के पास फिलहाल फंड का अभाव है.
योजना पूरी होने पर बेहतर इलाज की आशा होगी पूरी : जिला मुख्यालय में 500 बेड का अस्पताल बन जाने के बाद यहां इलाज की व्यवस्था दुरुस्त हो जायेगी. वर्तमान में कई आवश्यक सुविधाओं और मैन पावर की कमी झेल रहे सदर अस्पताल का कायापलट हो जायेगा. न सिर्फ चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार होगा, बल्कि काफी हद तक इलाज के लिए पीएमसीएच पर निर्भरता भी कम हो जायेगी. पांच सौ बेडेड हॉस्पीटल के लिए जो संरचना तय की गई है इसमें प्रशासनिक शाखा, रिसेप्शन एवं पूछताछ केंद्र, नर्सिंग शाखा, डायग्नोसि्टक सेवाएं, इमेंजिंग, क्लिनिकल लेबोरेटरी, फार्मेसी, गहन चिकित्सा यूनिट, फिजियोथेरेपी यूनिट, सीएसएसडी, कचरा प्रबंधन यूनिट, मॉर्चरी, पार्किंग आदि की व्यवस्था शामिल है.
इसकी शाखाओं में जेनरल मेडिकल यूनिट, जेनरल सर्जरी यूनिट, अन्य रोगों की यूनिटों के अलावा संक्रामक रोग का विभाग भी खोला जायेगा. इस प्रकार से सदर अस्पताल के अपग्रेड हो जाने के बाद जिले के मरीजों को जांच और इलाज की ऐसी सुविधाएं भी मिलने लगेंगी, जिनकी यहां कमी रहने के कारण पटना जाने को बाध्य हाना पड़ता है.
क्या कहते हैं अधिकारी
मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने पर सरकार का जोर है. इसके लिए सदर अस्पताल से लेकर अनुमंडल और रेफरल अस्पतालों को अपग्रेड करने की सरकार की योजना है. योजना को मूर्तरूप देने की तैयारी विभागीय स्तर पर चल रही है.
डॉ इंद्रदेव रंजन, सिविल सर्जन
सदर अस्पताल को 500 बेडेड बनाने की योजना की डीपीआर बन चुकी है. इस योजना पर फंड के अभाव में काम आगे नहीं बढ पा रहा है. राशि उपलब्ध होते ही काम शुरू हो जायेगा.
मणिभूषण झा, डीपीएम, जिला स्वास्थ्य समिति
क्या-क्या था निर्माण का प्रस्ताव
प्रशासनिक शाखा भवन,
रिसेप्शन एवं पूछताछ केंद्र,
नर्सिंग शाखा, इमेंजिंग,
डायग्नोसि्टक सेवाएं,
क्लिनिकल लेबोरेटरी,
फार्मेसी,सीएसएसडी,
जेनरल मेडिकल यूनिट,
जेनरल सर्जरी यूनिट,
अन्य रोगों की यूनिट,
संक्रामक रोग यूनिट,
गहन चिकित्सा यूनिट,
फिजियोथेरेपी यूनिट,
कचरा प्रबंधन यूनिट,
मॉर्चरी, पार्किंग आदि
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