बदला नशे का ट्रेंड

Updated at : 20 Jun 2016 2:31 AM (IST)
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बदला नशे का ट्रेंड

कई लोगों ने भांग-गांजा आदि का प्रयोग किया शुरू हाजीपुर : शराबियों ने नशा का ट्रेंड बदल दिया है. शराब पर पूर्ण प्रतिबंध के बाद शराबी बिहार की सीमा पार जाकर इसका लुत्फ उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर कुछ ऐसे भी हैं जो इसके विकल्प का सहारा ले रहे है. ऐसे लोगों ने भांग-गांजा […]

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कई लोगों ने भांग-गांजा आदि का प्रयोग किया शुरू
हाजीपुर : शराबियों ने नशा का ट्रेंड बदल दिया है. शराब पर पूर्ण प्रतिबंध के बाद शराबी बिहार की सीमा पार जाकर इसका लुत्फ उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर कुछ ऐसे भी हैं जो इसके विकल्प का सहारा ले रहे है.
ऐसे लोगों ने भांग-गांजा आदि का प्रयोग शुरू कर दिया है. हालांकि सरकार और प्रशासन ने ऐसी चीजों पर भी प्रतिबंध लगाया हुआ है. लेकिन इसकी बिक्री चोरी-छिपे धड़ल्ले से हो रही है. इसके अलावा अफीम और डोडा का भी प्रयोग कर रहे है. ताड़ी का भी इसके विकल्प के रूप में सहारा ले रहे हैं. इस सब में सबसे ज्यादा भांग उनकी पसंद में शामिल है, क्योंकि यह आसानी से उपलब्ध हो जाता है.
गांजा और ताड़ी का इस्तेमाल बढ़ा : शराब के एक विकल्प के रूप में गांजा और ताड़ी की मांग बढ़ गयी है.हालांकि गांजा पर प्रतिबंध के बावजूद इसे चोरी-छिपे बेचा जा रहा है. इसके विक्रेता घूमते-फिरते इसकी बिक्री करते हैं, जो पकड़ में नहीं आते. नगर के कई इलाकों में इनका केंद्र है. इसे पसंद करनेवालों को सब पता होता है कि यह कहां और किसके पास मिलेंगे. ताड़ी पर प्रतिबंध तो नहीं है, लेकिन दुकान लगा कर बेचने पर प्रतिबंध है. इस कारण पेड़ के नजदीक ही इसकी बिक्री कर दी जाती है.
कहां-कहां हो रही खरीद-बिक्री : नगर के स्टेशन रोड, भीड़-भाड़ वाले जगहों, कोनहारा घाट, अंजानपीर चौक, जढुआ बाजार, पुल घाट रोड, जौहरी बाजार, दिग्घी ग्रामीण इलाका, मीनापुर, तंगौल, गुदरी बाजार के निकट, पोखरा मुहल्ला, गांधी सेतु रोड, बड़ई टोला, युसूफपुर, मड़ई आदि जगहों पर चोरी छिपे इसकी खरीद बिक्री की जाती है.
युवा हो रहे आदी :
नशे के बदलते इस ट्रेंड में सबसे ज्यादा युवा प्रभावित हो रहे हैं. कॉलेज और इसके आस-पास एवं भीड़-भाड़ के इलाकों में इसका इस्तेमाल जम कर हो रहा है. कुछ ऐसे भी युवा हैं, जो पहली बार इसका इस्तेमाल करते हैं, तो बस करते ही जाते हैं. जानकारों का मानना है कि जन जागरूकता चला कर इससे बचा जा सकता है.
तीन तरह के भांग हैं उपलब्ध
भाग की खेती दियारा क्षेत्र में अधिक होती है. बाजार में मुख्यत: तीन तरह के भांग का प्रयोग किया जाता है. पूजा-पाठ में प्रयोग किये जाने वाला भांग बाजार में 25 से 50 रुपये प्रति किलो, तो उच्च दर्जे का 50 से 70 रुपये और सबसे बेहतर किस्म की भांग 100 से 150 रुपये प्रति किलो मिलती है. भांग खरीदने के बाद इसकी सफाई कर पीसा जाता है. नशा जल्दी आये इसके लिए धतुरे का प्रयोग किया जाता है. भांग का छोटा गोला पहले 2 एवं बड़ा 5 रुपये में मिलता था. शराबबंदी के बाद यह 10-12 रुपये में मिल रहा है.
अफीम भी बनी विकल्प
अफीम एवं डोडा का सेवन भी विकल्प के रूप में करना शुरू कर दिया गया है. हालांकि इसका सेवन करनेवाले की संख्या कम है. अफीम अब कहां से आता है और इसे कौन मंगवाता है, यह जांच का विषय है.
लेकिन बाजार में यह मिल रहा है. सूत्र बताते हैं कि यह बाजार में 1800 से 2000 रुपयेप्रति दस ग्राम की दर से यह मिलता है. यह अधिकांशत: पेय पदार्थ, वर्नवीटा आदि से लेकर बिस्कुट को चूर्ण कर मिलाया जाता है, जिसे पकड़ना मुश्किल है. डोडा पोस्ता दाना का पाउडर होता है, जिसे अधिकांश लोग दूध के साथ सेवन करते हैं. लोगों की मानें तो यह देर तक नशा करता है. यह तीन से चार हजार रुपये प्रति किलो मिलता है.
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