उद्धारकों की बाट जोह रही दलित बस्ती

Updated at : 31 Mar 2016 6:14 AM (IST)
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उद्धारकों की बाट जोह रही दलित बस्ती

देसरी : प्रखंड क्षेत्र के जहांगीरपुर शाम पंचायत के मधौल खुर्द गांव के दलित बस्ती आज भी विकास की रोशनी से काफी दूर है. वर्तमान जनप्रतिनिधियों के पांच वर्षों के कार्यकाल में इस गांव में एक मात्र चबूतरे का निर्माण हो पाया है. गांव में लोगों को गांव के लोगों को मुख्य सड़क पर जाने […]

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देसरी : प्रखंड क्षेत्र के जहांगीरपुर शाम पंचायत के मधौल खुर्द गांव के दलित बस्ती आज भी विकास की रोशनी से काफी दूर है. वर्तमान जनप्रतिनिधियों के पांच वर्षों के कार्यकाल में इस गांव में एक मात्र चबूतरे का निर्माण हो पाया है. गांव में लोगों को गांव के लोगों को मुख्य सड़क पर जाने के लिए पगडंडी का सहारा लेना पड़ता है.

बीमारों को खाट पर ले जाते हैं लोग : सड़क नहीं रहने के कारण बीमार लोगों को खाट पर लाद कर मुख्य सड़क पर एंबुलेंस या अन्य वाहनों में चढ़ाना पड़ता है. करीब 350 आबादी का यह दलित टोला है, जो पानी पीने के लिए मात्र दो सरकारी चापाकल पर ही निर्भर है. इसमें एक चापाकल पांच माह से तथा दूसरा एक माह से खराब पड़ा है. अब पूरे टोला के लोगों को दूर के निजी चापाकलों से पानी लाकर प्यास बुझाना पड़ रहा है.
दूषित पानी पीने को विवश हैं ग्रामीण : दूसरा समस्या यह है कि जल स्तर गिर जाने के कारण चापाकल कम पानी देते हैं, जो काफी दूषित है. कई चापाकलों तो जवाब भी दे चुके हैं. लोगों का कहना है कि पीएचइडी से गाड़े गये सरकारी चापाकलों की मरम्मत के लिए विभाग के स्टाफ से लेकर मिस्त्री तक नहीं मिल रहे हैं. स्थानीय लोगों ने पीएचइडी कार्यालय को कई बार लिखित सूचना भी दी, लेकिन कोई इनका नोटिस लेनेवाला नहीं है.
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