90 फीसदी किसान, पर संसाधन नहीं
Updated at : 21 Feb 2016 8:46 AM (IST)
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महुआ नगर : दुधारु पशुओं की खरीद-बिक्री के लिए पूरे जिले में चर्चित पशु हाट, मधौल के लिए प्रसिद्ध यह पंचायत महुआ प्रखंड कार्यालय से महज तीन किलोमीटर उत्तर अवस्थित है. पंचायत की लगभग 90 प्रतिशत आबादी खेती, पशुपालन एवं मजदूरी कर अपना जीवन-यापन करते हैं. पिछले एक दशक में विकास की रोशनी से ओझल […]
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महुआ नगर : दुधारु पशुओं की खरीद-बिक्री के लिए पूरे जिले में चर्चित पशु हाट, मधौल के लिए प्रसिद्ध यह पंचायत महुआ प्रखंड कार्यालय से महज तीन किलोमीटर उत्तर अवस्थित है. पंचायत की लगभग 90 प्रतिशत आबादी खेती, पशुपालन एवं मजदूरी कर अपना जीवन-यापन करते हैं. पिछले एक दशक में विकास की रोशनी से ओझल यह पंचायत अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है. प्रखंड कार्यालय से नजदीक होने का लाभ भी पंचायत हो नहीं मिलता दिख रहा है.
प्रत्येक सप्ताह हाट में दूर दराज से पहुंचते हैं व्यापारी : यहां लगनेवाले साप्ताहिक मवेशी हाट में इलाके के दूरदराज से सैकड़ों व्यापारी मवेशियों की खरीद-बिक्री करने पहुंचते हैं, जो पंचायत के एक विशेष पहचान भी है. पंचायत के भी कुछ लोग इस रोजगार में लगे हैं.
पंचायत में कुल पांच राजस्व गांव है : पंचायत में मार्गी, नारंगी सरसिकन, रसूलपुर, हाफिजचक एवं मधौल गांव है. जहां के दो तिहाई आबादी कृषि, पशुपालन से जीविका तो चलाते हैं, लेकिन सरकार के अनदेखी से इनकी हालत खस्ताहाल है. सरकारी योजनाओं का लाभ अधिकांश गरीबों तक नहीं पहुंच सका है.
सिंचाई साधनों का अभाव : सिंचाई साधनों के अभाव में किसान चाह कर भी मन से खेती नहीं कर पाते हैं. अधिक लागत एवं कम उपज से दिनों दिन किसानों की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है. सरकारी स्तर पर सिंचाई का कोई भी कारगर साधन नहीं है, जिसका खामियाजा किसानों को उठाना पड़ रहा है.
जानलेवा साबित हो रही जर्जर सड़कें : पंचायत की अधिकतर सड़कें जर्जर होने से जहां ग्रामवासियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं, यह लोगों के लिए जानलेवा भी साबित हो रही है. इसके निर्माण और मरम्मत के लिए लोगों का प्रयास सरकारी मुलाजिमों की उपेक्षा से सफल नहीं हो पा रहा है.
पंचायत में शुद्ध पेयजल का है अभाव : पंचायतवासी पेयजल के लिए निजी चापाकलों पर ही निर्भर हैं. यहां के अधिकतर आबादी शुद्ध पेयजल से दूर है. अधिकतर हिस्सों में सरकारी स्तर पर पेयजल के साधन उपलब्ध नहीं कराये जा सके हैं. सरकारी चापाकलों का भी अभाव है.
मिल सकता है नगर पंचायत का दर्जा : महुआ प्रखंड के मधौल पंचायत को सरकार के नये निर्देशों के मुताबिक नगर पंचायत का दर्जा मिल सकता है. क्योंकि, पंचायत की आबादी 12 हजार से अधिक है. दर्जा मिलने के बाद अपेक्षित विकास संभव है.
मधौल पंचायत एक नजर में
पंचायत की कुल आबादी- 12,856
अनुसूचित जाति की संख्या- 3589
अनुसूचित जनजाति की संख्या-03
मतदाताओं की संख्या- 7281
स्वास्थ्य उपकेंद्र की संख्या- 02
पंचायत में कुल विद्यालय- 06
राजस्व गांवों की संख्या- 05
पंचायत में बूथों की संख्या- 15
प्रखंड कार्यालय से दूरी- 3 किमी
क्या कहते हैं ग्रामीण
पंचायत में 18-20 घंटे बिजली उपलब्ध रहने के बावजूद भी सरकारी नलकूप की व्यवस्था नहीं होने से यहां के किसानों को निजी सिंचाई व्यवस्था पड़ निर्भर रहना पड़ रहा है. किसानों के सामने हमेशा सिंचाई की समस्या बनी रहती है. साथ ही पंचायतवासियों के समक्ष शुद्ध पेयजल का भी संकट है. पंचायत की सड़कें काफी जर्जर हैं. सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए.
दिलीप कुमार, ग्रामीण
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