सावधान, आपके घर भी हो सकता है हादसा

Updated at : 18 Dec 2015 7:02 AM (IST)
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सावधान, आपके घर भी हो सकता है हादसा

हाजीपुर : कहते हैं कि सावधानी हटी-दुर्घटना घटी. यह हमेशा हमारे आसपास होती है, लेकिन हम इससे सीख लेने के बजाय अपने कार्यों में व्यस्त रहते हैं और हमारी नींद तब खुलती है, जब वह दुर्घटना हमारे साथ घटित होती है. नगर के चकवारा मुहल्ले में गुरुवार को हुई गैस सिलिंडर दुर्घटना के बाद यह […]

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हाजीपुर : कहते हैं कि सावधानी हटी-दुर्घटना घटी. यह हमेशा हमारे आसपास होती है, लेकिन हम इससे सीख लेने के बजाय अपने कार्यों में व्यस्त रहते हैं और हमारी नींद तब खुलती है, जब वह दुर्घटना हमारे साथ घटित होती है. नगर के चकवारा मुहल्ले में गुरुवार को हुई गैस सिलिंडर दुर्घटना के बाद यह सवाल अहम है कि क्या ऐसी दुर्घटना हमारे साथ नहीं हो सकती है. इसलिए आस-पड़ोस में होने वाली घटना से सीख लेकर हमें सतर्क रहना चाहिए, नहीं तो वह घटना हमारे साथ भी हो सकती है. रसोई गैस का उपयोग हर परिवार में होता है, लेकिन बहुत कम लोग हैं, जो इससे सुरक्षा को लेकर सचेत रहते हैं.
क्या करें, ताकि न हो दुर्घटना
– रसोई गैस सिलिंडर का उपयोग समाप्त होने पर सिलिंडर को नॉब के निकट से बंद करें न कि चूल्हा.
– समय-समय पर रसोई गैस के पाइप की जांच करें और आवश्यकतानुसार उसे बदलें.
– रसोई गैस पाइप अच्छे किस्म का लें और प्रयास करें कि वह संबंधित गैस एजेंसी से ले, जो सामान की गारंटी भी देती है.
– गैस सिलिंडर की डिलिवरी लेते समय उसकी जांच कर लें कि वह लीक ताे नहीं कर रहा है और यदि लीक कर रहा है, तो तत्काल गैस एजेंसी को सूचित करें.
– समय-समय पर गैस चूल्हे का सर्विसिंग कराएं ताकि गैस का दुरुपयोग न हो और दुर्घटना से बचा जा सके.
– गैस का रिसाव होने पर न तो आग जलाये और न बिजली उपकरणों के स्विच को ऑन-ऑफ करें.
– रसोईघर से हवा निकलने के लिए पर्याप्त जगह हो और रिसाव की स्थिति में गैस एजेंसी के साथ ही स्थानीय पुलिस को तत्काल सूचित करें.
जिप की ढाई सौ योजनाओं पर ग्रहण
वर्ष 2014-15 की जो विकास योजनाएं लंबित हैं, उनमें भी 50 फीसदी से ज्यादा काम बाकी है. जिला पर्षद के मौजूदा हालात बता रहे हैं कि इस वित्तीय वर्ष में भी शायद ही कोई काम हो सके. क्योंकि अब तीन महीने का समय बच गया है और जिला पर्षद का गतिरोध दूर होता नहीं दिख रहा. जिला पर्षद में 251 योजनाएं अधर में हैं. ये सारी योजनाएं ग्रामीण जनता की बुनियादी जरूरतों से संबंधित हैं.
इनमें चतुर्थ राज्य वित्त आयोग की 121, तेरहवें वित्त आयोग की 79 तथा बीआरजीएफ की 41 योजनाएं शामिल हैं.इन योजनाओं में चतुर्थ राज्य वित्त आयोग की राशि से सभी क्षेत्रों में चापाकल लगाने, सोलर लाइट लगाने, ईंट सोलिंग और मिट्टी भराई के काम होने हैं. जबकि 13 वें वित्त आयोग के फंड से गांवों में पीसीसी सड़क निर्माण होना है. इसी तरह बीआरजीएफ की राशि से पीसीसी सड़क के अलावा पक्के नालों का निर्माण होना है.
हाजीपुर : खता हुक्काम की और उसकी सजा अवाम को. यह नजीर पेश कर रहा है वैशाली का जिला पर्षद. जी हां, जिला पर्षद में अफसरशाही, अड़ंगे बाजी और आपसी खींचतान के कारण जनता की मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी जिले की ढाई सौ से अधिक योजनाओं पर पूर्ण ग्रहण लग चुका है.
विकास योजनाओं के ठप पड़ जाने से जिले के उन सुदूर गांवों में मायूसी छा गयी है, जहां इसकी रोशनी पहुंचनी थी. जिला पर्षद, जो त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था का सर्वोच्च केंद्र हैं, अपने मौजूदा कार्यकाल के अंतिम समय में भी विकास कार्यों के प्रति बेहद बेपरवाह है. हाल यह है कि वर्ष 2014-15 की जो विकास योजनाएं लंबित हैं, उनमें भी 50 फीसदी से ज्यादा काम बाकी है. जिला पर्षद के मौजूदा हालात बता रहे हैं कि इस वित्तीय वर्ष में भी शायद ही कोई काम हो सके. क्योंकि अब तीन महीने बचे हैं और जिला पर्षद का गतिरोध दूर होता नहीं दिख रहा.
रोशनी, पेयजल व सड़क की हैं योजनाएं : जिला पर्षद की ठप पड़ी योजनाओं में गांवों के विकास से जुड़े ऐसे कार्य शामिल हैं, जिनकी उपेक्षा या अनदेखी करना जनहित से खिलवाड़ करना है. इन योजनाओं में चतुर्थ राज्य वित्त आयोग की राशि से सभी क्षेत्रों में चापाकल लगाने, सोलर लाइट लगाने, ईंट सोलिंग और मिट्टी भराई के काम होने हैं. जबकि 13 वें वित्त आयोग के फंड से गांवों में पीसीसी सड़क निर्माण का काम होना है. इसी तरह बीआरजीएफ की राशि से पीसीसी सड़क के अलावा पक्के नालों का निर्माण होना है. इन कार्यों के ठप हो जाने से ग्रामीण क्षेत्रों की एक बड़ी आबादी पेयजल, रोशनी, और सड़क जैसी आवश्यक सुविधाओं से वंचित हो गयी है.
विकास राशि से वंचित हो जायेगा जिला : इधर, जिला पर्षद के कर्मियों की अनिश्चित कालीन हड़ताल के कारण जिला पर्षद का प्रशासनिक काम-काज भी पूरी तरह ठप हो चुका है.
प्रशासनिक काम ठप होने के चलते वैशाली जिले को सरकार से मिलने वाली राशि की दूसरी किस्त की प्राप्ति पर भी ग्रहण लग गया है. कर्मियों का कहना है कि 14 वें वित्त में प्राप्त हुई 38 करोड़ रुपये की राशि का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट सरकार को नहीं भेजने की स्थिति में वैशाली जिले को द्वितीय किस्त की राशि भी नहीं मिल पायेगी. इसके कारण यह जिला विकास कार्यों से वंचित रह सकता है.
विभिन्न मदों की 251 योजनाएं अधर में : जिला पर्षद में 251 योजनाएं अधर में हैं. ये सारी योजनाएं ग्रामीण जनता की बुनियादी जरूरतों से संबंधित है. इनमें चतुर्थ राज्य वित्त आयोग की 121, तेरहवें वित्त आयोग की 79 तथा बीआरजीएफ की 41 योजनाएं शामिल हैं. चतुर्थ राज्य वित्त आयोग की 121 योजनाओं में वर्ष 2013-14 की 38, वर्ष 2014-15 की 28 तथा 2015-16 6की 55 योजनाएं लंबित हैं. जबकि 13 वें वित्त आयोग की 79 योजनाओं में
वर्ष 2014-15 की 27 तथा 2015-16 की 52 योजनाएं लंबित हैं. इसी तरह बीआरजीएफ यानी बैकवर्ड रिजनल ग्रांट फंड की 41 योजनाओं में वर्ष 2013-14 की पांच, 2014-15 की पांच तथा 2015-16 की 31 योजनाएं ठप पड़ी हैं.
पड़े हैं दो करोड़, पर योजना का पता नहीं
जिला पर्षद विकास कार्यों को लेकर कितना गंभीर है, इसका एक और उदाहरण देखिये. पर्षद में विकास मद में 13 वें वित्त आयोग की दो करोड़ रुपये की राशि पड़ी हुई है, लेकिन इसे खर्च करने के लिए कोई योजना तक स्वीकृत नहीं की जा सकी है. याद दिला दें कि इसके पहले भी इसी तरह लगभग आठ करोड़ रुपये लंबे समय तक पड़े रह गये थे, जिसे बीते साल में किसी तरह खर्च किया जा सका.
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