कण-कण में छुपा है पुरातत्व व इतिहास

Updated at : 04 Dec 2015 5:12 AM (IST)
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कण-कण में छुपा है पुरातत्व व इतिहास

हरिहरक्षेत्र हाजीपुर : ऐतिहासिक एवं धार्मिक रूप में प्रतिष्ठित हरिहर क्षेत्र मेले एक तरफ तीर्थ स्थल है, वहीं दूसरी ओर देश-विदेशों से जुटे लोगों को मनोरम पर्यटन स्थल के रूप में भी भा रहा है. हरिहर क्षेत्र में फैले पुरातत्व एवं स्थलों को कैमरे में कैद कर रहे विदेशी सैलानी हों अथवा देशी पर्यटक उनकी […]

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हरिहरक्षेत्र हाजीपुर : ऐतिहासिक एवं धार्मिक रूप में प्रतिष्ठित हरिहर क्षेत्र मेले एक तरफ तीर्थ स्थल है, वहीं दूसरी ओर देश-विदेशों से जुटे लोगों को मनोरम पर्यटन स्थल के रूप में भी भा रहा है.

हरिहर क्षेत्र में फैले पुरातत्व एवं स्थलों को कैमरे में कैद कर रहे विदेशी सैलानी हों अथवा देशी पर्यटक उनकी नजर मेले के अलावा उन पुरातात्विक स्थानों की खोज में भी रहती है, जिनकी वेद-पुराण और इतिहास में चर्चा है.

वेद-पुराण और इतिहास में है चर्चा : नारायणी नदी के पश्चिमी किनारे काली घाट स्थित ठाकुरबाड़ी में लाल बलुआही पत्थर से निर्मित रेलिंग स्टोन, जिसे शुंगकालीन वेदिका स्तंभ का खंडित भाग घोषित किया गया है, इसे देखने के लिए सैलानियों एवं लोगों की भीड़ बनी रहती है. यह रेलिंग स्टोन पहली सदी ईसा पूर्व का है.
इसके अलावा पांचवीं शताब्दी की सैंड स्टोन से निर्मित गज-ग्राह का प्राचीन मूर्ति भी लोगों को चकित करती है. महर्षि च्व्यन ऋषि से प्राप्त इस मूर्ति को हरिहर नाथ मंदिर में रखा गया है.
विष्णु प्रतिमा मेले की प्राचीनता बताती है: उत्तर गुप्तकालीन काले बसाल्ट पत्थर से निर्मित गरूड़ पर आसीन भगवान विष्णु की प्रतिमा मेले की प्राचीनता बताती है. मंदिर में शिवलिंग धारण किये चर्तुभुजी पार्वती की प्रतिमा, जो छठी और सातवीं सदी की है. मंदिर परिसर में गणेश जी की प्रतिमा है. गौरी शंकर की काम विजय मुद्रा की मूर्ति पालकालीन है.
बाबा हरिहर नाथ मंदिर में स्थापित भगवान विष्णु की मूर्ति गुप्तकालीन है. जबकि ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित शिवलिंग है. काली मंदिर दक्षिणमुखी काली मूर्ति सातवीं सदी की है जो बांग्ला आर्ट का अद्भूत उदाहरण है.
नतमस्तक होते हैं देशी-विदेशी सैलानी : यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु इन ऐतिहासिक पौराणिक धराहरों की शीश नवाते हैं. वहीं देशी -विदेशी सैलानी चकित होकर तसवीर उतारते और श्रद्धा से नतमस्तक होते हैं. हरिहर क्षेत्र के नारायणी नदी के पूरब में हाजीपुर स्थित विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों, ऐतिहासिक स्थल नदियों का संगम स्थल कौनहारा के अलावा रामभद्र रामचौरा एवं चेचर को देखने के लिए सैलानी पहुंच रहे हैं.
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