सुपौल में मृत्यु भोज की जगह समाज सेवा, पिता की याद में पत्रकार ने पंचायत को दी नि:शुल्क एम्बुलेंस, बनी मिसाल

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समाज सेवा में देते एम्बुलेंस | Prabhat Khabar Network

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Supaul News: सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड से सामाजिक बदलाव की एक अनूठी कहानी सामने आई है. एक पत्रकार ने अपने दिवंगत पिता की स्मृति में मृत्यु भोज की परंपरा को तोड़कर, उसी राशि से पंचायतवासियों के लिए नि:शुल्क एम्बुलेंस सेवा शुरू कर दी. यह फैसला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है.

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Supaul News: सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड से सामाजिक बदलाव की एक ऐसी प्रेरक कहानी सामने आई है, जो परंपराओं को नई सोच के साथ जोड़ने का संदेश देती है. रामनगर पंचायत के कोशलीपट्टी गांव में एक पत्रकार ने अपने दिवंगत पिता की स्मृति में मृत्यु भोज का आयोजन करने के बजाय उसी राशि से पंचायतवासियों के लिए नि:शुल्क एम्बुलेंस सेवा शुरू कर दी. इस फैसले की पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है और लोग इसे समाज सेवा की अनूठी मिसाल बता रहे हैं.

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पत्रकार मिथिलेश कुमार यादव ने अपने पिता स्व. त्रिवेणी यादव की स्मृति को जनसेवा से जोड़ते हुए घोषणा की कि यह एम्बुलेंस पंचायत के सभी जरूरतमंद लोगों के लिए बिना किसी भेदभाव के पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध रहेगी. उनकी इस घोषणा का श्रद्धांजलि सभा में मौजूद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया.

मृत्यु भोज की जगह जनसेवा का चुना रास्ता

ग्रामीण समाज में मृत्यु भोज की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है, जिसमें काफी खर्च होता है. लेकिन मिथिलेश कुमार यादव ने इस परंपरा से अलग हटकर उस राशि का उपयोग जनहित के कार्य में करने का फैसला लिया.

उनका मानना है कि दिवंगत परिजन को सच्ची श्रद्धांजलि वही है, जिससे समाज का भला हो और जरूरतमंद लोगों की मदद की जा सके. इसी सोच के साथ उन्होंने पंचायत को नि:शुल्क एम्बुलेंस समर्पित की.

ग्रामीणों को मिलेगा सीधा लाभ

श्रद्धांजलि सभा के दौरान उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में सड़क दुर्घटना के घायलों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण कई बार लोगों की जान चली जाती है. वहीं प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिलाओं को भी अस्पताल पहुंचाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.

उन्होंने कहा कि इन्हीं समस्याओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया, ताकि आपात स्थिति में किसी भी जरूरतमंद को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके.

विरोध भी हुआ, लेकिन नहीं बदला फैसला

मिथिलेश कुमार यादव ने बताया कि इस निर्णय को लेकर उन्हें कुछ लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ा. बावजूद इसके उन्होंने जनहित को प्राथमिकता दी और अपने संकल्प पर कायम रहे.

उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की स्मृति समाज के काम आए और उससे किसी की जान बच सके, तो इससे बड़ी श्रद्धांजलि और कोई नहीं हो सकती.

सभा में लोगों ने बताया अनुकरणीय पहल

श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी मौजूद रहे. सभी वक्ताओं ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि मृत्यु भोज जैसे आयोजनों पर होने वाले अनावश्यक खर्च को यदि शिक्षा, स्वास्थ्य और जनसेवा जैसे कार्यों में लगाया जाए तो समाज को सीधा लाभ मिलेगा.

लोगों ने कहा कि यह पहल समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देगी और दूसरे लोगों को भी ऐसे निर्णय लेने की प्रेरणा मिलेगी.

Supaul News: सामाजिक बदलाव की दिशा में मजबूत संदेश

कार्यक्रम के अंत में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई. उपस्थित लोगों ने इसे सामाजिक परिवर्तन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताते हुए अपील की कि लोग मृत्यु भोज जैसी परंपराओं पर होने वाले खर्च को समाजहित के कार्यों में लगाने पर विचार करें.

ग्रामीणों का विश्वास है कि यह नि:शुल्क एम्बुलेंस गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित होगी और आने वाले समय में कई लोगों की जान बचाने में मदद करेगी.

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