कटैया में डॉक्टर चंद्रकांत पाटिल की 42वीं जयंती, कुसहा त्रासदी में पीड़ितों की सेवा करते हुए वज्रपात से हो गये थे शहीद

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डॉक्टर चंद्रकांत की तस्वीर पर पुष्प अर्पित करते लोग. | Prabhat Khabar Network

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डॉ. चंद्रकांत पाटिल की 42वीं जयंती कटैया में मनाई गई. कोशी बाढ़ त्रासदी के दौरान बाढ़ पीड़ितों की सेवा करते हुए वे वज्रपात से शहीद हो गए थे. उनके सेवा और बलिदान को याद किया गया.

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भीमनगर थाना क्षेत्र के दीनबंधी पंचायत अंतर्गत कटैया 22 आरडी स्थित प्राथमिक विद्यालय में शनिवार को डॉक्टर चंद्रकांत पाटिल की 42वीं जयंती समारोहपूर्वक मनायी गयी. डॉक्टर पाटिल स्मृति समिति के आह्वान पर आयोजित कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता, समाजसेवी, शिक्षक और छात्र-छात्राएं शामिल हुए. लोगों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर सेवा, समर्पण और बलिदान को याद किया.

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कुसहा त्रासदी में बाढ़ पीड़ितों की कर रहे थे सेवा

डॉक्टर चंद्रकांत पाटिल वर्ष 2008 की कुसहा त्रासदी के दौरान कटैया स्थित राहत शिविर में बाढ़ पीड़ितों का उपचार कर रहे थे. इसी दौरान 21 सितंबर 2008 की रात वज्रपात की चपेट में आने से उनकी मौत हो गयी थी. महाराष्ट्र से कोशी की राष्ट्रीय आपदा में सेवा देने पहुंचे चिकित्सक की शहादत के 18 वर्ष बाद उनकी जयंती पर लोगों ने उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया.

'डॉक्टर चंद्रकांत पाटिल अमर रहें' के लगे नारे

समारोह के दौरान मौजूद लोगों ने एक स्वर में 'डॉक्टर चंद्रकांत पाटिल अमर रहें' और 'डॉक्टर चंद्रकांत पाटिल के अरमानों को मंजिल तक पहुंचाएंगे' के नारे लगाए. कार्यक्रम की शुरुआत कबीर भजन से हुई. इसके बाद वक्ताओं ने चिकित्सक के जीवन और सेवा भावना पर प्रकाश डाला.

एमबीबीएस में टॉपर थे डॉक्टर पाटिल

पटना से पहुंचे यायावर लेखक पुष्पराज ने बताया कि डॉक्टर चंद्रकांत पाटिल महाराष्ट्र के धुले के एक कपड़ा मिल मजदूर के पुत्र थे. उन्होंने एमबीबीएस की परीक्षा में टॉप किया था. मुंबई में एमडी की पढ़ाई के दौरान कोशी में आयी राष्ट्रीय आपदा की जानकारी मिलने पर वह अपने साथियों के साथ राहत कार्य के लिए बिहार पहुंचे थे.

48 डॉक्टरों की टीम के साथ पहुंचे थे कोशी

उन्होंने बताया कि मुंबई के डॉक्टरों के समूह 'डॉक्टर्स फॉर यू' के साथ 48 चिकित्सक कोशी आए थे. इनमें से पांच डॉक्टर कटैया के राहत शिविर में बाढ़ पीड़ितों का उपचार कर रहे थे. इसी दौरान 21 सितंबर 2008 की रात वज्रपात की घटना में डॉक्टर चंद्रकांत पाटिल की मौत हो गयी.

कुसहा त्रासदी के मृतकों को भी दी श्रद्धांजलि

कोशी नव निर्माण मंच के संस्थापक महेंद्र यादव ने डॉक्टर पाटिल को याद करते हुए कुसहा त्रासदी में जान गंवाने वाले 493 लोगों और लापता हुए 3500 लोगों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि डॉक्टर पाटिल का बलिदान कोशी पीड़ितों को संघर्ष और सेवा के लिए हमेशा प्रेरित करता रहेगा.

गरीब के बेटे ने गरीबों की सेवा को चुना

दीनबंधी पंचायत के पूर्व सरपंच अफजल हुसैन ने कहा कि एक गरीब परिवार के बेटे का डॉक्टर बनना बड़े जज्बे की बात थी, लेकिन इससे भी बड़ा जज्बा गरीब और असहाय लोगों के इलाज के लिए कोशी पहुंचना था. उन्होंने बच्चों से डॉक्टर पाटिल जैसा सेवा भाव और समर्पण अपनाने की अपील की.

कटैया की धरती से जुड़ गया डॉक्टर पाटिल का नाम

विद्यालय के प्रधानाध्यापक अजय कुमार ठाकुर ने कहा कि डॉक्टर चंद्रकांत पाटिल की शहादत से कटैया की धरती का महत्व और बढ़ गया है. अब डॉक्टर पाटिल का नाम इस धरती और यहां के लोगों की स्मृतियों से हमेशा के लिए जुड़ गया है.

21 सितंबर को मनाया जाएगा बलिदान दिवस

समारोह में रामानंद परिमल, सुप्रभा, रेणु, महेंद्र महरान, रमन सिंह और सुमित यादव समेत अन्य लोगों ने डॉक्टर पाटिल की सेवा और समर्पण को याद किया. वक्ताओं ने कहा कि डॉक्टर पाटिल के जीवनदान के सम्मान में शहादत दिवस आयोजित किया जाएगा. मौके पर निर्णय लिया गया कि 21 सितंबर को कटैया 22 आरडी चौक पर दोपहर तीन बजे से डॉक्टर चंद्रकांत पाटिल का बलिदान दिवस मनाया जाएगा.

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