सुपौल के मौजहा में कोसी का कटाव तेज: नदी में विलीन हुआ राधा-कृष्ण मंदिर, 24 घरों पर संकट, ग्रामीणों ने शुरू किया पलायन

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कोसी नदी के उग्र कटाव ने तटवर्ती गांवों पर कहर बरपा दिया है. सुपौल जिले के मौजहा में एक ऐतिहासिक राधा-कृष्ण मंदिर नदी में समा गया, जबकि 24 से अधिक परिवारों के घर बह गए हैं. ग्रामीण खुद अपने मकान तोड़कर सामान बचाने और सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हैं.

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उत्तर बिहार का शोक कही जाने वाली कोसी नदी का जलस्तर भले ही मैदानी इलाकों में फिलहाल सामान्य स्तर पर दर्ज किया जा रहा हो, लेकिन घटते जलस्तर के साथ शुरू हुआ नदी का भीषण कटाव तटवर्ती गांवों पर कहर बनकर टूट पड़ा है. सुपौल जिले के किशनपुर प्रखंड अंतर्गत मौजहा पंचायत के वार्ड नंबर 03 में कोसी नदी के भीषण कटाव की चपेट में आकर ऐतिहासिक राधा-कृष्ण मंदिर ताश के पत्तों की तरह भरभराकर नदी में विलीन हो गया.

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आस्था के केंद्र मंदिर के नदी में समाने का खौफनाक मंजर देखकर पूरे इलाके में चीख-पुकार और दहशत का माहौल है. स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले महज एक महीने के भीतर इस वार्ड में दो दर्जन (24) से अधिक परिवारों के पक्के व कच्चे मकान कोसी की तेज धारा में कटकर बह चुके हैं.

सामान बचाने की जद्दोजहद: खुद अपने हाथों से घर तोड़ रहे ग्रामीण

नदी के तेज कटाव की जद में आने वाले परिवारों के सामने आशियाने को बचाने का कोई रास्ता नहीं बचा है:

  • मजबूरी में हथौड़ा चलाने को विवश: नदी की तेज धारा जब आंगन तक पहुंच रही है, तो ग्रामीण अब किसी प्रशासनिक या सरकारी मदद का इंतजार करने के बजाय खुद ही अपने मकानों को तोड़ने में जुट गए हैं.
  • बचा हुआ सामान सुरक्षित करने की होड़: लोग दीवारों से ईंटें, छत से टीन शेड, एस्बेस्टस, लोहे के एंगल और खिड़की-दरवाजे उखाड़कर सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर पहुंचा रहे हैं, ताकि विस्थापन के बाद किसी तरह नया ठिकाना बनाया जा सके.

घटता जलस्तर बना सबसे बड़ा काल, कटाव की रफ्तार तेज

कोसी नदी का स्वभाव रहा है कि वह पानी बढ़ने की तुलना में पानी घटते वक्त किनारे की जमीनों को तेजी से काटती है:

  • मिट्टी का धंसना जारी: नदी की तलहटी से पानी खींचते ही किनारे की बलुआही मिट्टी में बड़े पैमाने पर धंसाव (स्लाइडिंग) हो रहा है, जिससे किनारे बसे घरों को संभलने का मौका तक नहीं मिल रहा.
  • खुले आसमान के नीचे जिंदगी: जिन परिवारों के घर नदी में कट चुके हैं, वे बांधों और सड़कों के किनारे प्लास्टिक टांगकर शरण लेने को मजबूर हैं. रात होते ही कटाव की आवाज से तटवर्ती आबादी की नींद उड़ जाती है.

स्थानीय स्तर पर बोल्डर पिचिंग और बचाव कार्य की दरकार

मौजहा में राधा-कृष्ण मंदिर के विलीन होने के बाद बचे हुए घरों पर भी अस्तित्व का गंभीर संकट मंडरा रहा है:

  • ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल संसाधन विभाग द्वारा तत्काल जियो बैग और बोल्डर पिचिंग (कटाव निरोधी कार्य) नहीं कराया गया, तो पूरा वार्ड नंबर 03 नक्शे से मिट जाएगा.
  • ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजे और तत्काल पॉलीथिन व राहत सामग्री उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है.

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