कुव्यवस्था के बीच जिल्लत की जिंदगी जीने को विवश हैं पुलिस जवान

Updated at :17 Oct 2016 12:00 AM
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कुव्यवस्था के बीच जिल्लत की जिंदगी जीने को विवश हैं पुलिस जवान

सुपौल : सुपौल को जिला का दर्जा मिले ढाई दशक से अधिक समय बीत चुका है. लेकिन अभी तक पुलिस लाइन को अपना भवन नसीब नहीं हुआ है. वर्तमान समय में पुलिस लाइन बाजार समिति के जर्जर गोदाम में संचालित हो रहा है. आवश्यक सुविधाओं से वंचित पुलिस बल के जवान इन जर्जर गोदामों में […]

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सुपौल : सुपौल को जिला का दर्जा मिले ढाई दशक से अधिक समय बीत चुका है. लेकिन अभी तक पुलिस लाइन को अपना भवन नसीब नहीं हुआ है. वर्तमान समय में पुलिस लाइन बाजार समिति के जर्जर गोदाम में संचालित हो रहा है. आवश्यक सुविधाओं से वंचित पुलिस बल के जवान इन जर्जर गोदामों में रात बिताने एवं ड्यूटी करने को विवश हैं. हालांकि सरकार एवं विभागीय निर्देश के आलोक में सुपौल-सहरसा पथ में कर्णपुर गांव के समीप नये पुलिस लाइन के निर्माण का कार्य आरंभ किया गया है. लेकिन कार्य की प्रगति को देखकर ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है कि निकट भविष्य में पुलिस कर्मियों की समस्या का समाधान नहीं हो पायेगा.

सीमावर्ती जिला होने के बावजूद सुविधाओं का घोर अभाव रहने के कारण पुलिस जवानों का मनोबल टूट रहा है. जिसका प्रभाव उनकी कार्यशैली पर भी पड़ रहा है. जवानों को बारिश के मौसम में खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. दिन भर ड्यूटी करने के बाद जब रात में अपने आवास लौटते हैं तो जर्जर छत से पानी टपकने के कारण उन्हें रात भर आराम नहीं मिलता है. लेकिन अभी तक पुलिस लाईन की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण खानाबदोश की जिंदगी जीना उनकी नियति बन गयी है.

पुलिस लाइन में अभी दो सो पुलिस पदाधिकारीयों सहित महिला जवान 54 व पुरुष जवान 732 को मिलाकर कुल 986 पुलिस इस जर्जर बाजार समिति के गोदाम में रहते हैं. जबकि चुनाव के समय में 1500 से 2000 हजार पुलिस कर्मी को इसी पुलिस लाईन में रखा जाता है.इन जर्जर भवन में जहां बारिश के समय में पुलिस जवानों को छत से पानी टपकने की समस्या से जुझना पड़ रहा है. वहीं 986 पुलिस कर्मी को सोने के लिए मात्र एक सौ बेड ही उपलब्ध है. जिसके कारण कर्मियों को नीचे फर्स पर भेड़ बकरियों की तरह सोना पड़ता है.

शुद्ध पेयजल की नहीं है व्यवस्था

वर्तमान में पुलिस लाइन में 6 चापाकल संचालित है. जिसमें दो से तीन चापाकल अधिकतर खराब ही रहते हैं. वहीं सभी चापाकल से आयरनयुक्त पानी निकलने के कारण पानी पीने लायक नहीं रहते हैं. हालांकि पुलिस जवानों द्वारा अपने पैसे से बाहर से पानी खरीद कर पीते हैं और खाना बनाते हैं. पुलिस लाइन में नलका भी लगाया गया है जो शोभा की वस्तु बन कर रह गयी है. इतना ही नहीं सुबह में नहाने के लिये कतारबद्ध खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करके नहाते हैं. यदि उसी समय इमरजेंसी ड्यूटी हो गया तो उसे बिना नहाये ही जाना पड़ता है. जबकि इस समस्या को लेकर पुलिस एसोसिएशन द्वारा कई बार विभागीय पदाधिकारी को अवगत कराया गया है.

लेकिन अब तक समस्या का निदान नहीं हो सका. शौचालय जाने के लिए लगनी पड़ती है लाइन मेंसरकार द्वारा जहां स्वच्छ भारत के निर्माण को लेकर कई तरह के दुरगामी योजना चलाकर व सहायता राशि प्रदान कर हर घर में शौचालय निर्माण के लिए प्रेरित किया जाता है. वहीं सरकार के सुरक्षाकर्मियों को शौचालय जाने के लिए लंबी लाइन में खड़ा होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है या तो उसे खुले मैदान में शौच के लिए विवश होना पड़ता है.

हालांकि महिला जवानों के लिए हाल में ही पांच शौचालय सहित स्नानघर का निर्माण विभाग के द्वारा करवाया गया है. जबकि पुरुष जवानों के लिए पुराने जमाने के 10 शौचालय है, जिसमें मात्र 03 शौचालय ही कार्यरत है. पुलिस कर्मियों ने बताया की ये शौचालय भी कभी-कभी जाम हो जाते हैं. सबसे बड़ी परेशानी तब होती है जब किसी मंत्री के स्कॉउट में सुबह में जाना पड़ता है तो उस समय बिना शौच के ही या खुले मैदान होकर ड्यूटी जाना पड़ता है. स्वास्थ्य सुविधाओं का है घोर अभावइस पुलिस लाइन में पुलिस कर्मियों के लिये स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है. हालांकि हाल के दिनों में विभाग द्वारा दिन भर के लिये एक चिकित्सक को पदस्थापित किया है.

जो शाम के समय अपने घर चले जाते हैं. जबकि रात के समय में गर कोई पुलिस जवान बीमार पड़ जाते हैं तो फिर उसे निजी क्लिनिक की ओर रूख करना पड़ता है. पुलिस जवानों ने बताया कि यहां पर सरकारी एेम्बुलेंस भी नहीं है. जिसका खामियाजा कभी-कभी पुलिस जवानों को भुगतना पड़ता है. कहते हैं पुलिस मेंस एसोसिएशन के अधिकारी इस बावत एसोसिएसन के अध्यक्ष उदल पासवान, एसोसिएशन के केंद्रीय सदस्य हवलदार हैदर अली खान ने बताया कि ने बताया कि इस पुलिस लाइन में सुविधाओं का घोर अभाव है और देखा जाय तो पुरे बिहार में ऐसी स्थिति किसी भी पुलिस लाइन की नहीं है.

उन्होंने बताया कि एम्बुलेंस, सुलभ शौचालय, स्वच्छ पैयजल एवं एक हजार बैड के बारे में जिला स्तरीय पदाधिकारी से लेकर वरीय पुलिस अधिकारियों को पत्राचार के माध्यम से अवगत कराए हैं व मांग भी किये हैं. लेकिन कोई भी पदाधिकारियों द्वारा इसे गंभीरता से नहीं लिया जाता है. जबकि हमलोगों के द्वारा अपने शरीर पर कष्ट सहते हुये भी सरकार की सेवा कर रहे हैं. वर्जन सुपौल-सहरसा मुख्य पथ में पुलिस लाइन निर्माण का कार्य प्रगति पर है.जिला के स्थापना के समय से पुलिस लाइन वर्तमान जगह पर ही स्थापित है.वर्षा के कारण अभी परेशानी हो रही है.नया पुलिस लाइन बन जाने के बाद सुपौल मॉडल पुलिस लाइन के लिए जाना जायेगा. डॉ कुमार एकले, पुलिस अधीक्षक, सुपौल

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