सदर अस्पताल में बिना डॉक्टर के हो जाता है डायलिसिस
Published by : DEEPAK MISHRA Updated At : 26 Aug 2025 9:48 PM
सदर अस्पताल स्थित डायलिसिस सेंटर की स्थिति को लेकर गठित एक संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट ने गंभीर लापरवाही और अव्यवस्था का खुलासा करते हुए सिविल सर्जन को जांच रिपोर्ट सौंप दिया है. छह जून को एक महिला के डायलिसिस के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही के कारण काफी ब्लड बर्बाद हुआ था.
प्रतिनिधि ,सीवान. सदर अस्पताल स्थित डायलिसिस सेंटर की स्थिति को लेकर गठित एक संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट ने गंभीर लापरवाही और अव्यवस्था का खुलासा करते हुए सिविल सर्जन को जांच रिपोर्ट सौंप दिया है. छह जून को एक महिला के डायलिसिस के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही के कारण काफी ब्लड बर्बाद हुआ था. इसकी खबर जब प्रभात खबर में 8 जून को प्रमुखता से छपी तो सिविल सर्जन डॉक्टर श्रीनिवास प्रसाद ने तीन डॉक्टरों की एक जांच टीम का गठन कर दिया. जांच टीम में सदर अस्पताल के प्रभारी एसीएमओ एवं सर्जन डॉ सुनील कुमार सिंह, महिला डॉक्टर सदा कमर एवं डॉ अनूप कुमार दुबे शामिल थे. जांच टीम ने डायलिसिस सेंटर का निरीक्षण किया. मेडिकल टीम की जांच रिपोर्ट ने सदर अस्पताल के डायलिसिस सेंटर में गंभीर अव्यवस्था और लापरवाही को उजागर किया है. चिकित्सकों की कमी, स्वच्छता की अनदेखी, और कर्मचारियों की लापरवाही मरीजों के जीवन के लिए खतरा बन रहा है. इस स्थिति में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें. लापरवाही से मरीज का खून हुआ बर्बाद जांच में सामने आया कि 6 जून, को हुई एक घटना में टेक्नीशियन डायलिसिस के दौरान आपस में बातचीत में व्यस्त थे, जिसके कारण मरीज का खून बर्बाद हो गया. इस घटना की जांच के लिए जांच टीम द्वारा सीसीटीवी फुटेज मांगी गई, जिसे उपलब्ध नहीं करायी गयी. जांच के दौरान मरीजों ने तीम को बताया कि डायलिसिस के समय चिकित्सकों की अनुपस्थिति एक आम समस्या है.इससे मरीजों में असुरक्षा की भावना है, और किसी भी अप्रिय घटना का खतरा बना रहता है. चिकित्सक की अनुपस्थिति जांच दल ने पाया कि डायलिसिस सेंटर में केवल एक चिकित्सक कार्यरत हैं, जिनका ड्यूटी समय सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक है. पूछताछ में पता चला कि चिकित्सक केवल ऑन कॉल उपलब्ध रहते हैं, जबकि डायलिसिस प्रक्रिया 24 घंटे चलती है. मरीजों ने बताया कि डायलिसिस के दौरान अक्सर कोई चिकित्सक मौजूद नहीं होता, जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जोखिम उत्पन्न हो सकता है. नहीं मिला टेक्नीशियन का ड्यूटी रोस्टर डायलिसिस सेंटर में नौ टेक्नीशियन कार्यरत हैं, लेकिन उनकी ड्यूटी का कोई रोस्टर नहीं है.जांच टीम ने पाया कि इस कारण जिम्मेदारी तय करने और जानकारी प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है. निरीक्षण के दौरान सेंटर में गंदगी पाई गई, जिससे मरीजों में संक्रमण का खतरा बना हुआ है.
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