सीवान के बड़हरिया में अरहर की खेती पर किसानों को प्रशिक्षण, कीट और रोगों से बचाव की बताई तकनीक

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अरहर के खेत का निरीक्षण करते एटीएम सतीश सिंह

बड़हरिया में आत्मनिर्भर दलहन योजना के तहत किसानों को अरहर की खेती में उन्नत उत्पादन के लिए प्रशिक्षण दिया गया. फली छेदक कीट, उकठा रोग से बचाव और फेरोमोन ट्रैप व नीम तेल के प्रयोग की जानकारी दी गई.

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Pulses Scheme: आत्मनिर्भर दलहन योजना के तहत अरहर की खेती के द्वितीय सत्र का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को बड़हरिया नगर पंचायत के खानपुर गांव में आयोजित किया गया. कार्यक्रम का आयोजन कृषि विभाग, सीवान के सौजन्य से जिला कृषि पदाधिकारी आलोक कुमार के निर्देश पर किया गया. प्रशिक्षण की देखरेख सहायक तकनीकी प्रबंधक सतीश सिंह ने की.

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प्रशिक्षण के दौरान किसानों को अरहर की फसल में बेहतर उत्पादन के लिए फसल एवं पोषण प्रबंधन की जानकारी दी गयी. किसानों को सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, पौधों की पिचिंग, कीट एवं रोगों की पहचान तथा उनके नियंत्रण के उपायों के बारे में विस्तार से बताया गया.

फली छेदक कीट और उकठा रोग से बचाव की दी जानकारी

एटीएम सतीश सिंह ने बताया कि अरहर की खेती में फली छेदक कीट, फली मक्खी और उकठा रोग के कारण किसानों को नुकसान हो सकता है. इससे बचाव के लिए किसानों को नियमित रूप से खेतों की निगरानी करने की सलाह दी गयी.

उन्होंने कहा कि फसल चक्र और मिश्रित खेती अपनाकर भी कीट एवं रोगों के प्रभाव को कम किया जा सकता है. उकठा रोग से बचाव के लिए अरहर के साथ ज्वार की सहफसली खेती तथा फली छेदक कीट के नियंत्रण के लिए अरहर के साथ मक्का की सहफसली खेती करने की सलाह दी गयी.

फेरोमोन ट्रैप और नीम तेल के इस्तेमाल की सलाह

प्रशिक्षण में किसानों को बताया गया कि कीटों का प्रकोप बढ़ने पर खेत में फेरोमोन ट्रैप का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा नीम तेल और ट्राइकोडर्मा के प्रयोग की जानकारी भी किसानों को दी गयी.

किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने, समय पर आवश्यक प्रबंधन उपाय अपनाने और खेत में दिखाई देने वाले रोग एवं कीट के लक्षणों की पहचान करने पर जोर दिया गया.

प्रशिक्षण के बाद खेतों में पहुंचकर किया गया निरीक्षण

प्रशिक्षण के बाद कृषि विभाग की टीम ने किसानों के खेतों में पहुंचकर अरहर की फसल का निरीक्षण किया. इस दौरान फसल की स्थिति, पौधों के विकास और खेत में संभावित कीट एवं रोग के प्रकोप की जानकारी ली गयी. किसानों को खेत की मौजूदा स्थिति के अनुसार आवश्यक सुझाव भी दिये गये.

छह पंचायतों में चल रहा अरहर की खेती का कार्यक्रम

एटीएम सतीश सिंह ने बताया कि दलहन की खेती को बढ़ावा देने और किसानों को आधुनिक तकनीक के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से बिहार सरकार के कृषि विभाग की ओर से आत्मनिर्भर दलहन योजना के तहत बड़हरिया प्रखंड की छह पंचायतों में अरहर की खेती का कार्यक्रम चलाया जा रहा है.

इन पंचायतों में बड़हरिया, पड़रौना खुर्द, कैलगढ़ दक्षिण, पकड़ी, हरदोबारा और सदरपुर शामिल हैं. योजना के तहत किसानों को तीन सत्रों में प्रशिक्षण दिया जायेगा. प्रत्येक सत्र के बीच एक माह का अंतर रखा जायेगा, ताकि किसान खेत में बतायी गयी तकनीकों को अपनाकर उसके परिणामों को समझ सकें.

खानपुर और सावना में किसानों ने लिया प्रशिक्षण

खानपुर गांव में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसान राजनारायण प्रसाद, जितेंद्र सिंह, सुमन देवी, बिंदु देवी और लीलावती देवी समेत अन्य किसान उपस्थित रहे.

वहीं, पड़रौना खुर्द पंचायत के सावना गांव में भी अरहर की खेती के द्वितीय सत्र का प्रशिक्षण आयोजित किया गया. प्रशिक्षण के बाद किसानों के खेतों में पहुंचकर अरहर की फसल का निरीक्षण किया गया.

इस कार्यक्रम में हरेराम सिंह, ऊषा देवी, रंजू देवी, निशा देवी, ललन प्रसाद, उर्मिला देवी, इंदु देवी, हेमनरायण शर्मा, राजेंद्र शर्मा, मीरा देवी, अमरेश कुमार, चम्पा देवी समेत अन्य किसान मौजूद रहे.

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