Sitamarhi : बहनों ने हर्षोल्लास के साथ मनाया भैया दूज
Author Fanindra kumar jha
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प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांव में गुरुवार को बहन- भाई के प्रेम का पर्व भैया दूज हर्षोल्लास के साथ मनाया गया.
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चोरौत.
प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांव में गुरुवार को बहन- भाई के प्रेम का पर्व भैया दूज हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार सूर्य की संज्ञा से दो संतानें हुई थी. एक पुत्र यमराज एवं दूसरी पुत्री यमुना. संज्ञा सूर्य का तेज सहन न कर सकी और छाया मूर्ति का निर्माण करके अपने पुत्र और पुत्री को सौंपकर वहां से चली गई. छाया को यम और यमुना से किसी प्रकार का लगाव न था. लेकिन यमराज और यमुना में बहुत प्रेम था. यमराज अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे, लेकिन ज्यादा काम होने के कारण अपनी बहन से मिलने नहीं जा पाते. एक दिन यम अपनी बहन की नाराजगी को दूर करने के लिए उनसे मिलने पहुंचे. भाई को आया देख यमुना बहुत खुश हुई. भाई के लिए खाना बनाया और आदर सत्कार किया. बहन का प्यार देखकर यम इतने खुश हुए कि उन्होंने यमुना को खूब सारे भेंट दिए. यम जब बहन से मिलने के बाद विदा लेने लगे तो बहन यमुना से कोई भी अपनी इच्छा का वरदान मांगने के लिए कहा. यमुना ने उनके इस आग्रह को सुन कहा कि अगर आप मुझे वर देना ही चाहते हैं तो यही वर दीजिए कि आज के दिन हर साल आप मेरे यहां आकर मेरा आतिथ्य स्वीकार करेंगे. कहा जाता है इसी के बाद प्रति वर्ष भाई दूज का त्योहार मनाया जाने लगा. इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण और उनकी बहन सुभद्रा को लेकर भी भाई दूज की एक कथा प्रचलित है. कहा जाता है कि नरकासुर को मारने के बाद जब भगवान श्रीकृष्ण अपनी बहन सुभद्रा से मिलने पहुंचे तो उनकी बहन ने उनका फूलों और आरती से स्वागत की और उनके माथे पर टीका लगा कर दीर्घायु होने की कामना की. इसके बाद से प्रति वर्ष यह त्योहार मनाया जाने लगा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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लेखक के बारे में
By फणींद्र कुमार झा
फणींद्र विगत 16 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें समस्यात्मक, प्रशासनिक एवं जमीनी स्तर की प्रखंड से जुड़ी खबरों को बारीकी से तराशने का गहरा अनुभव प्राप्त है. वे स्थानीय मुद्दों को निष्पक्षता से उठाने के लिए जाने जाते हैं.
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