15 साल बाद बना दुर्लभ संयोग, चार सितंबर को मचेगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम
मिथिलांचल में 15 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है जब अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र एक ही दिन, 4 सितंबर को होंगे. भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव इसी दिन निशिता काल में मनाया जाएगा. इस विशेष अवसर पर मंदिरों और घरों में विशेष अनुष्ठान होंगे.
Sri Krishna Janmashtami: मिथिलांचल में इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी चार सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी. मिथिला से प्रकाशित पंचांगों के अनुसार करीब 15 वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जब अष्टमी तिथि व रोहिणी नक्षत्र का शुभ मिलन एक ही दिन हो रहा है. इसके कारण इस बार अष्टमी व्रत व भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव दोनों चार सितंबर को ही संपन्न होंगे.
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Festival News Updates: निशिता काल में होगा भगवान का जन्मोत्सव
पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि चार सितंबर की रात 2:25 बजे से शुरू होकर पांच सितंबर की रात 12:13 बजे तक रहेगी. वहीं, रोहिणी नक्षत्र चार सितंबर को पूरे दिन प्रभावी रहेगा. भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का मुख्य पूजन निशिता काल में रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक किया जाएगा, जिसमें मंदिरों और घरों में विशेष अनुष्ठान होंगे.
मिथिला की परंपराओं और झांकियों की झलक
मिथिलांचल में जन्माष्टमी की अपनी अलग और अनूठी पहचान है. गांवों व बाजारों में भगवान कृष्ण, माता देवकी, वासुदेव और कंस की मिट्टी की सुंदर प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं. श्रद्धालु दिनभर व्रत रखकर रात में जन्मोत्सव में शामिल होंगे, जबकि मंदिरों में भजन-कीर्तन व आकर्षक झांकियां सजाई जा रही हैं.
अगले दिन आयोजित होंगे दही हांडी के कार्यक्रम
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के अगले दिन यानी पांच सितंबर को विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर दही हांडी, मटका फोड़ प्रतियोगिता व प्रतिमा विसर्जन से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इस अत्यंत दुर्लभ संयोग को लेकर पूरे मिथिलांचल क्षेत्र के श्रद्धालुओं के बीच अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है
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