यहां आज भी दिव्य रूप में मौजूद हैं प्रभु श्रीराम और माता सीता! 24 करोड़ से संवर रहा सीतामढ़ी का पंथपाकड़ धाम

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निर्माण एजेंसी द्वारा करवाया जा रहा पार्किंग निर्माण कार्य

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सीतामढ़ी का पंथपाकड़ धाम रामायणकालीन परंपराओं का पावन तीर्थ है, जहाँ आज भी प्रभु श्रीराम और माता सीता के दिव्य रूप में विराजमान होने की मान्यता है. 24 करोड़ की लागत से इसे एक भव्य धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है.

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सीतामढ़ी: जिले का ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल पंथपाकड़ धाम रामायणकालीन परंपराओं और सनातन आस्था का एक अत्यंत पावन तीर्थ माना जाता है. धाम के पुजारी एवं स्थानीय श्रद्धालुओं की अटूट मान्यता है कि यह वही पवित्र स्थल है, जहां मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और जानकी माता आज भी दिव्य रूप में विराजमान हैं. मान्यता के अनुसार, माता सीता का प्राकट्य पुनौरा में हुआ, उनका बाल्यकाल और लालन-पालन जनकपुर में बीता तथा वे अयोध्या में धरती में समाहित हुईं, लेकिन पंथपाकड़ धाम उनकी अनवरत दिव्य उपस्थिति का मुख्य केंद्र है. समय के साथ इस पावन धाम की ख्याति देश की सीमाओं को लांघकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो चुकी है.

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निर्माण एजेंसी द्वारा करवाया जा रहा पार्किंग निर्माण कार्य. अद्वितीय पाकड़ के वृक्ष के नीचे विराजमान मां सीता की पीड़ी. | Prabhat Khabar Network
पाकड़ के वृक्ष के नीचे विराजमान मां सीता की पीड़ी

'प्रमोद कानन' में देवी-देवता बने थे बाराती, ऋषि आज भी लीन हैं तपस्या में

धाम के मुख्य पुजारी रामरेखा दास जी के अनुसार, सीता-राम विवाह यात्रा के दौरान इस स्थल का विशेष धार्मिक महत्व रहा है. लोकमान्यता है कि जब प्रभु श्रीराम माता सीता को ब्याह कर जनकपुर से लौट रहे थे, तब इसी स्थान पर सभी देवी-देवता बाराती के रूप में उपस्थित हुए थे. यही नहीं, आध्यात्मिक परंपराओं के अनुसार कई ऋषि-मुनि आज भी इस पावन धरा पर अदृश्य रूप में तपस्या में लीन हैं. धार्मिक ग्रंथों में इस मनोरम स्थल को “प्रमोद कानन” के नाम से भी संबोधित किया गया है. धाम परिसर में मौजूद सदियों पुराना प्राचीन पाकड़ वृक्ष श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र है, जिसका संदर्भ वाल्मीकि रामायण, श्रीरामचरितमानस सहित अन्य रामायण कालीन ग्रंथों में भी मिलता है.

देश-विदेश से दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं श्रद्धालु

पंथपाकड़ धाम केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि रामायणकालीन इतिहास और पुरातत्व पर शोध करने वाले शोधार्थियों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यहां भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, मॉरिशस, इंडोनेशिया और नेपाल सहित कई देशों से बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए आते हैं. स्थानीय नागरिकों का मानना है कि पंथपाकड़ धाम सीतामढ़ी जिले को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट और गौरवमयी पहचान दिलाने में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

24 करोड़ से संवरा जा रहा पंथपाकड़ धाम: पर्यटन विभाग की परियोजना पर निर्माण तेज

पंथपाकड़ धाम को एक आधुनिक और भव्य धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए बिहार पर्यटन विभाग द्वारा लगभग 24 करोड़ रुपये की लागत से व्यापक विकास कार्य युद्धस्तर पर कराए जा रहे हैं.

  • भव्य संरचना व सुरक्षा: परियोजना के तहत एक विशाल व नक्काशीदार प्रवेश द्वार और पूरे परिसर की सुरक्षा के लिए लगभग 18 फुट ऊंची बाउंड्री वॉल (सुरक्षा दीवार) का निर्माण कराया जा रहा है.
  • चौड़ी सड़क और हरियाली: मंदिर और प्राचीन पाकड़ वृक्ष तक श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए करीब 60 फुट चौड़ी आधुनिक सड़क बनाई जा रही है. इस मार्ग के दोनों ओर आकर्षक औषधीय पौधे और रंग-बिरंगे फूलों की क्यारियां लगाई जाएंगी.
  • विशाल पार्किंग व धर्मशाला: दूर-दराज से आने वाले वाहनों के व्यवस्थित ठहराव के लिए लगभग दो एकड़ क्षेत्र में आधुनिक पार्किंग स्थल विकसित किया जा रहा है. साथ ही पर्यटकों व श्रद्धालुओं के रात्रि विश्राम के लिए सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला और पर्यटक सुविधा केंद्र की व्यवस्था की जा रही है.

निर्माण एजेंसी के अनुसार, इस महात्वाकांक्षी परियोजना का क्रियान्वयन तेज गति से चल रहा है और आगामी एक वर्ष के भीतर अधिकांश प्रमुख निर्माण कार्य पूरे कर लिए जाएंगे. निर्माण पूर्ण होते ही पंथपाकड़ धाम बिहार के अग्रणी धार्मिक पर्यटन स्थलों में शुमार होकर श्रद्धालुओं के लिए और अधिक सुगम व आकर्षक बन जाएगा.


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