छाने लगा होली का रंग, उड़ने लगे गुलाल

Published at :10 Mar 2017 5:08 AM (IST)
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छाने लगा होली का रंग, उड़ने लगे गुलाल

छाने लगा होली का रंग, उड़ने लगे गुलाल होली मिलन समारोह का दौर भी हुआ तेज सीतामढ़ी : शहर से लेकर गांवों तक होली का रंग छाने लगा है. वहीं फिजा में रंग गुलाल उड़ने लगा है. शहरों में होली मिलन समारोह का दौड़ शुरू हो गया है. साथ ही विभिन्न स्कूल व कॉलेजों में […]

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छाने लगा होली का रंग, उड़ने लगे गुलाल

होली मिलन समारोह
का दौर भी हुआ तेज
सीतामढ़ी : शहर से लेकर गांवों तक होली का रंग छाने लगा है. वहीं फिजा में रंग गुलाल उड़ने लगा है. शहरों में होली मिलन समारोह का दौड़ शुरू हो गया है.
साथ ही विभिन्न स्कूल व कॉलेजों में बच्चों के बीच रंग व गुलाल उड़ने लगे है. रंग-बिरंगे गुलाल को लगाये छात्र-छात्राओं में गजब की उत्साह दिख रहा है. वहीं गांवों में ढोल-मिजिरे पर होली की गीत गाकर एक दूसरे को गुलाल लगाना शुरू कर दिये है. इसी के साथ गांवों में होली का उमंग दिखने लगा है.
शुक्रवार की शाम डुमरा प्रखंड के रूपौली में ग्रामीणों ने ढोल, हारमोनियम के बीच होली की गीत ‘यमुना तट राम खेलत होली, यमुना तट…, होली खेल रघुवीरा अवध में होली खेले रघुवीरा’ गाकर खूब झूमे. इस दौरान ढोल पर हो हो रही अंगूलियों की प्रहार से ढमा-ढम उठ रही आवाजे हृदय को अह्लादित कर रही थी. इसी बीच एक के बाद एक लोकोक्ति ‘बोलो भईया बोल कबीर…, जोगिरा सरर…’ वातावरण होली के रंग में रंगा रहा. इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्ग पर होली का रंग चढ़ने लगा है.
पहले वंसत ऋुतु शुरू होते ही मानते थे होली : सीतामढ़ी. ढ़ाई दशकों में समय काफी बदल गया है. रुपौली के चंदेश्वर सिंह बताते हैं कि पहले वसंत पंचमी शुरू होने के बाद होली का उमंग दिखने लगता था. गांव के प्रमुख स्थानों पर बूढ़े-जवान ढोल-मिजिरे पर होली की गीत गाकर झूमते थे. परंतु अब कुछ लोग इस पर्व को कम महत्व देने लगे है तो कुछ लोग रुपये कमाने की मशीन बन गये है. इससे लोग आर्थिक रूप से मजबूत तो हुए. परंतु उनके जीवन में सुख-शांति छिन गया है. बताया होली तो खुशियों का त्योहार है. होली में एक दूसरों से प्रेम बढ़ता है. भूषण दास बताते हैं कि होली का त्योहार होलिका दहन से जुड़ा है.
होलिका अपने भाई के कहने पर भतीजा प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ गयी. लेकिन, भक्त प्रह्लाद भगवान का नाम का स्मरण करता रहा. अंतत: होलिका आग में जलकर भष्म हो गयी और प्रह्लाद बच गया. तब से होली का त्योहार मनाया जाता है. बताया हमलोग होलिका दहने के लिए लकड़ी व अन्य सामग्री जुटाने लगे है.
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