मलेशिया गये 8 मजदूर हुए ठगी का शिकार, स्वदेश लौटा

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मलेशिया गये 8 मजदूर हुए ठगी का शिकार, स्वदेश लौटा छह मजदूरों को वर्क वीजा नहीं रहने के कारण क्वालालंपुर एयरपोर्ट से ही लौटाया गयानौकरी नहीं मिलने पर दो मजदूर गांव के एक परिचित व्यक्ति से कर्ज लेकर लौटा भारतसात लाख लेकर दो वर्षों के लिए बटन पैकिंग के काम पर भेजा गया था मजदूर […]

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मलेशिया गये 8 मजदूर हुए ठगी का शिकार, स्वदेश लौटा छह मजदूरों को वर्क वीजा नहीं रहने के कारण क्वालालंपुर एयरपोर्ट से ही लौटाया गयानौकरी नहीं मिलने पर दो मजदूर गांव के एक परिचित व्यक्ति से कर्ज लेकर लौटा भारतसात लाख लेकर दो वर्षों के लिए बटन पैकिंग के काम पर भेजा गया था मजदूर सीतामढ़ी. मलेशिया में नौकरी दिलाने के नाम पर महाराष्ट्र के थाणे जिला अंतर्गत टिटवाला स्थित एक फर्जी एजेंसी द्वारा जिले के आठ मजदूरों को ठगी का शिकार बनाने का मामला प्रकाश में आया है. मामले को लेकर बिचौलिया बथनाहा थाना क्षेत्र के गाजीपुर गांव निवासी मो. रजीउल्लाह के बयान पर रविवार को नगर थाना में एक प्राथमिकी दर्ज की गयी है, जिसमें यूपी के बलिया जिला अंतर्गत सिकंदरपुर का रहने वाला मो. इम्तियाज अंसारी, महाराष्ट्र के टिटवाला स्थित एजेंसी के ब्रांच ऑफिस के अलावा टिटवाला का ही रहने वाला ताजिंदर सिंह करनैल सिंह चैताल व यूपी के जौनपुर का रहने वाला अब्दुल हइ को आरोपित किया गया है. पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है.क्या है पूरा मामलाकोर्ट के आदेश पर दर्ज प्राथमिकी में बताया गया है कि पीड़ित मो. रजीउल्लाह उक्त एजेंसी के संपर्क में आया, तो आरोपितों द्वारा कहा गया कि वे सभी लोग मिल कर एशियाइ देशों की विभिन्न कंपनियों में नौकरी दिलवाने, वर्क वीजा दिलाने, इमीग्रेशन दिलाने व टिकट की व्यवस्था करने का काम करते हैं. पीड़ित से कहा गया मलेशिया स्थित प्लास्टिक फैक्ट्री में बटन पैकिंग के लिए दो वर्षों तक काम करने वाले इच्छुक मजदूरों से संपर्क करें. उसे मलेशिया में नौकरी दिलाया जायेगा. इसके लिए कूल 90 हजार रुपये खर्च लेना है. पीड़ित ने जिले के विभिन्न इलाकों से इच्छुक 8 मजदूरों को आरोपितों से संपर्क कराया. सभी आठ मजदूरों से रुपये कर शहर स्थित आइसीआइसीआइ बैंक के माध्यम से यूपी के जौनपुर शाखा में कुल 7 लाख 20 हजार रुपये भेज दिया गया. सभी मजदूरों को 9.11.14 को चेन्नइ के तिरुचिरुपल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट से मलेशिया भेज दिया गया. मलेशिया के क्वालालंपुर एयरपोर्ट पर उतरने के बाद वहां मौजूद इमिग्रेशन पदाधिकारी द्वार पूछताछ करने पर सभी मजदूरों द्वारा बताया गया कि वे लोग दो वर्ष के लिए नौकरी करने आया है. तब उक्त ऑफिसर द्वारा कागजात देख कर बताया गया कि उसके पास वर्क वीजा नहीं हैं. केवल टूरिस्ट वीजा हैं और वापसी टिकट भी उन्हीं भेजने वालेे के पास है. मजदूरों से पूछा गया कि उसके पास ठहरने के लिए पैसा है या नहीं? नहीं बताने पर छह मजदूरों को वहीं से वापस भारत भेज दिया गया. शेष बचे दो मजदूरों को आरोपित इम्तियाज अंसारी के लोगों द्वारा ले जाया गया व दो दिनों तक साथ रखने के बाद नौकरी नहीं दिला कर वापस लौट जाने को कहा गया. दोनों मजदूर मलेशिया में रहने वाले अपने गांव के एक परिचित व्यक्ति से रुपये कर्ज लेकर वापस भारत लौट आया. सभी मजदूर वापस लौट कर पीड़ित बिचौलिया से रुपये की मांग करने लगा. पीड़ित ने भी आरोपित लोगों व फर्जी एजेंसी से संपर्क कर रुपये लौटाने की मांग की. कुछ महिनों तक आज-कल कर टालमटोल किया गया व आखिर में 7 मई 2015 को रुपये देने से इनकार कर दिया गया.

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