इमरजेंसी सेवा में एक अदद सिरिंज तक नहीं

Updated:
विज्ञापन

इमरजेंसी सेवा में एक अदद सिरिंज तक नहीं फोटो नंबर-27, सदर अस्पतालसलायन सेट, इंट्राकेट, डायलोना, डेक्सोना, टेटभेट व सिरिंज जैसी मामूली व अनिवार्य दवाओं व कीटों की करीब पांच माह से है कमी.मरीजों के परिजन को बाहर से लानी पड़ती है दवायें.सीतामढ़ी. कहा जाता है कि शिक्षा व स्वास्थ्य की बेहतरी के बिना कोई भी […]

विज्ञापन

इमरजेंसी सेवा में एक अदद सिरिंज तक नहीं फोटो नंबर-27, सदर अस्पतालसलायन सेट, इंट्राकेट, डायलोना, डेक्सोना, टेटभेट व सिरिंज जैसी मामूली व अनिवार्य दवाओं व कीटों की करीब पांच माह से है कमी.मरीजों के परिजन को बाहर से लानी पड़ती है दवायें.सीतामढ़ी. कहा जाता है कि शिक्षा व स्वास्थ्य की बेहतरी के बिना कोई भी राष्ट्र या समाज विकास नहीं कर सकता. तरक्की के लिए मेहनत व मेहनत के लिए स्वास्थ्य का ठीक होना अति आवश्यक होता है. क्योंकि स्वस्थ रह कर ही कोई भी मनुष्य कुछ कर सकता है, परंतु गत कुछ महीनों से सदर अस्पताल का इमरजेंसी सेवा से लोगों को समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है . कारण, यहां मामूली से मामूूली दवा व कीट तक उपलब्ध नहीं है. यहां तक कि एक अदद सिरिंज तक नहीं है. जिले के लाखों गरीब आबादी के लिए सदर अस्पताल एक मात्र सहारा है. सच तो यह है कि आर्थिक रूप से संपन्न लोग तो बड़े शहरों का रुख कर लेते हैं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिये सरकारी स्वास्थ्य सेवा ही एक मात्र सहारा है. इसका सीधा उदाहरण दवा व कीट समेत सभी मूलभूत सुविधाओं के अभाव के बावजूद भी सदर अस्पताल से लेकर विभिन्न पीएचसी समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में उमड़ने वाली मरीजों की भारी भीड़ है. सदर अस्पताल में भी रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिये आते हैं. सिर्फ मरजेंसी वार्ड की ही बात करें, तो वहां भी रोजना 60 से 80 मरीजों को भरती लिया जाता है. जिसमें दुर्घटना व मारपीट से लेकर विभिन्न तरह के मरीज होते है. जानकर हैरानी होगी कि सदर अस्पताल के आपातकालीन सेवा के लिए एक अदद सिरिंज तक उपलब्ध नहीं है. यानी मामूली से मामूली दवा व सूई भी उपलब्ध नहीं होना स्वास्थ्य विभाग के लिए सवाल है. इमरजेंसी वार्ड के कर्मचारियों से मिली जानकारी के अनुसार इमरजेंसी सेवा के लिए मामूली व अनिवार्य दवायें टेटभेट, डेक्सोना, डायलोना, इंट्राकेट, सलायन सेट व सिरिंज तक महिनों से विभाग द्वारा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है. जो गरीब तबके के मरीजों के लिये परेशानी का सबब है. परिजनों को उक्त दवा व कीट स्वयं बाहर से खरीद कर लाना पड़ता है. सूत्रों के अनुसार उक्त दवा व कीट के लिये मरीजों के परिजन को सलायन सेट के लिये 110 से 135 रुपये, जबकि इंट्राकेट 85 रुपये, डेक्सोना 10 से 12 रुपये, डायलोना 5 से 7 रुपये, टेटभेट 10 रुपये व सिरिंज के लिये कम से कम 5 रुपये चुकाना पड़ता है. अंदाजा लगाया जा सकता है कि गरीबों को सरकारी स्वास्थ्य सेवा से कितना लाभ मिलता होगा. दवाओं की कमी का कारण जानने के लिये सीएस से संपर्क करने की कोशिश की गयी, परंतु बात नहीं हो सकी. वहीं डीएस डॉ सुधा श्रीवास्तव ने बताया कि हमलोग तो दवा खरीदते नहीं हैं. जो दवा या सुविधा उपलब्ध होता है, उसी के अनुसार सेवाऐं दी जा रही है.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन