वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाये रखने की सीख देती है मधुश्रावणी
Updated at : 31 Jul 2019 12:22 AM (IST)
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सीतामढ़ी/बोखड़ा : नव विवाहिताओं के लिए मिथिलांचल की पारंपरिक व प्रसिद्ध पर्व मधुश्रावणी वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाये रखने की सीख देती है. 15 दिवसीय इस पर्व के दौरान खास कर नव विवाहिताओं को पारिवारिक जीवन में महिलाओं की क्या भूमिका होनी चाहिए, की सीख दी जाती है. कैसे एक महिला अपने परिवार को एक […]
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सीतामढ़ी/बोखड़ा : नव विवाहिताओं के लिए मिथिलांचल की पारंपरिक व प्रसिद्ध पर्व मधुश्रावणी वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाये रखने की सीख देती है. 15 दिवसीय इस पर्व के दौरान खास कर नव विवाहिताओं को पारिवारिक जीवन में महिलाओं की क्या भूमिका होनी चाहिए, की सीख दी जाती है.
कैसे एक महिला अपने परिवार को एक सूत्र में बांध कर रखती है, अपने पति समेत परिवार के विभिन्न सदस्यों की सेवा करती है व आदर की पात्रा बनी रहती है से संबंधित बातें नव विवाहिताओं को पौराणिक कथा के माध्यम से बताया जाता है. इस दौरान भगवान शंकर व माता पार्वती की वैवाहिक जीवन की कहानी का उदाहरण पेश किया जाता है.
देवों के देव महादेव को माता पार्वती कैसे खुश रख कर सृष्टि के संचालन में सहयोग करती है, इससे अवगत कराया जाता है. वैवाहिक जीवन में किस प्रकार सुख-दुख झेल कर भी खुश रहने की जरूरत है, से उन्हें परिचित कराया जाता है. नव विवाहिताओं को यह बताया जाता है कि कैसे पति परमेश्वर के समान होते हैं. परेशानी व चिंता में व्यथित अपने पति को महिलाएं कैसे रिझा कर उससे उबरने की हिम्मत देती है व अच्छे समय में कैसे शांति पूर्वक सुखमय जीवन जीना चाहिए कि कला सिखाया जाता है.
फूल-पत्ती चुनने का विशेष महत्व
उक्त नवविवाहिताओं ने बताया कि मधुश्रावणी के दौरान बासी फूल-पत्तियों से भगवान शिव व गौरी की पूजा की जाती है. इसके लिए प्रतिदिन शाम को सोलहों शृंगार से सज-धज कर वे लोग समीक के बाग-बगीचों में सहेलियों के साथ मैथिली गीत गाते जाती है. रंग-बिरंगे फूल चुनती है. बांस की पत्ते तोड़ती है व आसपास की मंदिरों में दर्शन के बाद बैठक कर फूल-पत्तियों से डाला का सजाती है.
विभिन्न प्रकार के मैथिली गीतों से आसपास का वातावरण सम्मोहक बन जाता है, जिसे सुनने व देखने के लिए आसपास के लोग किसी न किसी बहाने जुटने लगते हैं. सावन की फुहार व घनघोर घटाओं के बीच का यह दृश्य वास्तव में अविस्मरणीय होता है, जिसे नवविवाहिताओं अपने जीवन में इसे भूला नहीं पाती है. परम्परा के अनुसार इस दौरान ससुराल से लाये गये विभिन्न प्रकार की सामग्री व भोजन सामग्रियों का हीं उपयोग किया जाता है.
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