तस्करों को करोड़पति बना रहा रेड सैंड बोआ

Published at :31 Oct 2017 4:18 AM (IST)
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तस्करों को करोड़पति बना रहा रेड सैंड बोआ

सीतामढ़ी : रेड सैंड बोआ (दुर्लभ प्रजाति का सांप) तस्करों को करोड़पति बना रहा है. कुछ वर्षों के भीतर देश के विभिन्न हिस्सों से नेपाल के रास्ते चीन में इस दुर्लभ प्रजाति के सांप की तस्करी हो रही है. भारत-नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी के जवानों ने अब तक आधा दर्जन मामलों में नौ तस्करों […]

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सीतामढ़ी : रेड सैंड बोआ (दुर्लभ प्रजाति का सांप) तस्करों को करोड़पति बना रहा है. कुछ वर्षों के भीतर देश के विभिन्न हिस्सों से नेपाल के रास्ते चीन में इस दुर्लभ प्रजाति के सांप की तस्करी हो रही है. भारत-नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी के जवानों ने अब तक आधा दर्जन मामलों में नौ तस्करों को गिरफ्तार किया है. उनके पास से रेड सैंड बोआ सांप बरामद किये गये हैं. तीन दिन पूर्व ही सोनबरसा बॉर्डर पर तैनात एसएसबी 51 वीं बटालियन के जवानों ने हनुमान चौक के पास से दो रेड सैंड बोआ के साथ गौतमनाथ व दयानाथ को पकड़ा था. दोनों यूपी के कानपुर के रहनेवाले हैं. दोनों सांप लेकर नेपाल के रास्ते चीन जा रहे थे.

बताया जाता है कि चीन में इन सांपों के मांस व रक्त की काफी डिमांड है. वहां तस्करों को इसकी मुंहमांगी कीमत मिलती है. यही कारण है कि रेड सैंड बोआ की तस्करी से भारतीय इलाके के तस्कर मालामाल हो रहे हैं. खास बात यह है कि इनकी तस्करी में गिरोह कुछ सपेरों से सहयोग ले रहा है. सुरक्षा एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए ही गिरोह में शामिल तस्कर सपेरों की मदद लेते हैं. पिछले वर्ष रेड सैंड बोआ की तस्करी के तीन मामले सामने आये थे. एक मामले में एसएसबी की 20 वीं बटालियन के जवानों ने रेड सैंड बोआ के साथ सपेरे को गिरफ्तार किया था. वहीं दूसरे मामले में सोनबरसा व भिट्ठामोड़ बॉर्डर से सांप के साथ तीन तस्कर पकड़े गये थे.
क्या है रेड सैंड बोआ: रेड सैंड बोआ एक दुर्लभ प्रजाति का सर्प है. यह रेगिस्तानी इलाके में पाया जाता है. दो मुंह होने के कारण इसका नामकरण रेड सैंड बोआ के तौर पर किया गया. खास बात यह है कि इस सर्प का मुंह और पूंछ एक जैसी ही दिखती है. इसके चमड़े का रंग लाल होता है. आम तौर पर सांप को जहरीला जीव माना जाता है, परंतु रेड सैंड बोआ काफी सुस्त होता है. इसकी शारीरिक गतिविधि सीमित होती है. भारत के राजस्थान तथा खाड़ी देशों के अलावा इराक और ईरान में इसके शिकारियों की संख्या बहुतायत में है.
दो से तीन करोड़ तक की होती आमदनी
सूत्रों की माने, तो रेड सैंड बोआ की कीमत दो से तीन करोड़ तक होती है. चीन समेत अन्य देशों में इसके खरीदार मुंहमांगी कीमत चुकाने तक को तैयार रहते हैं. यही वजह है कि रेगिस्तानी इलाके में इसके शिकार की तलाश में लोग घर-बार छोड़ कर बैठे होते हैं. वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची चार के तहत रेड सैंड बोआ को दुर्लभ जीव माना गया है. भारत सरकार ने इसके रखने, पकड़ने, मारने अथवा व्यापार करने पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाया हुआ है.
नेपाल के रास्ते चीन
भेजे जा रहे दुर्लभ सांप
जिले में अब तक छह मामले आये हैं सामने
नौ तस्कर सांप के साथ
किये गये गिरफ्तार
चीन समेत अन्य देशों में मिल रही मुंहमांगी कीमत
तस्कर कर रहे सपेरों का इस्तेमाल
चीन में बनती हैं सेक्सवर्धक दवाएं
रेड सैंड बोआ की डिमांड वैसे तो खाड़ी देशों के अलावा विश्व के अन्य देशों में भी रहती है, लेकिन चीन में इसके खरीदार अधिक हैं. चीनी मान्यताओं में यह कहा गया है कि रेड सैंड बोआ का मांस खाने से सेक्स पावर बढ़ता है. इसके रक्त से सेक्स वर्धक दवाइयां बनती हैं जिसे आम इंसान की शारीरिक शक्ति में जबरदस्त इजाफा होता है.
तस्करों पर है नजर
एसएसबी 51वीं बटालियन के उप सेनानायक शंकर सिंह ने बताया कि भारतीय क्षेत्र के तस्कर नेपाल के रास्ते रेड सैंड बोआ की तस्करी करते हैं. उनकी कंपनी द्वारा सात माह के भीतर चार सांप बरामद कर तीन तस्कर को पकड़ा गया है. जवानों को रूटीन चेकिंग में पैनी नजर रखने का निर्देश दिया गया है. पूछताछ में तस्करों का कहना है कि सांप को वह चीन भेजते हैं.
शंकर िसंह, एसएसबी 51वीं बटािलयन उप सेनानायक
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