शेखपुरा: घाटकुसुम्भा को बाढ़ग्रस्त घोषित करने की मांग, सामाजिक कार्यकर्ता का आमरण अनशन शुरू

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आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता व समर्थन में जुटे लोग. | Prabhat Khabar Network

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घाटकुसुम्भा प्रखंड को बाढ़ग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता पप्पू राज मंडल ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है. बाढ़ की मार झेल रहे हजारों लोग सुविधाओं से वंचित हैं.

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शेखपुरा. घाटकुसुम्भा प्रखंड को जलजमाव क्षेत्र की जगह बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता पप्पू राज मंडल ने प्रखंड मुख्यालय स्थित दुर्गा मंदिर के समीप अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया है. आमरण अनशन के पहले दिन उनके समर्थन में बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया. आमरण अनशन कार्यक्रम का आयोजन “घाटकुसुम्भा प्रखंड की आम जनता” के बैनर तले किया जा रहा है.

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बताया जाता है कि गंगा नदी में पानी के भारी दबाव के कारण हरोहर नदी में उफान आने से घाटकुसुम्भा प्रखंड इन दिनों बाढ़ की चपेट में है. करीब 35 हजार की आबादी पिछले एक पखवाड़े से बाढ़ के कारण घरों में जल कैदी के रूप में जीवन व्यतीत कर रही है. हजारों लोगों को अपने घरों की छतों पर खाना बनाने और रहने को मजबूर होना पड़ रहा है. खेतों में पानी जमा रहने के कारण किसानों की फसल नष्ट हो चुकी है. वहीं ग्रामीणों को आवागमन, रोजगार, पशुओं के चारे और दैनिक जरूरतों से जुड़ी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

सरकार की कागजी कार्रवाई में फंसे प्रखंड के हजारों किसान

घाटकुसुम्भा प्रखंड के किसानों को बाढ़ के कारण बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है. आंदोलनकारियों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली के कारण 32 गांवों की करीब 35 हजार की आबादी बेबसी में जीवन जीने को मजबूर है.

बताया जाता है कि वर्ष 2008 में सरकार की फाइलों में इस प्रखंड को जलजमाव क्षेत्र घोषित कर दिया गया. इसके बाद बाढ़ आपदा में मिलने वाली सहायता राशि से यहां के लोग वंचित हो गये. वर्तमान में घाटकुसुम्भा प्रखंड के लोगों को बाढ़ राहत के नाम पर प्लास्टिक की शीट और पशुचारे का वितरण किया जाता है.

वहीं, जिस हरोहर नदी से घाटकुसुम्भा के साथ ही लखीसराय जिले का बड़हिया प्रखंड भी प्रभावित होता है, उसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र मानकर सहायता दी जा रही है. आंदोलनकारियों का कहना है कि एक ही नदी के दो किनारों पर फैले पानी के मामले में अलग-अलग नीति घाटकुसुम्भा की बड़ी आबादी पर भारी पड़ रही है.

पहले भी हो चुका है धरना-प्रदर्शन

घाटकुसुम्भा को बाढ़ग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर इससे पहले भी ग्रामीण धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं. ग्रामीणों की ओर से करीब 10 हजार लोगों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन भी पूर्व में जिलाधिकारी को सौंपे जाने की बात कही गयी है. इसके बावजूद मांग पूरी नहीं होने पर अब प्रखंड के लोग आंदोलन पर उतर गये हैं.

मांग पूरी होने तक जारी रहेगा अनशन

पप्पू राज मंडल ने कहा कि यह आमरण अनशन घाटकुसुम्भा प्रखंड की आम जनता और बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों के अधिकार एवं उनकी समस्याओं को लेकर किया जा रहा है. उन्होंने प्रशासन से मांग की कि क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को देखते हुए घाटकुसुम्भा प्रखंड को बाढ़ग्रस्त घोषित किया जाये और प्रभावित लोगों को सरकारी राहत एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करायी जायें.

उन्होंने कहा कि जब तक ग्रामीणों की जायज मांग पर गंभीरता से विचार कर उचित कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका अनिश्चितकालीन आमरण अनशन एवं भूख हड़ताल जारी रहेगा.

बड़ी संख्या में लोगों ने दिया समर्थन

अनशन कार्यक्रम को स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी समर्थन मिल रहा है. शिवशंकर महतो, रघुनन्दन कुमार, सचिन कुमार, दीपक कुमार, रामाश्रेय मुखिया, सुरेन्द्र साव, सतीश सर, राजाराम महतो, चन्दन कुमार, नंदन कुमार, राजेश कुमार, अमीर मंडल, विजय सर सहित अन्य सहयोगियों ने अनशन को पूर्ण रूपेण समर्थन देने की बात कही है.

समर्थन में पहुंचे लोगों ने कहा कि घाटकुसुम्भा प्रखंड के ग्रामीण लंबे समय से जलजमाव और बाढ़ की समस्या झेल रहे हैं. ऐसे में प्रशासन को मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित लोगों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन द्वारा ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है.

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