सासाराम में कहीं आप भी तो नहीं खा रहे बीमारी वाला खाना? खुले में बिक रहे खाद्य पदार्थों से अस्पतालों में बढ़े संक्रमण के मरीज

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सड़क किनारे फास्ट फूड खाते लड़कियां

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बरसात के मौसम में सड़क किनारे खुले में बिक रहे दूषित खाद्य पदार्थों के सेवन से उल्टी, दस्त और पीलिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। सतर्क रहें और सावधान रहें।

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प्रतिनिधि, चेनारी. बरसात के मौसम में सड़क किनारे खुले में बिक रहे खाद्य पदार्थ खाने से बीमारी फैलने की आशंका जतायी जा रही है. कई दिनों तक इस्तेमाल किये गये तेल में तैयार खाद्य सामग्री बिना ढंके बेची जा रही है. ऐसे में इन खाद्य पदार्थों पर धूल पड़ने के साथ मक्खियां भी मंडराती दिखती हैं.

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खुले में बिक रहे गोलगप्पे, चाट और कई खाद्य पदार्थ

शहर के संत चौक, गांधी चौक, कर्पूरी चौक, पंजाब नेशनल बैंक के समीप और वन विभाग के आसपास गोलगप्पे, चाट, छोले-भटूरे, लिट्टी, पावभाजी, टिक्की, समोसा, जलेबी, लवंगलत्ता, चाउमिन, मछली, मटन और चिकेन आदि चीजें बिक रही हैं.

उल्टी, दस्त और बुखार के मरीज बढ़े

सीएचसी अस्पताल सहित निजी अस्पतालों के ओपीडी में इन दिनों उल्टी, दस्त, बुखार और पीलिया जैसे संक्रमण के मरीजों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में करीब 10 प्रतिशत बढ़ गयी है. ऐसे में खुले में बिक रहे खाद्य पदार्थों को लेकर लोगों की सेहत पर चिंता जतायी जा रही है.

दूषित भोजन और गंदा पानी संक्रमण का कारण

डॉ. कृष्ण कुमार का कहना है कि दूषित भोजन, गंदा पानी और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ खाना संक्रमण का सबसे बड़ा कारण हैं. कई मरीजों की हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती भी करना पड़ रहा है.

बरसात में बढ़ जाता है संक्रमण का खतरा

डॉ. कृष्ण कुमार के अनुसार बरसात के मौसम में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं. ऐसे में खुले में रखा भोजन या कई घंटे पहले तैयार खाद्य पदार्थ खाने से संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

सीएचसी में रोजाना 150-200 मरीज पहुंच रहे

सीएचसी अस्पताल में डायरिया, पेट दर्द, पीलिया, बुखार और सर्दी-खांसी के रोजाना 150-200 मरीज स्वास्थ्य जांच कराने आ रहे हैं. इनमें से पांच-छह गंभीर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है.

एक ही तेल के बार-बार इस्तेमाल से नुकसान

अस्पताल के डॉक्टर ने बताया कि सड़क किनारे मिलने वाले खाद्य पदार्थों को तैयार करने के लिए एक ही तेल का बार-बार उपयोग किया जाता है. इससे हानिकारक रसायन बनने लगते हैं. ऐसे भोजन से फूड प्वाइजनिंग, पेट का संक्रमण और लीवर संबंधी समस्याएं हो सकती हैं.

बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी की जरूरत

बरसात के दौरान विशेष सतर्कता बरतने और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचने की अपील की गयी है. विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को बरसात के मौसम में खान-पान को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहने की आवश्यकता है.

धूल और प्रदूषण से सांस की नली पर असर

सीएचसी प्रभारी डॉ. संजीव कुमार के अनुसार, बारिश के बीच धूल और प्रदूषण भी स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है. वातावरण में मौजूद धूल के सूक्ष्म कण सांस के जरिये शरीर में पहुंचकर गले में खराश, खांसी और एलर्जी जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं.

धूल और प्रदूषण वाले स्थानों पर खाने से बचें

डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि धूल और प्रदूषण वाले स्थानों पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों को खाने से परहेज करना चाहिए.

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