पितृपक्ष को लेकर चेनारी में तैयारी तेज, 27 सितंबर से शुरू होंगे श्राद्ध और तर्पण के अनुष्ठान

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चेनारी में पितृपक्ष की तैयारियां शुरू हो गयी हैं. 27 सितंबर से शुरू होने वाले इस पर्व में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण किए जाएंगे.

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प्रतिनिधि, चेनारी. हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने के लिए मनाए जाने वाले पितृपक्ष की शुरुआत इस वर्ष 27 सितंबर से होगी. इसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा. चेनारी प्रखंड क्षेत्र में भी पितृपक्ष को लेकर तैयारियां शुरू हो गयी हैं.

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श्राद्ध और तर्पण की तैयारी में जुटे लोग

लोग अपने पूर्वजों की पुण्यतिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान की तैयारी कर रहे हैं. पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए श्राद्ध, पिंडदान, तर्पण और दान-पुण्य करने की धार्मिक परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में पितरों के निमित्त जल, अन्न और अन्य सामग्री अर्पित करने से उन्हें तृप्ति प्राप्त होती है.

पूर्वजों के स्मरण के साथ होंगे धार्मिक कार्य

मान्यता है कि पूर्वजों की प्रसन्नता से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और कल्याण बना रहता है. इसी आस्था के कारण चेनारी प्रखंड के विभिन्न गांवों में लोग अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए निर्धारित तिथि पर श्राद्ध कर्म संपन्न करेंगे. पितृपक्ष को लेकर बाजार में भी बर्तन सहित पूजा-पाठ से जुड़ी सामग्री की दुकानें सजने लगी हैं.

खान-पान और आचरण में संयम की परंपरा

आचार्य पं. विंध्याचल ओझा ने बताया कि पितृपक्ष में श्रद्धालुओं को खान-पान और दैनिक आचरण में संयम बरतना चाहिए. इस दौरान सात्विक और शाकाहारी भोजन करने की धार्मिक परंपरा है. बाल कटवाने से भी परहेज किया जाता है. पितृपक्ष के दौरान विवाह, गृहप्रवेश सहित अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. इस अवधि में धार्मिक कार्यों और पूर्वजों के स्मरण को विशेष महत्व दिया जाता है.

विधि-विधान से श्राद्ध का विशेष महत्व

पितृपक्ष में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान की विशेष परंपरा है. आचार्य के अनुसार श्राद्ध सामान्यतः दोपहर के समय कुतुप काल में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके किया जाता है. तांबे के पात्र में जल, काले तिल, गंगाजल और दूध मिलाकर पितरों को तर्पण अर्पित किया जाता है. इसके बाद जौ अथवा चावल के आटे से पिंड तैयार कर पिंडदान किया जाता है.

पंचबलि और दान-पुण्य की परंपरा

श्राद्ध कर्म के दौरान सात्विक भोजन तैयार कर पंचबलि के रूप में गाय, कौवा, कुत्ता, देवता और चींटियों के लिए भोजन निकाला जाता है. इसके साथ ही ब्राह्मण भोजन कराने और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र आदि दान करने की भी परंपरा है.

10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या

10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या होगी. इस दिन उन पूर्वजों के लिए भी श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, जिनकी पुण्यतिथि ज्ञात नहीं होती या निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाता. चेनारी प्रखंड क्षेत्र में भी लोग इस दिन ज्ञात-अज्ञात सभी पूर्वजों का स्मरण कर तर्पण और दान-पुण्य करेंगे.

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