सासाराम में चार जगहों के प्रभार में नोखा के बीईओ, स्कूलों की नियमित निगरानी पर पड़ रहा असर
फोटो कैप्शन: बीआरसी भवन, नोखा का दृश्य | Prabhat Khabar Network
नोखा के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी पर चार प्रखंडों की अतिरिक्त जिम्मेदारी है, जिससे स्कूलों के निरीक्षण और शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी में चुनौती आ रही है. शिक्षकों और अभिभावकों ने स्थायी बीईओ की मांग की है.
प्रतिनिधि, नोखा. नोखा प्रखंड की शिक्षा व्यवस्था इन दिनों अतिरिक्त प्रभार के बोझ से प्रभावित हो रही है. नोखा के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुमन कुमार श्रीवास्तव के पास नोखा के अलावा राजपुर, अकोढ़ीगोला और डेहरी का भी अतिरिक्त प्रभार है. चार जगहों की जिम्मेदारी होने से अलग-अलग प्रखंडों की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था संभालने की चुनौती बनी हुई है.
स्कूलों के नियमित निरीक्षण पर असर
अतिरिक्त प्रभार के कारण नोखा प्रखंड के सरकारी विद्यालयों के नियमित निरीक्षण और शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी प्रभावित होने की बात सामने आ रही है. एक अधिकारी को कई प्रखंडों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है, जिससे सभी विद्यालयों तक नियमित रूप से पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो रहा है.
शिक्षकों की उपस्थिति से योजनाओं तक की निगरानी
विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति, बच्चों की पढ़ाई, मध्याह्न भोजन, नामांकन, शैक्षणिक गतिविधियों और विभागीय योजनाओं की नियमित जांच के लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता होती है. कई प्रखंडों का प्रभार होने के कारण इन सभी बिंदुओं की नियमित समीक्षा में समय और कार्यभार की चुनौती बनी हुई है.
मॉनिटरिंग व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका
विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित निरीक्षण और अधिकारियों की मौजूदगी महत्वपूर्ण मानी जाती है. निरीक्षण के दौरान स्कूलों की कमियों की पहचान कर तत्काल सुधार के निर्देश दिये जाते हैं. ऐसे में अतिरिक्त प्रभार के कारण स्कूलों की मॉनिटरिंग व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जतायी जा रही है.
अलग-अलग प्रखंडों की जिम्मेदारी बनी चुनौती
बीईओ को नोखा के साथ राजपुर, अकोढ़ीगोला और डेहरी की प्रशासनिक और शैक्षणिक जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ रही हैं. अलग-अलग प्रखंडों में कार्यालयीय कार्य और विद्यालयों के निरीक्षण के बीच समय का संतुलन बनाना उनके लिए चुनौती बना हुआ है.
स्थायी बीईओ की मांग
शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि नोखा जैसे बड़े प्रखंड में शिक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी के लिए अलग से स्थायी बीईओ की व्यवस्था होनी चाहिए. उनका कहना है कि इससे विद्यालयों का निरीक्षण नियमित रूप से हो सकेगा और शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.
वरीय अधिकारियों को कराया जाएगा अवगत
प्रखंड विकास पदाधिकारी शेफाली ने बताया कि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के पास अतिरिक्त प्रभार होने के कारण विद्यालयों की नियमित निगरानी प्रभावित नहीं होनी चाहिए. स्कूलों में निरीक्षण, शिक्षकों की उपस्थिति और शैक्षणिक व्यवस्था की नियमित समीक्षा जरूरी है. उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिए वरीय अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा.
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