सारण: बाढ़ का पानी उतरा, पर कीचड़ में अटकी जिंदगी; घर संवारने से लेकर रोजी-रोटी के इंतजाम में जुटे लोग
नोट: फोटो नंबर 11 सीएचपी 13 है कैप्सन होगा- रिविलगंज में बना चिकित्सा शिविर | Prabhat Khabar Network
सारण में बाढ़ का पानी भले ही धीरे-धीरे उतर रहा हो, लेकिन कीचड़ और जलजमाव ने लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है. ग्रामीण टूटे आशियानों को फिर से बनाने और मछुआरे रोजी-रोटी के लिए नए जाल बुनने में लगे हैं. खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं.
Saran News : सारण में नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन बाढ़ का असर अभी भी गांवों में साफ दिखाई दे रहा है. सरयू नदी का पानी पूरी तरह नहीं उतरा है. सिसवन में सरयू खतरे के निशान से 19 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है और पिछले 72 घंटे से जलस्तर लगभग स्थिर है. गंगा का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर रहने के कारण छपरा में सरयू के जलस्तर में तेजी से गिरावट नहीं हो पा रही है.
जहां पानी कम हुआ है, वहां अब लोगों की जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगी है. कोई खर और मिट्टी से अपना टूटा आशियाना फिर तैयार कर रहा है, तो कोई मछली पकड़ने के लिए नया जाल बुनकर दो जून की रोटी का इंतजाम करने में जुट गया है. खेतों में अभी पानी जमा है और फसलें बर्बाद हो चुकी हैं. गांवों की गलियों और रास्तों पर कीचड़ परेशानी बढ़ा रहा है.
खर-मिट्टी से फिर तैयार हो रहा आशियाना
छपरा शहर से सटे दिलिया रहीमपुर पंचायत में बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित परिवार अपने घरों को फिर से रहने लायक बनाने में जुटे हैं. कहीं लोग खर से घर तैयार कर रहे हैं, तो कहीं मिट्टी से दीवारों की मरम्मत की जा रही है. लंबे समय तक पानी में डूबे रहने के कारण घरों को काफी नुकसान पहुंचा है.
लाखों के जाल सड़े, फिर सपने बुन रहे मछुआरे
बाढ़ से ग्रामीणों की रोजी-रोटी पर भी बड़ा असर पड़ा है. फसलें डूब गयीं, कई लोगों का काम बंद हो गया और पशुओं से होने वाली आय भी प्रभावित हुई. मछली पालन करने वालों के जाल भी लंबे समय तक पानी में पड़े रहने से सड़ गये.
अब पानी कम होने के साथ ग्रामीण फिर से जाल तैयार करने में जुट गये हैं. उनका प्रयास है कि मछली पकड़कर और पालन कर किसी तरह परिवार की रोजी-रोटी चलायी जा सके.
खेतों में नाव चला रहे बच्चे
सरयू का पानी अभी खेतों में जमा है. फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, लेकिन गांव के बच्चे इसी पानी में नाव चलाकर मनोरंजन करते नजर आ रहे हैं. एक नाव पर कई बच्चों को बैठकर दूर तक जाते देखा गया. हालांकि, बाढ़ के पानी में इस तरह नाव चलाना बच्चों के लिए जोखिम भरा हो सकता है.
पानी निकले तो पता चला, फसल हो चुकी बर्बाद
किसानों को उम्मीद थी कि नदी का पानी जल्द खेतों से निकल जायेगा, लेकिन जलस्तर स्थिर रहने के कारण खेतों में अभी भी पानी जमा है. सब्जियों की फसल को भारी नुकसान हुआ है, जबकि मक्का सहित अन्य फसलें भी बर्बाद हो चुकी हैं. अब किसान पानी पूरी तरह निकलने का इंतजार कर रहे हैं.
छोटी नदी लबालब, जान टोला का आवागमन प्रभावित
शहर से सटे जान टोला में सरयू की वितरणी में भी अभी पानी का तेज बहाव है. ग्रामीणों के अनुसार, करीब 35 वर्षों से इस छोटी नदी में पानी नहीं आया था. लोगों ने नदी के हिस्से को भरकर आने-जाने का रास्ता बना लिया था. बाढ़ के कारण नदी में पानी आने से यह रास्ता बंद हो गया है और पूरे गांव का आवागमन प्रभावित है.
स्वास्थ्य विभाग की टीम अब भी मुस्तैद
बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी लगातार सक्रिय हैं. रिविलगंज में चिकित्सा शिविर लगाकर लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं. पानी उतरने के बाद भी कीचड़ और जलजमाव के कारण बीमारियों का खतरा बना हुआ है.
पशुओं के लिए अब भी पुल-पुलिया ही सहारा
जलस्तर में कमी के बावजूद कई इलाकों में कीचड़ और जलजमाव बना हुआ है. ऐसे में पशुओं को घरों के आसपास रखना मुश्किल हो रहा है. जान टोला पुल सहित अन्य ऊंचे स्थानों पर लोग अपने पशुओं को आश्रय दे रहे हैं.
अभी लबालब है छपरा का सरयू नदी क्षेत्र
बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल की 11 सितंबर की सुबह सात बजे की रिपोर्ट के अनुसार, छपरा में घाघरा का जलस्तर 52.45 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 53.68 मीटर से 1.20 मीटर नीचे है. यहां 13 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गयी.
सिसवन में घाघरा का जलस्तर 57.23 मीटर है, जबकि खतरे का निशान 57.04 मीटर है. यहां पानी 19 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है और पिछले 72 घंटे से जलस्तर स्थिर बना हुआ है.
हाजीपुर में गंडक का जलस्तर 49.95 मीटर है, जो खतरे के निशान से 37 सेंटीमीटर नीचे है. यहां 10 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गयी. रेवा में गंडक 53.36 मीटर पर है और यहां 13 सेंटीमीटर की कमी आयी है.
गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 49.82 मीटर दर्ज किया गया है. यहां 15 सेंटीमीटर की कमी हुई है, लेकिन जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से करीब 1.20 मीटर ऊपर है.
तीन-चार दिनों में तेजी से घट सकता है पानी
बाढ़ प्रमंडल, सारण के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर ने बताया कि सिसवन में सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है. वहीं गंगा का जलस्तर भी काफी ऊंचा है. इसका असर छपरा में सरयू के जलस्तर पर पड़ रहा है, जिसके कारण यहां पानी तेजी से नहीं घट रहा है.
उन्होंने बताया कि अगले तीन से चार दिनों में जलस्तर में तेजी से गिरावट आने की उम्मीद है. इसके बाद खेतों में पसरा पानी भी तेजी से निकलने लगेगा. फिलहाल स्थिति सामान्य है और कहीं किसी तरह का खतरा नहीं है.
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