छपरा में जल संचय योजना पर फिरा पानी: 200 से अधिक कुएं व तालाब अतिक्रमण के शिकार, निगम के नक्शे से गायब हुए जलस्रोत
अतिक्रमण का शिकार कुआं.
Saran Water Conservation Scheme: छपरा नगर निगम क्षेत्र में भूमिगत जल स्तर को रीचार्ज करने की महत्वाकांक्षी योजनाएं दम तोड़ रही हैं. बारिश के पानी को सहेजने वाले पारंपरिक कुएं और तालाब गंभीर अतिक्रमण की चपेट में आ गए हैं. सरकारी नक्शों पर 700 कुओं में से धरातल पर मात्र 297 ही मिले हैं, जबकि 200 से अधिक पर पक्के निर्माण हो गए हैं.
Saran Water Conservation Scheme: छपरा नगर निगम क्षेत्र में भूमिगत जल स्तर (ग्राउंड वाटर) को रीचार्ज करने की महत्वाकांक्षी योजनाएं धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं. वर्षा जल संचयन और भूजल स्तर बनाए रखने के मुख्य साधन रहे पारंपरिक कुएं और तालाब आज गंभीर अतिक्रमण की चपेट में हैं. स्थिति यह है कि शहर में 200 से अधिक ऐतिहासिक कुओं और तालाबों पर कहीं बहुमंजिला पक्के मकान तन गए हैं, तो कई को लोगों ने अवैध रूप से अपनी चारदीवारी (बाउंड्री) के भीतर कैद कर लिया है.
नक्शे पर 700 कुएं, धरातल पर मिले मात्र 297
केंद्र और राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2021 में शहरी जलस्रोतों के जीर्णोद्धार के लिए शुरू की गई योजना के तहत जब सर्वे कराया गया, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए:
- नक्शे में मौजूदगी: सरकारी अभिलेखों और नक्शों के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में लगभग 700 कुएं दर्ज थे.
- सर्वे में मिले: भौतिक सत्यापन के दौरान अधिकारियों को धरातल पर केवल 297 कुएं ही मिल सके.
- गायब व अतिक्रमित: लगभग 200 कुओं को या तो पूरी तरह पाटकर जमींदोज कर दिया गया है या वे अवैध कब्जे में चले गए हैं.
- अधूरी मरम्मत: सर्वे सूची में शामिल 260 कुओं की मरम्मत का दावा किया गया, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार यह कार्य केवल खानापूर्ति और लीपापोती तक सीमित रहा.
जीपीएस सर्वे और वार्ड पार्षदों की सूची भी बेअसर
'जल-जीवन-हरियाली' अभियान के तहत तत्कालीन नगर आयुक्त सुमित कुमार ने कार्यपालक अभियंता के नेतृत्व में अभियंताओं की विशेष टीमें गठित कर सभी 45 वार्डों में जीपीएस सर्वे कराने का निर्देश दिया था. इसके तहत 180 कुओं का जीपीएस सर्वे पूरा कर शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का दावा किया गया, जो अधूरा रह गया. सभी वार्ड पार्षदों (आयुक्तों) से जर्जर सोखता और कुओं की सूची मांगी गई थी, लेकिन सटीक जानकारी के अभाव में यह अभियान भी फाइलों में सिमट कर रह गया.
कुआं जीर्णोद्धार के तय मानक और योजना
योजना के तहत कुओं को पुनर्जीवित करने के लिए निम्नलिखित कार्य निर्धारित किए गए थे:
- कुएं की आंतरिक और बाहरी सतह पर मजबूत प्लास्टर एवं रंग-रोगन.
- सुरक्षा की दृष्टि से कुएं के ऊपरी हिस्से पर लोहे की जाली (ग्रिलिंग) लगाना.
- दूषित जल के निपटारे के लिए निकट सोखता गड्ढे का निर्माण.
- कुएं में जलस्रोत को दोबारा सक्रिय करना और कीटाणुशोधन के लिए केमिकल का छिड़काव.
दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई: महापौर
नगर निगम क्षेत्र में पारंपरिक जलस्रोतों के अतिक्रमण और कथित मरम्मत घोटाले पर कड़ा रुख अपनाते हुए महापौर ने जांच का आश्वासन दिया है.
"जलस्रोतों पर कब्जे और जीर्णोद्धार में बरती गई लापरवाही के मामले को मैं स्वयं गंभीरता से देख रहा हूं. आगामी दो से तीन दिनों के भीतर शहर के विभिन्न वार्डों में जाकर कुओं की जमीनी स्थिति का औचक भौतिक निरीक्षण किया जाएगा. जहां भी अतिक्रमण या कार्य में अनियमितता पाई जाएगी, वहां दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित होगी." — लक्ष्मी नारायण गुप्ता, महापौर, नगर निगम छपरा
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