सारण: लाइफलाइन से 'डेथ प्वाइंट' बना रेवा घाट पुल, 2 माह में 4 लोगों ने गंडक में लगाई छलांग; अंधेरे व सुरक्षा खामियों के बीच सुसाइड जोन में तब्दील
छपरा मुजफ्फरपुर एन एच 722 स्थित रेवा गंडक पुल। | Prabhat Khabar Network
सारण का ऐतिहासिक रेवा घाट पुल अब 'डेथ प्वाइंट' और 'सुसाइड जोन' बनता जा रहा है. मात्र दो महीनों में चार लोगों द्वारा पुल से छलांग लगाने की घटनाओं ने स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को गहरी चिंता में डाल दिया है. पुल पर शाम ढलते ही छाए अंधेरे और सुरक्षा व्यवस्था की खामियों ने इसे और भी खतरनाक बना दिया है.
Saran News: छपरा-मुजफ्फरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 722 (NH-722) पर गंडक नदी पर बना ऐतिहासिक स्वर्गीय दरोगा प्रसाद राय सेतु (रेवा घाट पुल) इन दिनों आवागमन की लाइफलाइन से ज्यादा 'डेथ प्वाइंट' और 'सुसाइड जोन' के रूप में कुख्यात होता जा रहा है. बीते कुछ समय में इस पुल से छलांग लगाकर आत्महत्या करने के मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है. केवल पिछले दो महीनों के भीतर ही गंडक नदी में कूदने की चार गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे पुल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय नागरिकों और प्रशासन में गहरी चिंता है.
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दो माह में 4 घटनाएं: कहीं मौत तो कहीं अब भी तलाश जारी
पुल से नदी में कूदने की हालिया घटनाओं ने पूरे इलाके को दहला कर रख दिया है:
- 2 जुलाई: परसा थाना क्षेत्र के बनाकेरवा निवासी अंजू कुमारी ने आत्महत्या की नीयत से छलांग लगाई थी, जिन्हें स्थानीय नाविकों की सूझबूझ से सुरक्षित बचा लिया गया.
- 30 जुलाई: अमनौर थाना क्षेत्र के ढोलाही कैथल गांव निवासी 25 वर्षीय उत्तम कुमार ने नदी में छलांग लगा दी, जिससे डूबने से उनकी दर्दनाक मौत हो गई.
- 26 अगस्त: संगीत शिक्षक शेखर सुमन ने पारिवारिक/मानसिक तनाव में आकर पुल से कूदकर अपनी जान दे दी.
- 29 अगस्त: वैशाली जिले के बेलवर निवासी 22 वर्षीय युवक अभिषेक साह ने छलांग लगा दी, जिनका शव एनडीआरएफ व स्थानीय गोताखोरों द्वारा अब तक बरामद नहीं किया जा सका है.
शाम होते ही छा जाता है घना अंधेरा, सीसीटीवी कैमरे भी नदारद
चार दशक पूर्व निर्मित इस अत्यंत व्यस्त पुल पर आज तक प्रकाश (स्ट्रीट लाइट) की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी है. शाम ढलते ही 31 पिलरों पर टिका यह लंबा पुल घने अंधेरे में डूब जाता है. अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व, अपराधी और अवसादग्रस्त लोग यहां पहुंच रहे हैं. आधुनिक दौर में जहां संवेदनशील ब्रिजों पर हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, वहीं रेवा घाट पुल पर कैमरों की गैर-मौजूदगी के कारण घटनाओं को समय रहते रोकना असंभव साबित हो रहा है.

आधा दर्जन जिलों का जुड़ाव, सीमा विवाद और नाकाफी सुरक्षा
रेवा घाट पुल से प्रतिदिन सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, बेतिया और मोतिहारी के हजारों छोटे-बड़े वाहन और बालू लदे भारी ट्रक गुजरते हैं. इसके बावजूद सारण और मुजफ्फरपुर दोनों जिलों के बीच सटीक सीमांकन (15वें पिलर को काल्पनिक सीमा माना जाता है) को लेकर असमंजस बना रहता है. पूर्व में सरैया थाने का बड़ा पुलिस चेक पोस्ट बंद होने के बाद अब केवल एक छोटा नाका व उत्पाद विभाग का संयुक्त दस्ता ही तैनात है, जो पुल की प्रभावी निगरानी के लिए पूरी तरह नाकाफी है.
स्थानीय नागरिकों ने की सुरक्षा इंतजामों की मांग
स्थानीय ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों ने सारण व मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन तथा पथ निर्माण विभाग से मांग की है कि पुल पर दोनों तरफ ऊंची सुरक्षा जालियां/रेलिंग लगाई जाएं, हाई-मास्ट व स्ट्रीट लाइटें दुरुस्त की जाएं, पीटीजेड सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और दोनों छोरों पर 24 घंटे स्थायी पुलिस पिकेट की तैनाती की जाए ताकि अनमोल जिंदगियों को बचाया जा सके.
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