जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति को हाईकोर्ट से झटका, प्रतिनियुक्ति आदेश रद्द
जयप्रकाश विश्वविद्यालय
पटना हाईकोर्ट ने जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति के प्रतिनियुक्ति आदेशों को रद्द कर दिया है. डॉ. रवि प्रकाश बबलू की मशरख राजकीय डिग्री महाविद्यालय में प्रभारी प्राचार्य पद पर प्रतिनियुक्ति को असहमति के बावजूद जारी किया गया था. कोर्ट ने सहमति के बिना हुई इस प्रतिनियुक्ति को अवैध करार दिया है.
Jai Prakash University: सारण जिले के नवस्थापित डिग्री महाविद्यालयों में प्रभारी प्राचार्य के पद पर शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति से जुड़े मामले में पटना हाईकोर्ट ने जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति के आदेश को रद्द कर दिया है. न्यायालय ने डॉ. रवि प्रकाश बबलू से संबंधित प्रतिनियुक्ति की दोनों अधिसूचनाओं को निरस्त कर दिया.
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मामला राम जयपाल कॉलेज में कार्यरत डॉ. रवि प्रकाश बबलू की प्रतिनियुक्ति से जुड़ा है. याचिका के अनुसार, विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें राजकीय डिग्री महाविद्यालय, मशरख में प्रभारी प्राचार्य के पद पर प्रतिनियुक्त किया गया था. डॉ. बबलू ने इस प्रतिनियुक्ति पर अपनी असहमति व्यक्त की थी.
सहमति के बिना प्रतिनियुक्ति का उठाया गया मुद्दा
डॉ. रवि प्रकाश बबलू ने अपने अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश के माध्यम से हाईकोर्ट में मुकदमा संख्या 9715/2026 दायर कर विश्वविद्यालय की दोनों अधिसूचनाओं को चुनौती दी. याचिका में विभिन्न कानूनी प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए तर्क दिया गया कि शिक्षक की सहमति के बिना इस तरह की प्रतिनियुक्ति नहीं की जा सकती.
बताया गया कि कुलपति की ओर से पहले पत्रांक 5343, दिनांक 27 मई 2026 के माध्यम से आदेश जारी किया गया था. इसके बाद 4 जून 2026 को पत्रांक 5362 (आर) के जरिए संशोधित अधिसूचना जारी कर डॉ. बबलू को राजकीय डिग्री महाविद्यालय, मशरख भेजने का आदेश दिया गया.
जिस व्यवस्था के लिए बनी थी समिति, उसी के उल्लंघन का आरोप
याचिका में यह भी मुद्दा उठाया गया कि प्रभारी प्राचार्य के पद पर प्रतिनियुक्ति से संबंधित कानूनी प्रावधान तैयार करने के लिए कुलाधिपति की ओर से तीन सदस्यीय समिति गठित की गयी थी. इस समिति में डॉ. परमेंद्र कुमार बाजपेयी, कुलपति भी सदस्य थे.
याचिका के अनुसार, समिति द्वारा तैयार प्रारूप के आधार पर कुलाधिपति ने महाविद्यालयों में प्राचार्य की नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति से संबंधित अधिसूचना 3 मई 2024 को जारी की थी. आरोप लगाया गया कि बाद में जारी प्रतिनियुक्ति आदेश में इसी व्यवस्था का पालन नहीं किया गया.
28 अगस्त को हुई सुनवाई, 1 सितंबर को आया फैसला
मामले में न्यायमूर्ति हरीश कुमार ने 28 अगस्त 2026 को सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला 1 सितंबर 2026 को सुनाने के लिए सुरक्षित रखा था. 1 सितंबर को फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने डॉ. रवि प्रकाश बबलू से संबंधित कुलपति की दोनों अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया.
याचिका में जिन आदेशों को चुनौती दी गयी थी, उन्हें न्यायालय द्वारा गैरकानूनी माने जाने की बात सामने आयी है.
वेतन रोकने और उपस्थिति दर्ज नहीं करने का आदेश भी रद्द
मामले में यह भी आरोप लगाया गया था कि कुलपति के आदेश का पालन नहीं करने और न्यायालय की शरण लेने वाले कुछ शिक्षकों का जून 2026 से वेतन रोक दिया गया था. साथ ही उनकी उपस्थिति दर्ज करने पर भी रोक लगा दी गयी थी.
हाईकोर्ट ने ऐसे आदेशों को भी रद्द कर दिया है. फैसले के बाद संबंधित शिक्षकों को राहत मिलने की बात कही जा रही है.
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