गंगा-सरयू में राहत के बाद गंडक ने बढ़ाई चिंता: रेवा घाट पर 28 सेमी बढ़ा जलस्तर, सारण में अलर्ट जारी
जल स्तर का निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारी, लगातार घट रहा है गंगा और सरयू काजलस्तर.
सारण में गंडक नदी के जलस्तर में एकाएक हुई वृद्धि ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. गंगा और सरयू में कमी के बीच गंडक के रेवा घाट पर 28 सेमी जलस्तर बढ़ने के बाद बाढ़ प्रमंडल अलर्ट मोड पर है. संभावित प्रभावित प्रखंडों में सतर्कता बढ़ा दी गई है.
सारण में गंगा और सरयू के जलस्तर में कमी के बीच अब गंडक नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. गंडक के रेवा घाट पर मंगलवार को एक ही दिन में 28 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गयी. जलस्तर में बढ़ोतरी को देखते हुए बाढ़ प्रमंडल के अधिकारियों ने जिले के संभावित प्रभावित प्रखंडों में तटबंधों और नदी घाटों की रात्रि पेट्रोलिंग बढ़ा दी है.
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जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने भी सभी संबंधित विभागों और एजेंसियों को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया है. उन्होंने बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर राहत एवं बचाव कार्य में किसी तरह की परेशानी नहीं हो, इसके लिए सड़क, पुल-पुलिया, पेयजल, शरणस्थली और नावों की व्यवस्था को दुरुस्त रखने का आदेश दिया है.
गंडक बढ़ा तो इन प्रखंडों पर पड़ सकता है असर
गंडक नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी होने की स्थिति में सारण के पानापुर, मकेर, अमनौर, तरैया, दरियापुर और सोनपुर सहित जिले के पूर्वी एवं उत्तरी प्रखंड प्रभावित हो सकते हैं. इसे देखते हुए बाढ़ प्रमंडल के अधिकारियों ने तटबंधों और नदी घाटों की निगरानी तेज कर दी है.
अधिकारियों की टीम रात में भी संवेदनशील स्थानों पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रही है.
सड़क, पुल और पुलिया दुरुस्त रखने का निर्देश
बाढ़ की स्थिति में प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने और बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा नहीं आये, इसके लिए जिलाधिकारी ने जिले की सड़कों को दुरुस्त रखने का निर्देश दिया है. पथ प्रमंडल छपरा, ग्रामीण कार्य विभाग तथा राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल छपरा के अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र की सड़कों, पुलों और पुलियों की स्थिति पर नजर रखने को कहा गया है.
प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की रहेगी व्यवस्था
बाढ़ प्रभावित इलाकों में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में लोक स्वास्थ्य प्रमंडल को जिम्मेदारी दी गयी है. वहीं शहरी क्षेत्र में नगर आयुक्त, नगर निगम को चापाकलों की मरम्मत कराने तथा चयनित शरणस्थलों पर जरूरत के अनुसार अस्थायी या नये चापाकल लगाने का निर्देश दिया गया है.
ऊंचे स्थानों पर बनाये जा रहे शरणस्थल
बाढ़ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए पहले से शरणस्थलों का चयन किया गया है. इनमें स्कूल भवन, पंचायत भवन, सामुदायिक भवन और अन्य ऊंचे स्थान शामिल हैं.
प्रशासन ने सभी चयनित शरणस्थलों पर भवन, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.
निजी और सरकारी नावों को तैयार रखने का निर्देश
सभी अंचल अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में उपलब्ध निजी नावों और नाविकों की सूची तैयार रखने को कहा गया है. जरूरत पड़ने पर तत्काल नावों का परिचालन शुरू किया जा सके, इसके लिए संवेदनशील स्थलों की भी पहचान करने का निर्देश दिया गया है.
इसके अलावा सरकारी नावों और मोटरबोट को भी चालू हालत में रखने को कहा गया है.
गंगा और सरयू के जलस्तर में कमी से राहत
25 अगस्त को बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार गंगा और सरयू के जलस्तर में कमी दर्ज की गयी है. गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 49.54 मीटर दर्ज किया गया, जो पिछले दिन की तुलना में तीन सेंटीमीटर कम है.
छपरा में घाघरा का जलस्तर 51.91 मीटर रहा. यहां 13 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गयी. वहीं सिसवन में घाघरा का जलस्तर 56.63 मीटर रहा, जिसमें 11 सेंटीमीटर की कमी आयी है.
गंडक हाजीपुर में जलस्तर 49.59 मीटर दर्ज किया गया, जो सोमवार के मुकाबले तीन सेंटीमीटर कम है. हालांकि, गंडक के रेवा घाट पर जलस्तर 53.63 मीटर पहुंच गया है और यहां 28 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है.
सारण में नदियों का जलस्तर : 25 अगस्त 2026
| नदी | खतरे का निशान | वर्तमान जलस्तर | स्थिति |
| गंगा, गांधी घाट | 48.60 मीटर | 49.54 मीटर | 3 सेमी कमी |
| गंडक, हाजीपुर | 50.32 मीटर | 49.59 मीटर | 3 सेमी कमी |
| गंडक, रेवा | 54.41 मीटर | 53.63 मीटर | 28 सेमी वृद्धि |
| सरयू/घाघरा, सिसवन | 57.04 मीटर | 56.63 मीटर | 11 सेमी कमी |
| घाघरा, छपरा | 53.68 मीटर | 51.91 मीटर | 13 सेमी कमी |
रात्रि पेट्रोलिंग जारी, गंडक पर प्रशासन की नजर
बाढ़ प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता संतोष प्रभाकर ने बताया कि रेवा घाट पर गंडक नदी के जलस्तर में मंगलवार को 28 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने कहा कि फिलहाल इसे चिंता का विषय नहीं माना जा रहा है. दो-तीन दिनों तक जलस्तर में बढ़ोतरी के बाद इसके कम होने की संभावना है.
उन्होंने बताया कि तटबंधों और नदी घाटों पर रात्रि पेट्रोलिंग जारी है. गंगा का जलस्तर स्थिर हो गया है, जबकि अन्य नदियों में कमी देखी जा रही है. फिलहाल प्रशासन की नजर मुख्य रूप से गंडक नदी के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर है.
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