छपरा में पूर्व DPO के सरकारी आवास पर 9 घंटे EOU की रेड, ₹27 लाख वेतन के बीच खातों में मिले ₹2.51 करोड़; 120 कट्ठा जमीन भी जांच के घेरे में
छपरा में पूर्व DPO के सरकारी आवास पर EOU की रेड, सांकेतिक तस्वीर। AI
आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने छपरा के पूर्व जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा) अजीत अमर हरिजन के सरकारी आवास पर 9 घंटे तक छापेमारी की. ₹27 लाख के वेतन पर ₹2.51 करोड़ बैंक खातों में जमा पाए गए, जो आय से कई गुना अधिक है. पत्नी के नाम पर खरीदी गई 120 कट्ठा (6 बीघा से अधिक) जमीन भी जांच के दायरे में है.
EOU Raid In Saran: सारण के पूर्व जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा) अजीत अमर हरिजन के छपरा शहर के गंडक कॉलोनी स्थित सरकारी आवास पर शुक्रवार सुबह 7:00 बजे आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की 10 सदस्यीय टीम ने पुलिस बल के साथ दबिश दी. सुबह 10:00 बजे से आवास में मौजूद लोगों से शुरू हुई पूछताछ और छापेमारी शाम 3:00 बजे तक (लगभग 9 घंटे) जारी रही. हालांकि, कार्रवाई में क्या कुछ जब्त हुआ, इस पर EOU के अधिकारियों ने फिलहाल कुछ भी कहने से इनकार करते हुए बताया कि जल्द ही प्रेस विज्ञप्ति के जरिए आधिकारिक जानकारी दी जाएगी. EOU की रेड की खबर फैलते ही शिक्षा विभाग के दफ्तर में दिनभर हड़कंप और फुसफुसाहट का माहौल बना रहा.
वेतन 27 लाख और खाते में आए 2.51 करोड़ रुपये
पूर्व में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी के आदेश पर उप विकास आयुक्त (DDC), वरीय कोषागार पदाधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) और कार्यपालक अभियंता (LAEO-1) की 6 सदस्यीय जांच टीम गठित की गई थी.
जांच रिपोर्ट में उजागर हुआ कि 1 अगस्त 2023 से 28 अप्रैल 2026 तक (32 माह) के दौरान अजीत कुमार हरिजन का कुल वेतन ₹27,43,040 होता है, जबकि इस अवधि में उनके और उनकी पत्नी के बैंक खातों में ₹2,51,06,562 जमा किए गए. यह उनकी वैध आय से कई गुना अधिक (आय से अधिक संपत्ति) पाया गया.
पत्नी के नाम पर खरीदी 120 कट्ठा (6 बीघा से अधिक) जमीन
जांच रिपोर्ट के अनुसार, डीपीओ ने अपनी सेवा अवधि के बेहद कम समय में पत्नी पूजा कुमारी के नाम पर ₹41.50 लाख मूल्य की 6 बीघा 09 कट्ठा 08 धूर (लगभग 120 कट्ठा) जमीन खरीदी. जांच टीम ने डीपीओ, उनकी पत्नी, अन्य परिजनों और करीबियों के सभी बैंक खातों और बेनामी संपत्तियों की गहन जांच अवर निबंधन पदाधिकारी और सक्षम प्राधिकार से कराने की अनुशंसा की थी.
ऐसे हुआ घूसखोरी का पर्दाफाश: वेंडर ने लोक शिकायत में दर्ज कराया था मामला
एकमा प्रखंड के कर्णपुरा गांव निवासी संवेदक (वेंडर) रवि कुमार राम ने जिला लोक शिकायत निवारण कोषांग में परिवाद दर्ज कराया था. संवेदक के अनुसार:
- डीपीओ अजीत अमर हरिजन ने जिले में बड़े पैमाने पर काम दिलाने के नाम पर ₹12,50,000 की रिश्वत मांगी थी.
- संवेदक ने ₹10.70 लाख नकद और ₹1,03,480 रिश्तेदारों व परिजनों के मोबाइल नंबरों पर डिजिटल मोड में ट्रांसफर किए.
- पैसे लेने के बाद भी जब काम नहीं मिला और संवेदक ने रकम वापस मांगी, तो डीपीओ टालमटोल करने लगे. दबाव बनाने पर डीपीओ ने ₹1,53,800 ऑनलाइन लौटाए, लेकिन शेष ₹10,79,680 नकद मांगने पर संवेदक को ब्लैकलिस्ट करने और धमकी देने लगे.
इन खातों में मंगाए गए थे डिजिटल पैसे
जांच में सामने आया कि बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए संवेदक से रिश्तेदारों और कर्मचारियों के खातों में डिजिटल भुगतान लिया गया था:
- पूजा कुमारी (पत्नी): ₹30,000 (26.03.2024)
- गुड्डू हरिजन (भाई): ₹800 (22.06.2024)
- रविकांत राम (साला): ₹5,100 (दो किस्तों में)
- काजल कुमारी (भतीजी): 25 से अधिक ट्रांजैक्शन के जरिए लगभग ₹2,00,000
- योगेन्द्र मांझी (तत्कालीन ड्राइवर): 3 ट्रांजैक्शन में ₹10,000 से अधिक
लोक शिकायत निवारण कोषांग ने भी माना था दोषी
जिला लोक शिकायत निवारण कोषांग ने अपने आदेश में डीपीओ अजीत अमर हरिजन को सरकारी सेवक आचार नियमावली के उल्लंघन और भ्रष्टाचार का स्पष्ट दोषी पाया था. साथ ही कोषांग ने यह भी टिप्पणी की थी कि लोक सेवक को प्रभावित करने के लिए रिश्वत देने के कारण परिवादी (संवेदक) भी दोषी है और उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए.
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