सारण से सहरसा तक गूंजेगा पर्यावरण संरक्षण का संदेश, राज्यस्तरीय नाट्योत्सव में छपरा इप्टा के ‘द लास्ट क्राई’ का चयन
नाटक के लिए चयनित टीम | Prabhat Khabar Network
छपरा इप्टा के नाटक ‘द लास्ट क्राई’ का चयन बिहार के राज्यस्तरीय नाट्योत्सव के लिए हुआ है. यह नाटक पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगा और 3 अक्टूबर को सहरसा में मंचित होगा.
Saran News : बिहार इप्टा के राज्यस्तरीय नाट्योत्सव ‘सच का रंगमंच: रंगों और विचारों का उत्सव’ में छपरा इप्टा के नाटक ‘द लास्ट क्राई’ का चयन हुआ है. सहरसा में 2 से 4 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले नाट्योत्सव में पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित इस नाटक का मंचन 3 अक्टूबर को किया जायेगा. नाटक के चयन से छपरा के रंगकर्मियों और कला प्रेमियों में उत्साह है.
पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगा ‘द लास्ट क्राई’
डॉ. अमित रंजन द्वारा लिखित, निर्देशित और डिजाइन किया गया यह नाटक पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है. नाटक में सेंट्रल पब्लिक स्कूल के ढाई दर्जन से अधिक किशोर रंगकर्मी हिस्सा ले रहे हैं. युवा कलाकारों के माध्यम से पर्यावरण और समाज के बीच के संबंध को मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया जायेगा.
दो दिवसीय कार्यशाला में कलाकारों को मिला प्रशिक्षण
नाट्योत्सव में प्रस्तुति की तैयारी को लेकर छपरा इप्टा की ओर से स्कूल परिसर में दो दिवसीय प्रोडक्शन ओरिएंटेड थिएटर वर्कशॉप आयोजित की गयी. कार्यशाला में प्रतिभागियों को अभिनय, शरीर की अभिव्यक्ति, स्वर एवं उच्चारण, दृश्य संरचना और प्रस्तुति से जुड़े विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया.
इसके साथ ही कलाकारों को रंगमंच और समाज के संबंधों को समझने का अवसर भी मिला. कार्यशाला का उद्देश्य कलाकारों को केवल अभिनय तक सीमित न रखकर पूरी नाट्य प्रक्रिया से जोड़ना रहा.
कुमार सुमित ने कलाकारों को दिया प्रशिक्षण
कार्यशाला में रानावि सिक्किम के स्नातक और नाट्य-अनुसंधान से जुड़े कुमार सुमित ने प्रशिक्षण दिया. कार्यशाला के समन्वयक सुरेंद्र नाथ त्रिपाठी और निदेशक डॉ. अमित रंजन रहे. प्रशिक्षण के दौरान किशोर कलाकारों को मंच पर संवाद, भाव-भंगिमा और सामूहिक प्रस्तुति के साथ नाटक की तैयारी के विभिन्न चरणों से परिचित कराया गया.
समाज को समझने का माध्यम है रंगमंच
कार्यशाला के समापन पर डॉ. अमित रंजन ने कहा कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है. यह समाज को समझने और सकारात्मक बदलाव की चेतना विकसित करने का सशक्त माध्यम है. उन्होंने कलाकारों को सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर लगातार काम करने के लिए प्रेरित किया.
कुमार सुमित ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य कलाकारों को पूरी नाट्य-प्रक्रिया से जोड़ना है. वहीं सुरेंद्र नाथ त्रिपाठी ने कहा कि छपरा इप्टा लगातार नयी पीढ़ी को रंगमंच से जोड़ने का काम कर रही है.
23 सितंबर को छपरा में होगी पहली प्रस्तुति
‘द लास्ट क्राई’ की पहली प्रस्तुति 23 सितंबर को शाम छह बजे सेंट्रल पब्लिक स्कूल के ऑडिटोरियम में होगी. इसके बाद नाटक का मंचन बिहार इप्टा के राज्यस्तरीय नाट्योत्सव में 3 अक्टूबर को सहरसा में किया जायेगा.

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