शुद्धता के नाम पर तीन लाख का पानी गटक जाते हैं लोग

Published at :20 Apr 2017 3:37 AM (IST)
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शुद्धता के नाम पर तीन लाख का पानी गटक जाते हैं लोग

छपरा (नगर) : इसे स्टेटस सिंबल कहें या मजबूरी, शहरवासियों के लिए शुद्ध पेयजल का स्रोत अब आरओ मशीन या सीलबंद बोतल ही बनता जा रहा है. नगर पर्षद द्वारा शहरवासियों के घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के दावे से लोगों का विश्वास उठने लगा है. जगह-जगह फूटे पाइप को दशकों से नहीं बदला जाना […]

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छपरा (नगर) : इसे स्टेटस सिंबल कहें या मजबूरी, शहरवासियों के लिए शुद्ध पेयजल का स्रोत अब आरओ मशीन या सीलबंद बोतल ही बनता जा रहा है. नगर पर्षद द्वारा शहरवासियों के घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के दावे से लोगों का विश्वास उठने लगा है. जगह-जगह फूटे पाइप को दशकों से नहीं बदला जाना और पानी से बदबू आना कुछ ऐसी प्रमुख वजह हैं, जिस कारण सप्लाइ का पानी पीना तो दूर अब लोग उससे धोने-नहाने का काम भी नहीं करते.

तीन लाख तक का पीते हैं पानी : आरओ प्लांट संचालकों से बातचीत के आधार पर किये गये सर्वे के मुताबिक शहर में प्रतिदिन तीन लाख रुपये तक का पानी बिकता है. प्लांट की गाड़ियां बड़ी बोतलों की सप्लाइ होटलों और दुकानों से बढ़ कर घरों तक कर रही हैं.
मिनरल वाटर का बढ़ा बाजार : गत दो वर्षों में छपरा में लगभग दो दर्जन मिनरल वाटर के प्लांट लगाये गये हैं. शहर में दिन भर में 40-50 छोटे वाहनों से पानी के जार लोगों के घरों तक पहुंचाये जाते हैं.
ब्रांडेड बोतलों की बिक्री अलग है.
बजट में शामिल हुआ पानी : यदि घरों में लगाये जाने वाले आरओ या वाटर फिल्टर को भी शामिल कर लें, तो एक परिवार पानी पर तीन से आठ हजार रुपये वार्षिक खर्च करता है. वर्तमान में लगभग 50 हजार परिवार आरओ का इस्तेमाल कर रहे हैं. यदि इस दृष्टिकोण से देखें तो घरों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सालाना 25 लाख रुपये तक खर्च किये जा रहे हैं.
क्या है मिनरल वाटर : जल जांच प्रयोगशाला के केमिस्ट अनिल कुमार बताते हैं कि मिनरल वाटर में आम तौर पर जल में मौजूद टीडीएस (टोटल डिजॉल्व सॉलिड) की मात्रा को कम कर दिया जाता है. जलमीनारों द्वारा सप्लाइ होने वाले पानी में टीडीएस मिलाने की बजाये लिक्विड क्लोरीन मिलाया जाता है, जो जल शोधक है. बाजार की कंपनियां या घरों में लगे आरओ पानी बैलेंस भी करता है.
आरओ वाटर और सीलबंद बोतलों पर बढ़ रही निर्भरता
दो वर्षों में बढ़ा बिक्री का ग्राफ
सप्लाई से लोगों को नहीं रहा भरोसा
नोट. फोटो नंबर 18 सीएचपी 8 व 9 है. कैप्सन होगा- व मोटरसाइकिल से भी पहुंचाया जाता है पानी का जार.
नोट. सभी वर्जन का फोटो नाम से है.
क्या कहते हैं शहरवासी
घर में सप्लाइ वाले पानी का कनेक्शन है, मगर प्रायः नल से गंदा पानी ही गिरता है. पीने के लिए प्रतिदिन 30 रुपये में 20 लीटर का जार खरीदना पड़ता है.
रंजन विश्वकर्मा
मेरे घर में सप्लाइ का पानी तो आता है, पर वो काफी गंदा रहता है, जिस कारण घर के बगल में लगे चापाकल से पानी ढोना पड़ता है.
विकास कुमार
वर्तमान में सप्लाइ वाले पानी को पीने में इस्तेमाल करना बीमारी को न्योता देना है. पेयजल आपूर्ति के लिए शहर में जलमीनार तो है, पर उसका कोई मेंटेनेंस नहीं होता है.
रोशनी कुमारी, छात्रा
गत दो वर्षों में पानी के कारोबार में वृद्धि हुई है. पानी के जार की डिमांड बढ़ी है, साथ ही सील बंद बोतलों व जार की बिक्री में भी इजाफा हुआ है.
राजेश कुमार गुप्ता, पेयजल व्यवसायी
क्या कहते हैं अधिकारी
शहर में नये सिरे से पाइपलाइन बिछाने की योजना प्रस्तावित है. पहले चरण में शहर के 18 वार्डों का चयन किया गया है. वहीं नौ ट्यूबवेल का भी निर्माण कराया जा रहा है. लोगों के घरों में नल का कनेक्शन भी दिया जायेगा. शहरवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है.
अंजय कुमार राय, निगम आयुक्त, छपरा
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