जीवन को मिला वरदान

Published at :20 Feb 2014 10:22 PM (IST)
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जीवन को मिला वरदान

ठाकुर संग्राम सिंह/राजीव रंजन, छपरा प्रमंडलीय बालिका गृह, छपरा अभिशाप का जीवन बिताने को विवश दर्जन भर बच्चियों को रोशनी दिखाने का काम कर रहा है. इसने कम-से-कम 11 भूली-भटकी 18 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों को उनके भूले भटके माता-पिता से जहां मिलवाया, वहीं रह रही 11 में से आधा दर्जन बच्चियां, तो […]

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ठाकुर संग्राम सिंह/राजीव रंजन, छपरा

प्रमंडलीय बालिका गृह, छपरा अभिशाप का जीवन बिताने को विवश दर्जन भर बच्चियों को रोशनी दिखाने का काम कर रहा है. इसने कम-से-कम 11 भूली-भटकी 18 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों को उनके भूले भटके माता-पिता से जहां मिलवाया, वहीं रह रही 11 में से आधा दर्जन बच्चियां, तो अब बालिका गृह को ही अपने जीवन के लिए वरदान मान रही हैं. आधा दर्जन से ज्यादा वैसी बच्चियां, जिनके माता-पिता हैं ही नहीं, वो बालिका गृह के संचालक को ही माता-पिता मानती हैं. यही नहीं उन्हें ‘भाभा अंकल’ ही मानती हैं. अब वे अपने घर भी जाना नहीं चाहती.

योग, पढ़ाई आदि ने बदली जिंदगी : समाज कल्याण विभाग द्वारा 16 अगस्त से प्रारंभ प्रभुनाथ नगर स्थित इस बालिका गृह में दिल्ली, सिलीगुड़ी, अमृतसर के अलावा विभिन्न स्थानों की 11 बच्चियां, जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम है, विभागीय निर्देश के आलोक में इन बच्चियों को उम्र के हिसाब से तीन समूहों में बांटा गया है. बालिका गृह की क्षमता 50 बच्चियों की है. उनके लिए बिछावन, बेड आदि तमाम सुविधाएं संचालक द्वारा उपलब्ध करायी गयी हैं. अधीक्षक के अनुसार, पांच से 10 वर्ष, 11 से 15 वर्ष तथा 15 से ऊपर तथा 18 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों को अलग-अलग कमरों में रखा जाता है. इन बच्चियों को प्रात: 7.30 बजे से 8.30 तक योग के शिक्षक द्वारा योग कराया जाता है.

8.30 से 10.00 बजे तक नाश्ता व स्नान के बाद 10.00 बजे पूर्वाह्न् प्रार्थना व 10.20 से 12.20 तक हिंदी व अंगरेजी की कक्षाएं पुन: बच्चियों की रुचि के अनुसार पेंटिंग, सिलाई, कंप्यूटर आदि का भी प्रशिक्षण संस्था के शिक्षक व इंस्ट्रक्टर द्वारा दिया जाता है. बालिका गृह में एक चिकित्सक, तीन हाउस मदर, सलाहकार आदि समेत 14 कर्मी तैनात हैं, जिससे बालिकाओं की मनोदशा को ध्यान रखते हुए उनको संतुष्ट किया जा सके.

मॉडल बालिका गृह का दर्जा दिलाने की जतायी इच्छा : संस्था में रह रहीं इन बच्चियों के अलावा अंजलि, रंभा, पिंकी आदि भी अपने जीवन में प्रारंभिक समय में छाये बादल के छट कर नये सवेरा होने की उम्मीद दिखने की बात कहती हैं. बालिका गृह में समय-समय पर यूनिसेफ, समाज कल्याण विभाग, बेल्जियम, किशोर सहायता केंद्र, किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान न्यायाधीश, सीडब्ल्यूसी के सदस्य आदि दर्जनों भर लोगों ने समय-समय पर पहुंच कर अवलोकन कर बेहतर व्यवस्था को लेकर यूनिसेफ के परामर्शी सुनील ने तो मॉडल बालिका गृह बनाने की जरूरत जतायी.

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