धीमी गति से हो रही कार्रवाई

Published at :21 Dec 2015 6:25 PM (IST)
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धीमी गति से हो रही कार्रवाई

धीमी गति से हो रही कार्रवाईइसुआपुर थानाध्यक्ष हत्याकांड. एक साल बाद भी दारोगा के परिजनों को नहीं मिल पाया न्याय 22 दिसंबर, 2014 को अपराधियों की गोली के शिकार हो शहीद हुए थे थानेदार संजय संवाददाता, छपरा (कोर्ट)इसुआपुर के थानाध्यक्ष संजय तिवारी की हत्या का आज एक वर्ष पूरा हो गया. देखते-ही-देखते दिन, सप्ताह और […]

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धीमी गति से हो रही कार्रवाईइसुआपुर थानाध्यक्ष हत्याकांड. एक साल बाद भी दारोगा के परिजनों को नहीं मिल पाया न्याय 22 दिसंबर, 2014 को अपराधियों की गोली के शिकार हो शहीद हुए थे थानेदार संजय संवाददाता, छपरा (कोर्ट)इसुआपुर के थानाध्यक्ष संजय तिवारी की हत्या का आज एक वर्ष पूरा हो गया. देखते-ही-देखते दिन, सप्ताह और महीनों में तब्दील होता हुआ एक वर्ष का सफर भी पूरा कर लिया. 22 दिसंबर, 2014 का ही वह दिन था, जिस दिन बेखौफ अपराधी ने एक दारोगा संजय तिवारी की दिनदहाड़े हत्या कर दी थी. वहीं, सरकारी पिस्टल लूट बाइक से फरार हो गया था. हालांकि, इसका अंजाम भी उक्त अपराधी को अपनी मौत के रूप में ही भुगतना पड़ा. अपराधियों ने गैंगवार में उसकी हत्या कर दी थी.दर्ज करायी गयी थी प्राथमिकीहत्या के वक्त दारोगा के साथ रहे थाने के चौकीदार पुण्यकाल मांझी के पुत्र उपेंद्र कुमार द्वारा तीन अज्ञात अपराधियों के विरुद्ध भादवि की धारा 302, 394, 353, 216ए, 201, 120बी/34 व 27 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया गया था. पुलिस हुई सक्रियएक तरफ प्राथमिक दर्ज होने की प्रक्रिया चल रही थी. वहीं, दूसरी ओर पुलिस हर छोटे-बड़े सुराग के पीछे जी जान से लगी थी. पुलिस को मोबाइल सर्विलांस से सुराग मिला और उसने गंगोई निवासी रिकेश कुमार सिंह के मोबाइल लोकेशन को ट्रेस कर 25 दिसंबर की सुबह उसके घर पर छापा मारा और रिकेश तथा उसके भाई राजन को गिरफ्तार कर लिया. राजन की निशानदेही पर उसके दोस्त अता नगर निवासी रविरंजन कुमार सिंह को भी पुलिस ने पकड़ लिया. दूसरी प्राथमिकी हुई दर्जपुलिस सर्विलांस से मिली जानकारी के अनुसार, एसपी की गोपनीय शाखा के टेक्निकल सेल प्रभारी नीरज कुमार ने थाना कांड संख्या 146/14 में एक प्राथमिकी दर्ज करवायी. इसमें उपरोक्त तीनों के अलावा कैलाश सिंह उर्फ चेक सिंह, मुन्ना चौबे, विजय सिंह, सोनू सिंह, गीता देवी और पंकज कुमार सिंह को नामजद अभियुक्त बनाया गया था. अपराधियों की हुई पहचानइन तीनों की गिरफ्तारी के उपरांत खुलासा हुआ कि घटना में कैलाश उर्फ चेक सिंह, मुन्ना चौबे और विजय सिंह तीनों उस दिन वहां मौजूद थे. इन तीनों की पेट्रोल पंप की राशि लूटने की योजना थी. अचानक वहां थानाध्यक्ष पहुंच गये, जिनकी अपराधियों से कहा-सुनी व हाथापाई हुई और चेक ने दारोगा को गोली मार दी तथा उनकी सरकारी पिस्टल ले अपने साथियों के साथ डिस्कवर मोटरसाइकिल से फरार हो गया.गैंगवार में मारा गया हत्यारा चेक सिंहमामला व अपराधियों का खुलासा होने के बाद पुलिस तीनों अपराधियों की खोज में जुटी हुई थी. इसी बीच घटना के 20वें दिन पुलिस को सूचना मिली कि परसा थाना क्षेत्र में अपराधियों के बीच गैंगवार हुआ है, जिसमें एक अपराधी की हत्या कर दी गयी है. उसकी शिनाख्त कैलाश उर्फ चेक के रूप में की गयी थी. अदालती कार्रवाई पुलिस ने अदालती कार्रवाई के आधार पर अभियुक्तों पर शिकंजा कसना शुरू किया. इसके बाद पता चला कि अपराधियों के एक सहयोगी सोनू सिंह को परसा पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट में गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने उसे रिमांड पर ले पूछताछ की. इससे कई खुलासे हुए. इधर, इस मामले के अनुसंधानकर्ता रामसिद्धेश्वर आजाद अदालती प्रक्रिया के तहत बचे अभियुक्तों के खिलाफ सम्मन, वारंट, इश्तेहार व कुर्की जब्ती का आदेश लेने का प्रयास करते रहे. अदालती आदेश से डर कर बाकी बचे अभियुक्तों ने स्वयं को न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया.

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