प्रशासन व कारा के अधिकारी दिखे परेशान

राजीव रंजन . छपरा (सदर) संवेदनशील मंडल कारा के सजायाफ्ता बंदी मनु सिंह के मंगलवार को कारा के वार्ड में कथित रूप से किरासन तेल छिड़क कर आत्म हत्या करने के प्रयास के बाद सभी प्रशासनिक अधिकारी व जेल के पदाधिकारी परेशान दिखें. घटना के बाद कम से कम तीन घंटे तक मौके पर मौजूद […]
राजीव रंजन . छपरा (सदर)
संवेदनशील मंडल कारा के सजायाफ्ता बंदी मनु सिंह के मंगलवार को कारा के वार्ड में कथित रूप से किरासन तेल छिड़क कर आत्म हत्या करने के प्रयास के बाद सभी प्रशासनिक अधिकारी व जेल के पदाधिकारी परेशान दिखें. घटना के बाद कम से कम तीन घंटे तक मौके पर मौजूद प्रशासनिक पदाधिकारी जहां पूरी घटना के बारे में सब कुछ बताने में टालमटोल करते रहे, वहीं जेल के पदाधिकारियों ने जेल के नंबर 06152-232304 के चोंगा को हटा कर अलग रख दिया. जिससे चाह कर भी घटना के बारे में मीडियाकर्मियों को जानकारी नहीं हो पा रही थी. इस पूरी घटना के पीछे कमोबेश कारा व स्थानीय प्रशासन की उदासीनता ही मानी जायेगी. पूर्व में समाचार पत्रों द्वारा समय-समय पर मंडल कारा में बंदियों के बढ़ते हौसले व प्रशासन की लचर कार्यशैली के कारण कारा में किसी अनहोनी घटना की संभावना जतायी जाती रही है, परंतु वरीय पदाधिकारियों इसे नजर अंदाज किया. फलत: कई बंदियों का मनोबल बढ़ता गया.
26 मोबाइल व शराब की बोतल हुई थी जब्त
10 अक्तूबर को मंडल कारा सदर एसडीओ तथा सदर एसडीओ द्वारा छापामारी कर 26 मोबाइल सेट, 8 बोतल विदेशी शराब तथा अन्य आपत्तिजनक सामान जब्त किया गया. इस घटना के बाद अबतक प्रशासन यह पता नहीं कर पाया कि जब्त मोबाइल आखिर किन-किन बंदियों के थे. यहीं नहीं जब्ती के बाद से कम से कम पांच बार मोबाइल कारा की दीवार से फेंके जाने व जब्ती की घटना सामने आयी. परंतु, प्रशासन ने अबतक दोनों घटनाओं में यह पता करने की जरूरत नहीं समझी, आखिर मोबाइल का सिम किसके नाम है. यहीं नहीं महज खानापूर्ति के लिए काराधीक्षक द्वारा तीन कक्षपालों को ड्यूटी से हटा कर कारा विभाग को रिपोर्ट भेजने व निलंबन की अनुशंसा की बात कही गयी. परंतु, अबतक निलंबन तो दूर कोई ठोस कार्रवाई भी नहीं हुई. 20 अक्तूबर को वार्ड नंबर 18 से एक बंदी के मोबाइल जब्त होने पर कारा प्रशासन व कुछ बंदियों के बीच टकराहट की बात सामने आयी थी. इस संबंध में ‘प्रभात खबर’ द्वारा 21 अक्तूबर के अंक में प्रमुखता से खबर भी प्रकाशित किया गया था. जिसमें बंदियों के बढ़ते मनोबल व प्रशासनिक लाचारी का जिक्र था. वहीं पूर्व में भी 28 सितंबर व 8 अक्तूबर को छपरा जेल के सुरक्षा को लेकर कई संवेदनशील मुद्दों पर ध्यान आकृष्ट कराया गया था. परंतु, वरीय विभागीय पदाधिकारियों की उदासीनता के कारण बंदियों के सामने कारा प्रशासन बौना बना रहा. इसका परिणाम ही मंगलवार की घटना है.
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