10 वर्षो में भी दूर नहीं हुईं कमियां

Published at :09 May 2015 9:53 AM (IST)
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10 वर्षो में भी दूर नहीं हुईं कमियां

रोसड़ा : स्थानीय यूआर कॉलेज प्रशासन ने नैक की जांच रिपोर्ट में दिखाये गये कमी को 10 वर्षो के बाद भी अब तक पूरा करने में अक्षम साबित हुई है. कॉलेज में सुविधाओं में प्रगति होने के बदले सभी क्षेत्रों में कमी ही आयी है. वर्ष 2005 में पियर टीम ने पांच के समय कॉलेज […]

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रोसड़ा : स्थानीय यूआर कॉलेज प्रशासन ने नैक की जांच रिपोर्ट में दिखाये गये कमी को 10 वर्षो के बाद भी अब तक पूरा करने में अक्षम साबित हुई है. कॉलेज में सुविधाओं में प्रगति होने के बदले सभी क्षेत्रों में कमी ही आयी है.
वर्ष 2005 में पियर टीम ने पांच के समय कॉलेज में 18 शिक्षक थे. वर्तमान में मात्र सात शिक्षक ही मौजूद हैं. उस समय टीम ने जांच के आधार पर विभिन्न कमियों के कारण किसी भी तरह के ग्रांड से वंचित रह गया था. उस कमी को पूरा करने में कॉलेज प्रशासन ने कभी दिलचस्पी नहीं दिखायी. इस कारण वर्तमान में भी कॉलेज में सिर्फ नामांकन व परीक्षा के अलावा कुछ नहीं हो पा रहा है.
ऐसी परिस्थिति में छात्र अगर कोचिंग का सहारा न ले तो उनका भविष्य अंधकार में डूब जायेगा. ज्ञात हो कि नैक पियर टीम ने वर्ष 05 में कॉलेज में जांच के बाद जो रिपोर्ट सौंपी. उस रिपोर्ट में जो कमी दिखाई गयी. उसकी भरपाई नहीं हो पायी है. रिपोर्ट में कहा गया था कि यहां शिक्षकों की कमी है.
एडहॉक शिक्षक की व्यवस्था नहीं है. कॉलेज में कक्षा संचालन नहीं होता है. छात्रों की शिकायत सुनने की व्यवस्था नहीं है. वहीं रिफ्रेसर व ओरिएंटेशन कोर्स में शिक्षक नहीं जाते हैं. प्रायोगिक सुविधा नहीं हैं. लाइब्रेरी कमजोर है. छात्र काउंसेलिंग सेल नहीं है. छात्रों के स्वास्थ्य की देखभाल की व्यवस्था नहीं है. इंटरनेट ऑडियो विजुअल फैसिलिटी नहीं है. इसके अलावा पुराने छात्रों को कोई संगठन नहीं है. साथ ही कॉलेज में कोई व्यावसायिक शिक्षा की व्यवस्था नहीं है.
उक्त सारी कमियों को टीम द्वारा 10 वर्ष पूर्व ही दिखाया गया था. इसमें कॉलेज प्रशासन ने मात्र एक कमी इंटरनेट की सुविधा ही उपलब्ध करा सकी है. शेष सभी कमी बचा ही है.
इसके अलावा कॉलेज में एनएसएस, एनसीसी, कैंटीन, साइकिल स्टैंड, लाइब्रेरी, लेबोरेट्री, शिक्षकों का लगातार शोध कार्य से अलग रहना, हेल्थ सेंटर, पेयजल व शौचालय की उचित व्यवस्था नहीं रहने से छात्र-छात्रओं को काफी कठिनाई होती है. वहीं मिलने वाली ग्रांट से भी वंचित रहना पड़ सकता है.
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