संगठित प्रयास से ही भोजपुरी को मिलेगी सरकारी मान्यता
Updated at : 19 Jun 2019 5:03 AM (IST)
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छपरा : अभिनय, एंकरिंग व पटकथा लेखन के माध्यम से भोजपुरी जगत में अपनी अमिट छोड़ने वाले भोजुपरी के युवा साहित्यकार मनोज भावुक ने भोजपुरी साहित्य व वर्तमान में भोजपुरी के महत्व पर प्रभात खबर के साथ चर्चा की. छपरा में एक साहित्यिक समागम में पहुंचे मनोज भावुक ने कहा कि आज भोजपुरी को सरकारी […]
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छपरा : अभिनय, एंकरिंग व पटकथा लेखन के माध्यम से भोजपुरी जगत में अपनी अमिट छोड़ने वाले भोजुपरी के युवा साहित्यकार मनोज भावुक ने भोजपुरी साहित्य व वर्तमान में भोजपुरी के महत्व पर प्रभात खबर के साथ चर्चा की. छपरा में एक साहित्यिक समागम में पहुंचे मनोज भावुक ने कहा कि आज भोजपुरी को सरकारी मान्यता दिलाने के लिए संगठित प्रयास की आवश्यकता है.
जिस क्षेत्र से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभाध्यक्ष, मुख्यमंत्री व 40 सांसद आते हों, उस क्षेत्र की भाषा अपनी स्वीकार्यता को संवैधानिक दर्जा दिलाने के लिए संघर्षरत है. भारत के बाहर के देशों में भोजपुरी को मान्यता मिली है. लेकिन अपने ही देश में इसे संवैधानिक दर्जा देने के लिये सकारात्मक प्रयास नहीं किया जा रहा है. जो नेता चुनाव के समय भोजपुरिया क्षेत्र में आकर वोट मांगते हैं उनलोगों से विनती है कि एकजुट हों और भोजपुरी को आठवीं अनुसूचि में शामिल कराने का मार्ग प्रशस्त करें.
उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए भोजपुरी क्षेत्र में समृद्ध कैरियर है. इसके लिए हम सबको मिलकर सृजन का मार्ग तैयार करना होगा. उन्होंने बताया कि भोजपुरी में बढ़ती अश्लीलता को लेकर आज समाज में काफी शोर मचाया जा रहा है. हालांकि शोर को दबाने के लिए शोर जरूरी नहीं होता बल्कि ऐसे मौकों पर हमारी चुप्पी ही बड़ा निष्कर्ष निकालती है. आने वाले समय में भोजपुरी को निश्चित ही जनभाषा के रूप में स्वीकार्यता मिलेगी.
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