छूटे आंगनबाड़ी केंद्रों की मैपिंग शीघ्र पूरी करें
Author Prabhat khabar digital desk
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छपरा (सदर) : जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों पर सेविका-सहायिकाओं के चयन को ले डीएम सुब्रत कुमार सेन ने मंगलवार को समाहरणालय सभाकक्ष में एक समीक्षा बैठक की. बैठक में उन्होंने निर्देश दिया कि छूटे हुए आंगनबाड़ी केंद्रों पर सर्वे मैपिंग का काम शीघ्र पूरा कर लिया जाये, ताकि उन केंद्रों के रिक्त पदों पर […]
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छपरा (सदर) : जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों पर सेविका-सहायिकाओं के चयन को ले डीएम सुब्रत कुमार सेन ने मंगलवार को समाहरणालय सभाकक्ष में एक समीक्षा बैठक की. बैठक में उन्होंने निर्देश दिया कि छूटे हुए आंगनबाड़ी केंद्रों पर सर्वे मैपिंग का काम शीघ्र पूरा कर लिया जाये, ताकि उन केंद्रों के रिक्त पदों पर बहाली की प्रक्रिया को पूरी की जा सके.
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इस दौरान डीएम ने आइसीडीएस के डीपीओ को विभाग से चयन संबंधित मार्गदर्शन प्राप्त करने का जहां निर्देश दिया, वहीं सभी सीडीपीओ को निर्देशित किया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से चलायी जाने वाली सरकार की विभिन्न योजनाओं तथा किशोरी बालिका योजना तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना एवं कन्या उत्थान योजना के निर्धारित लक्ष्य का शत प्रतिशत आवेदन प्राप्त कर अपलोड करना सुनिश्चित करें. इस दौरान उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों पर सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा केंद्रों का नियमित संचालन करने की जरूरत जतायी. समीक्षा बैठक के दौरान मनमाने ढंग से गायब रहने वाले जिले की 12 सीडीपीओ के अनुपस्थित रहने के मामले को डीएम ने गंभीरता से लिया.
साथ ही इन सभी सीडीपीओ का एक दिन का वेतन रोकते हुए कारणपृच्छा का निर्देश डीपीओ आइसीडीएस को दिया. जो सीडीपीओ बैठक में अनुपस्थित थीं, उनमें छपरा सदर, छपरा ग्रामीण, रिविलगंज, बनियापुर, इसुआपुर, मढ़ौरा, अमनौर, मकेर, गड़खा, परसा, दरियापुर, सोनपुर तथा एकमा सीडीपीओ शामिल हैं. बैठक में डीडीसी सुहर्ष भगत, डीआरडीए निदेशक सुनील कुमार पांडेय, आइसीडीएस डीपीओ वंदना पांडेय तथा अन्य सीडीपीओ उपस्थित थीं. मालूम हो कि जिले की विभिन्न परियोजनाओं में विभागीय जानकारी के अनुसार लगभग 1200 सहायिकाओं एवं सेविकाओं की बहाली की जानी है. यह प्रक्रिया विगत एक वर्ष से लंबित है.
जिले में लगभग तीन सौ से साढ़े तीन सौ आंगनबाड़ी केंद्र या तो बंद हैं या दूसरे आंगनबाड़ी केंद्रों से टैग कर संचालन की खानापूर्ति की जा रही है. इससे बड़ी संख्या में बच्चों एवं महिलाओं को एक योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. आरोप है कि ऐसे केंद्रों से जुड़ी अधिकतर सेविकाएं, सहायिकाएं, पर्यवेक्षिका से लेकर अन्य पदाधिकारी भी इनके नाम पर मिलने वाली योजना की राशि का बंदरबांट कर लेते हैं. जिले में लगभग 3500 आंगनबाड़ी केंद्र या मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों को संचालित करने का निर्देश समाज कल्याण विभाग से प्राप्त है.
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