राजधानी एक्सप्रेस में अब नहीं मिलेगी पुरानी सफेद चादर, रेलवे ने शुरू की नई बेडिंग व्यवस्था

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प्रतीकात्मक तस्वीर

राजधानी एक्सप्रेस में अब यात्रा के दौरान आपको बदली हुई बेडिंग व्यवस्था मिलेगी. पुरानी सफेद चादरों और काले कंबलों की जगह अब भूरे रंग की चादरें और प्रिंटेड दोहर यात्रियों को दी जाएंगी. यह बदलाव फिलहाल रांची-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस के दो फेरों में लागू किया गया है.

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Indian Railways Bedding: राजधानी एक्सप्रेस में सफर करने वाले यात्रियों को जल्द ही बदली हुई बेडिंग व्यवस्था देखने को मिलेगी. रेलवे ने चरणबद्ध तरीके से ट्रेनों में चादर, तकिया खोल और कंबल के रंग व डिजाइन में बदलाव शुरू कर दिया है. अब पुरानी सफेद चादर और काले कंबल की जगह भूरे रंग की चादर और प्रिंट वाली दोहर उपलब्ध करायी जा रही है. फिलहाल रांची-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस के दो फेरों में यह नई व्यवस्था लागू की गयी है. रेलवे चरणबद्ध तरीके से अन्य महत्वपूर्ण ट्रेनों में भी इसे लागू करने की तैयारी कर रहा है.

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सफेद चादर की जगह भूरे रंग की चादर

नई व्यवस्था के तहत राजधानी एक्सप्रेस में सफेद रंग की पुरानी चादर और तकिया खोल की जगह भूरे रंग की चादर और तकिया खोल का इस्तेमाल शुरू किया गया है. इससे ट्रेन के बेडरोल का पूरा रूप पहले की तुलना में अलग नजर आयेगा.

वहीं, यात्रियों को मिलने वाले कंबल में भी बदलाव किया गया है. काले रंग के पारंपरिक कंबल की जगह प्रिंट वाली दोहर उपलब्ध करायी जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, नयी दोहर पर सांगानेरी प्रिंट का इस्तेमाल किया गया है.

अभी राजधानी के दो फेरों में लागू हुई व्यवस्था

रेलवे ने फिलहाल इस बदलाव को सीमित स्तर पर शुरू किया है. रांची-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस के दो फेरों में नई बेडिंग व्यवस्था लागू की गयी है. इसे चरणबद्ध तरीके से दूसरी महत्वपूर्ण ट्रेनों तक बढ़ाया जायेगा.

इस बदलाव का उद्देश्य यात्रियों को अधिक सुविधाजनक और आकर्षक बेडिंग उपलब्ध कराना है. यानी आने वाले समय में अन्य प्रमुख ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को भी पुराने बेडरोल की जगह नये रंग और डिजाइन की बेडिंग मिल सकती है.

एसी यात्रियों को मिलता है पूरा बेडरोल

रेलवे के अनुसार, एसी श्रेणी में सफर करने वाले यात्रियों को हर यात्रा में बेडरोल उपलब्ध कराया जाता है. इसमें दो चादर, एक तकिया खोल और एक हाथ तौलिया शामिल होता है. इनमें एक चादर सीट पर बिछाने के लिए और दूसरी चादर कंबल के नीचे सुरक्षा परत के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए होती है. यह अतिरिक्त चादर एक बार इस्तेमाल के बाद धोयी जाती है.

रेलवे ने बेडिंग की सफाई व्यवस्था को लेकर भी कई कदम उठाये हैं. जुलाई 2026 में रेलवे ने बताया था कि पुणे, जयपुर और जोधपुर मंडलों की कुछ मशीनीकृत धुलाई इकाइयों में कपड़ों पर दाग की पहचान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कैमरा तकनीक का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है. धुलाई प्रक्रिया की निगरानी के लिए सीसीटीवी का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

बेडिंग की सफाई और उपयोग अवधि पर भी नियम

रेलवे के अनुसार, बेडशीट, तकिया खोल और तौलिया जैसी वस्तुओं को प्रत्येक उपयोग के बाद धोया जाता है. ऊनी कंबल की धुलाई कम से कम महीने में एक बार की जाती है. रेलवे ने विभिन्न बेडिंग वस्तुओं के लिए निर्धारित उपयोग अवधि भी तय कर रखी है. बेडशीट की निर्धारित अवधि उसके प्रकार के अनुसार 12 या 24 महीने, जबकि तकिया खोल और फेस टॉवल की अवधि नौ महीने है.

नई बेडिंग व्यवस्था ऐसे समय में शुरू की जा रही है, जब रेलवे एसी ट्रेनों में यात्रियों को मिलने वाली लिनेन व्यवस्था की गुणवत्ता और स्वच्छता पर भी लगातार काम कर रहा है. आने वाले समय में अन्य महत्वपूर्ण ट्रेनों में भी नई चादर, तकिया खोल और कंबल के विकल्प उपलब्ध कराये जाने की उम्मीद है.

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