खरीफ फसलों पर गहराया उर्वरक संकट: यूरिया और डीएपी की भारी किल्लत, एनपीके की भरमार से किसान बेहाल

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खरीफ फसलों पर गहराया उर्वरक संकट: यूरिया और डीएपी की भारी किल्लत, एनपीके की भरमार से किसान बेहाल

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समस्तीपुर में यूरिया और डीएपी खाद की भारी किल्लत से किसान परेशान हैं। मांग के मुकाबले आपूर्ति कम होने से खरीफ फसलों की पैदावार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

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समस्तीपुर उर्वरक संकट: जिले में खरीफ सीजन के सबसे महत्वपूर्ण दौर में किसानों के सामने उर्वरक का भीषण संकट खड़ा हो गया है. खेतों में पटवन के बाद फसलों के बेहतर विकास और जड़ों को मजबूती देने के लिए किसान दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन प्रमुख खाद केंद्रों से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है. 1 अप्रैल 2026 से 29 अगस्त 2026 तक की आधिकारिक रिपोर्ट ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है. आंकड़ों से साफ जाहिर है कि जिले को मांग के अनुरूप न तो उर्वरक की आपूर्ति मिली है और न ही समय पर वितरण हो सका है. सबसे अधिक मांग वाली यूरिया और डीएपी की भारी किल्लत के बीच एनपीके का अनावश्यक स्टॉक डंप कर कागजी आंकड़े दुरुस्त किए जा रहे हैं.

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यूरिया की आपूर्ति में 5 हजार मीट्रिक टन का भारी अंतर

धान और मक्का की फसल के लिए यूरिया सबसे प्राथमिक जरूरत है. जिले में वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:

  • इस खरीफ सीजन में जिले के लिए 30,000 मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता आंकी गई थी.
  • जिले को 29 अगस्त तक मात्र 25,805.70 मीट्रिक टन यूरिया ही प्राप्त हो सका.
  • इसमें से 24,964.65 मीट्रिक टन यूरिया किसानों के बीच वितरित किया जा चुका है.
  • अब थोक विक्रेताओं के पास महज 1,055.07 मीट्रिक टन यूरिया ही शेष बचा है.
  • मांग और आपूर्ति के बीच 5,000 मीट्रिक टन से अधिक का सीधा अंतर होने से हाहाकार मचा है.

जरूरत से 40 फीसदी कम मिला डीएपी, पौधे के विकास पर असर

फसलों के शुरुआती विकास के लिए डीएपी सबसे अनिवार्य उर्वरक है, लेकिन इसकी भारी कमी बनी हुई है:

  • जिले को कुल 7,500 मीट्रिक टन डीएपी की दरकार थी.
  • पुराने अवशेष 1,395.90 मीट्रिक टन और नई प्राप्ति 3,862.95 मीट्रिक टन मिलाकर कुल उपलब्धता केवल 5,258.85 मीट्रिक टन रही.
  • इसमें से 4,443.70 मीट्रिक टन डीएपी किसानों में बांटा गया, जबकि थोक में सिर्फ 815.15 मीट्रिक टन बचा है.
  • आवश्यकता की तुलना में करीब 40 प्रतिशत कम डीएपी मिलने से बुआई और फसल वृद्धि प्रभावित हो रही है.

एनपीके की जबरन आपूर्ति, कागजों और धरातल में बड़ा विरोधाभास

एक तरफ जहां यूरिया और डीएपी के लिए मारामारी मची है, वहीं 6,000 मीट्रिक टन की जरूरत के मुकाबले 10,112.25 मीट्रिक टन एनपीके पहुंचा दिया गया है. एनपीके का 6,426.15 मीट्रिक टन वितरण होने के बाद भी थोक में 3,686.10 और खुदरा में 5,407.95 मीट्रिक टन का स्टॉक पड़ा है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार एनपीके यूरिया या डीएपी का पूर्ण विकल्प नहीं हो सकता. इसके अलावा एमओपी की 3,000 मीट्रिक टन मांग पर 2,072.15 मीट्रिक टन और एसएसपी की 3,000 मीट्रिक टन मांग पर केवल 665.20 मीट्रिक टन वितरण हुआ है. कागजों में खुदरा विक्रेताओं के पास 11,549.85 मीट्रिक टन यूरिया और 3,095.95 मीट्रिक टन डीएपी दर्ज है, लेकिन दुकानों पर पहुंचने वाले किसानों को सीधे 'स्टॉक खत्म' का बोर्ड दिखाया जा रहा है.

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