दो महीने पूर्व लिखी गयी स्क्रिप्ट!

Published at :24 Feb 2017 9:25 AM (IST)
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दो महीने पूर्व लिखी गयी स्क्रिप्ट!

वारदात. बांका व जमुई से मोरवा में आये नक्सलियों ने बनायी थी योजना जंदाहा थाने पर हो चुका है नक्सली हमला समस्तीपुर : जिले के मोरवा प्रखंड के गुनाइ बसही के पनघट्टा घाट पर पुल निर्माण कंपनी के कैंप पर नक्सली हमले की स्क्रिप्ट दो माह पूर्व बांका व जमुई से आये नक्सलियों ने तैयार […]

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वारदात. बांका व जमुई से मोरवा में आये नक्सलियों ने बनायी थी योजना

जंदाहा थाने पर हो चुका है नक्सली हमला
समस्तीपुर : जिले के मोरवा प्रखंड के गुनाइ बसही के पनघट्टा घाट पर पुल निर्माण कंपनी के कैंप पर नक्सली हमले की स्क्रिप्ट दो माह पूर्व बांका व जमुई से आये नक्सलियों ने तैयार की थी! ऐसा जानकारों का कहना है. जानकार बताते हैं कि वैशाली जिले के नक्सल प्रभावित पातेपुर से सटा होने के कारण यहां नक्सलियों का आना-जाना लगा रहता है. हालांकि, पुलिसिया दबिश के कारण नक्सली क्षेत्र में पांव नहीं पसार रहे थे. चर्चा है कि इन दिनों इस क्षेत्र में कई चर्चित नक्सली आकर शरण ले रहे हैं. शरण लेने के दौरान ही अपराध क्षेत्र से जुड़े कुछ युवाओं को उन लोगों ने नक्सल का पाठ पढ़ाया है.
सूत्रों पर भरोसा करें, तो दो माह पूर्व बांका व जमुई क्षेत्र के कई बड़े नक्सली हलई ओपी के जंदाहा से सटे एक गांव में कई दिनों तक रुके थे. नक्सलियों के रुकने की जानकारी पुलिस प्रशासन को भी थी.
बता दें कि पिछले वर्ष पूर्व शहर के वीरकुंवर सिंह कॉलोनी से पुलिस ने सीतामढ़ी के 50 हजार का इनामी नक्सली भास्कर को गिरफ्तार किया था. भास्कर उक्त कॉलोनी में भाड़े के मकान में रह रहा था. हालांकि, पुलिस अधीक्षक नवल किशोर सिंह इस घटना को नक्सली नहीं मान रहे. उन्होंने कहा कि अबतक की जांच में इस घटना में स्थानीय अपराधियों का हाथ लग रहा है.
घटना स्थल से नक्सली का परचा मिला है उस पर भी जांच चल रही है. परचा जिस तरीके से लिखा गया है, वह नक्सली का नहीं हो सकता. पर्चा पर सचिव का हस्ताक्षर है, जबकि नक्सली में सचिव नहीं एरिया व जोनल कमांडर होते हैं. इससे लग रहा है कि स्थानीय अपराधियों ने दहशत कायम करने के लिए नक्सली की हवा दी है.
नक्सली दिलाते रहे हैं उपस्थिति का एहसास : जिले में भले ही नक्सलियों ने बड़ी घटना को अंजाम नहीं दिया है, लेकिन वह अपनी उपस्थिति का एहसास समय-समय पर कराते रहे हैं. इस घटना से पूर्व भी नक्सलियों ने सरायरंजन थाने की दीवार पर पोस्ट चिपका दिया था. इससे पूर्व नक्सलियों ने पटोरी स्टेशन पर हाजीपुर-बरौनी सवारी गाड़ी में स्कार्ट पार्टी के जवानों की आंखों में मिर्च की गुंडी डाल कर चार रायफलें लूट ली थीं. कुछ वर्ष पूर्व हसनपुर-नयानगर स्टेशन के बीच भी सहरसा समस्तीपुर सवारी गाड़ी से नक्सलियों ने स्कॉट पार्टी के जवान को चाकू मार उनकी रायफल लूट ली थी. दोनों जगहों से लूटी गयी रायफल आजतक बरामद नहीं हुई. इस घटना के कुछ दिनों बाद ही नक्सलियों ने रामभद्रपुर स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक उड़ा दिया था. रोसड़ा बाजार में कई दुकानों पर लेवी का पोस्ट चिपका दिया था.
नक्सली गतिविधियों की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं
जिले में नक्सलियों की आवाजाही व उनके स्थानीय मददगारों को चिह्नित करने के लिए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र लाल दास ने वर्ष 07 में एक दारोगा को सादी वर्दी में ड्यूटी लगाया था. कई महीनों की खाक छानने के बाद उक्त दारोगा ने एसपी को जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में नक्सलियों के मददगारों को चिह्नित कर नक्सलियों की आवाजाही के रास्तों तक की पूरी ब्लू प्रिंट दी थी, लेकिन रिपोर्ट के कुछ माह बाद ही एसपी का तबादला होते ही उसे रद‍्दी की टोकरी में डाल दिया गया. उस वक्त चर्चा थी कि उक्त दारोगा की रिपोर्ट के ही नक्सलियों के संभावित हमले को देख जिले के कई पुलिस पिकेट को बंद कर दिया गया था.
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